अखंड सुहाग की कामना से सुहागिन महिलाएं आज कार्तिक कृष्ण चतुर्थी में करवा चौथ का व्रत करेंगी। पति की लंबी आयु और उन्नत गृहस्थ जीवन के लिए यह व्रत आज ग्रह-गोचरों के त्रिवेणी संयोग में मनाई जाएगी। आज चंद्रमा को अर्घ्य रात 08:56 बजे के बाद दिया जाएगा। करवा चौथ पर आज शाम 03:45 बजे तक रोहिणी नक्षत्र फिर मृगशिरा नक्षत्र, परिघ योग, बुधादित्य योग और लक्ष्मीनारायण योग का त्रिवेणी संयोग बना है। ऐसे शुभकारी योग में भगवान शिव, माता पार्वती, गणेश, कार्तिकेय, चंद्रदेव के साथ करवा माता की पूजा से अखंड सुहाग, दीर्घायु, आरोग्यता, आपसी प्रेम, सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलेगा। चंद्रमा मन और वैवाहिक सुख का कारक है। मिट्टी के करवे से रात्रि बेला चंद्रदेव को होगा जल अर्पण ज्योतिषाचार्य राकेश झा ने बताया कि सनातन परंपरा में पत्नी-पति के परस्पर संतोष और सम्मान को परिवार के सुख-कल्याण का आधार माना गया है। माता पार्वती ने शिव की प्रसन्नता के लिए और दौपदी ने पांडवों के संकट दूर करने के लिए यह व्रत किया था। प्रेम, त्याग व विश्वास के महापर्व में करवा माता की पूजा के बाद पौराणिक कथा श्रवण करके मिट्टी के करवे से रात्रि बेला चंद्रदेव को जल अर्पण कर व्रत पूर्ण करेंगी। चन्द्रमा के उदय तक रहेगा व्रत करवा चौथ पर आज व्रती महिलाएं पूरे दिन व्रत रखेंगी और नए वस्त्र- श्रृंगार करके भगवत पूजन के बाद रात्रि बेला में चंद्रमा को चलनी से दीप के साथ देखेंगी। फिर उसी से पति को देखते हुए चंद्रमा को अर्घ्य प्रदान करेंगी। अर्घ्य में दूध, शहद, मिश्री और नारियल दिया जाएगा। ज्योतिषी राकेश झा के अनुसार करवा चौथ का व्रत सूर्योदय से शुरू होकर चंद्रोदय तक रहता है। आज व्रती महिलाएं रात्रि काल में चन्द्रमा की दर्शन, पूजा और अर्घ्य देने के बाद पति के हाथ से जल पीकर पूर्ण करेंगी। चलनी में देखने से विचार होते शुद्ध व्रती महिलाएं चलनी से चंद्र दर्शन के बाद अपने पति को उसी चलनी से देखती है।.शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार चलनी से पति को देखने से पत्नी के व्यवहार और विचार दोनों छन कर शुद्ध हो जाते है। करवा चौथ व्रत की कथा करवा चौथ का पर्व पतिव्रता वीरावती की कथा से जुड़ा है। मान्यता है कि वीरावती सात भाइयों की इकलौती बहन थी। विवाह के बाद उसने करवा चौथ का व्रत रखी, दिनभर भूख-प्यासी रहने से व्याकुल हो गई। करवा चौथ के दिन भूख से व्याकुल बहन को देख भाइयों ने छल से दीपक की लौ दिखाकर चन्द्रमा का भ्रम करा दिया, जिससे उसका व्रत खंडित हो गया और उनके पति पर संकट आ गया। फिर से वीरवती ने अटूट भक्ति, श्रद्धा, तप और नियमपूर्वक व्रत का पालन कर यमराज से अपने पति के प्राण पुनः प्राप्त कर ली। इन मंत्रों से होगी पूजा माता पार्वती को ॐ उमायै नम:, भगवान शिव को ॐ नमः शिवाय, कार्तिकेय जी को ॐ षण्मुखाय नमः, ॐ गणेशाय नमः से गणेश का और ॐ सोमाय नमः से चंद्रमा का पूजन करने से मनोकामना पूर्ण तथा अखंड सौभाग्य का वरदान मिलेगा। अखंड सुहाग की कामना से सुहागिन महिलाएं आज कार्तिक कृष्ण चतुर्थी में करवा चौथ का व्रत करेंगी। पति की लंबी आयु और उन्नत गृहस्थ जीवन के लिए यह व्रत आज ग्रह-गोचरों के त्रिवेणी संयोग में मनाई जाएगी। आज चंद्रमा को अर्घ्य रात 08:56 बजे के बाद दिया जाएगा। करवा चौथ पर आज शाम 03:45 बजे तक रोहिणी नक्षत्र फिर मृगशिरा नक्षत्र, परिघ योग, बुधादित्य योग और लक्ष्मीनारायण योग का त्रिवेणी संयोग बना है। ऐसे शुभकारी योग में भगवान शिव, माता पार्वती, गणेश, कार्तिकेय, चंद्रदेव के साथ करवा माता की पूजा से अखंड सुहाग, दीर्घायु, आरोग्यता, आपसी प्रेम, सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलेगा। चंद्रमा मन और वैवाहिक सुख का कारक है। मिट्टी के करवे से रात्रि बेला चंद्रदेव को होगा जल अर्पण ज्योतिषाचार्य राकेश झा ने बताया कि सनातन परंपरा में पत्नी-पति के परस्पर संतोष और सम्मान को परिवार के सुख-कल्याण का आधार माना गया है। माता पार्वती ने शिव की प्रसन्नता के लिए और दौपदी ने पांडवों के संकट दूर करने के लिए यह व्रत किया था। प्रेम, त्याग व विश्वास के महापर्व में करवा माता की पूजा के बाद पौराणिक कथा श्रवण करके मिट्टी के करवे से रात्रि बेला चंद्रदेव को जल अर्पण कर व्रत पूर्ण करेंगी। चन्द्रमा के उदय तक रहेगा व्रत करवा चौथ पर आज व्रती महिलाएं पूरे दिन व्रत रखेंगी और नए वस्त्र- श्रृंगार करके भगवत पूजन के बाद रात्रि बेला में चंद्रमा को चलनी से दीप के साथ देखेंगी। फिर उसी से पति को देखते हुए चंद्रमा को अर्घ्य प्रदान करेंगी। अर्घ्य में दूध, शहद, मिश्री और नारियल दिया जाएगा। ज्योतिषी राकेश झा के अनुसार करवा चौथ का व्रत सूर्योदय से शुरू होकर चंद्रोदय तक रहता है। आज व्रती महिलाएं रात्रि काल में चन्द्रमा की दर्शन, पूजा और अर्घ्य देने के बाद पति के हाथ से जल पीकर पूर्ण करेंगी। चलनी में देखने से विचार होते शुद्ध व्रती महिलाएं चलनी से चंद्र दर्शन के बाद अपने पति को उसी चलनी से देखती है।.शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार चलनी से पति को देखने से पत्नी के व्यवहार और विचार दोनों छन कर शुद्ध हो जाते है। करवा चौथ व्रत की कथा करवा चौथ का पर्व पतिव्रता वीरावती की कथा से जुड़ा है। मान्यता है कि वीरावती सात भाइयों की इकलौती बहन थी। विवाह के बाद उसने करवा चौथ का व्रत रखी, दिनभर भूख-प्यासी रहने से व्याकुल हो गई। करवा चौथ के दिन भूख से व्याकुल बहन को देख भाइयों ने छल से दीपक की लौ दिखाकर चन्द्रमा का भ्रम करा दिया, जिससे उसका व्रत खंडित हो गया और उनके पति पर संकट आ गया। फिर से वीरवती ने अटूट भक्ति, श्रद्धा, तप और नियमपूर्वक व्रत का पालन कर यमराज से अपने पति के प्राण पुनः प्राप्त कर ली। इन मंत्रों से होगी पूजा माता पार्वती को ॐ उमायै नम:, भगवान शिव को ॐ नमः शिवाय, कार्तिकेय जी को ॐ षण्मुखाय नमः, ॐ गणेशाय नमः से गणेश का और ॐ सोमाय नमः से चंद्रमा का पूजन करने से मनोकामना पूर्ण तथा अखंड सौभाग्य का वरदान मिलेगा।

