NEET Paper Leak पर Delhi में Youth Congress का हल्लाबोल, JPC जांच और इस्तीफे की मांग तेज

NEET Paper Leak पर Delhi में Youth Congress का हल्लाबोल, JPC जांच और इस्तीफे की मांग तेज
भारतीय युवा कांग्रेस (आईवाईसी) ने दिल्ली में विरोध प्रदर्शन किया और कथित NEET-UG परीक्षा के पेपर लीक को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे की मांग की। दिल्ली युवा कांग्रेस के अध्यक्ष अक्षय लकरा के नेतृत्व में प्रदर्शनकारी रायसीना रोड की ओर बढ़े और मामले की संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) द्वारा जांच की मांग की। आईवाईसी के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब ने भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की परीक्षा की निष्पक्षता सुनिश्चित करने में विफल रहने के लिए आलोचना की।
 

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कांग्रेस ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी को रद्द किए जाने का हवाला देते हुए बुधवार को कहा कि इस मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तत्काल इस्तीफा देना चाहिए और पेपर लीक मामले की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) का गठन होना चाहिए। कांग्रेस की युवा ईकाई भारतीय युवा कांग्रेस के अध्यक्ष उदय भानु चिब और छात्र इकाई एनएसयूआई के अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने पार्टी कार्यालय में संवाददाताओं से यह भी कहा कि सरकार को परीक्षा रद्द होने से प्रभावित बच्चों को उचित मुआवजा प्रदान करना चाहिए।
चिब ने कहा, नीट पेपर लीक एक बड़ा मुद्दा है। पिछले 10 साल में 89 पेपर लीक हुए हैं और 48 बार दोबारा परीक्षाएं हुई हैं। यानी सरकार ने बच्चों के प्रति अपनी जवाबदेही ख़त्म कर दी है। उन्होंने कहा, हम उन बच्चों की जगह खुद को रखकर देखें तो शायद उनका दर्द महसूस कर पाएं। बच्चे मेहनत से परीक्षा देते हैं, लेकिन जब पेपर लीक होता है तो उनका सिस्टम से भरोसा उठ जाता है। युवा कांग्रेस के अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि इस नाकामी की जिम्मेदार भाजपा सरकार है। उनका कहना था, भाजपा दावा करती है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दो देशों के बीच का युद्ध रुकवा देते हैं, लेकिन सच यह है कि वह पेपर लीक नहीं रोक पा रहे हैं। 
 

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उन्होंने सवाल किया कि एनटीए का ऑडिट कौन करता है और निजी वेंडर को किस आधार पर काम दिया जाता है? चिब ने कहा, हमारी मांग है कि शिक्षा मंत्री तत्काल इस्तीफा दें, सरकार बच्चों को मुआवजा दे और नीट पेपर लीक पर जेपीसी का गठन हो। विनोद जाखड़ ने दावा किया कि इस पेपर लीक का केंद्र राजस्थान रहा और यह भी सामने आ गया है कि इसे राजनीतिक संरक्षण मिला हुआ था, जिसने लाखों बच्चों का भविष्य तबाह कर दिया। 

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