महाराष्ट्र: ऑटो-टैक्सी चालकों को मराठी सीखने के लिए दी गई मोहलत, तो राज ठाकरे ने उगला ‘जहर’

महाराष्ट्र: ऑटो-टैक्सी चालकों को मराठी सीखने के लिए दी गई मोहलत, तो राज ठाकरे ने उगला ‘जहर’

महाराष्ट्र में ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य करने के फैसले को लेकर भाजपा नीत महायुति सरकार ने फिलहाल नरमी के संकेत दिए हैं। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने साफ किया है कि 1 मई से लागू होने वाले इस नियम में अब राहत दी जाएगी और चालकों को 15 अगस्त तक मराठी सीखने का समय मिलेगा।

15 अगस्त तक नहीं होगी मराठी को लेकर कार्रवाई

राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के मुताबिक, 1 मई से 15 अगस्त के बीच किसी भी चालक पर मराठी न आने के आधार पर कार्रवाई नहीं की जाएगी। इस दौरान उन्हें व्यावहारिक मराठी सीखने का अवसर दिया जाएगा। हालांकि, मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि बाकी नियमों के तहत लाइसेंस और वैध संचालन की जांच जारी रहेगी। जो चालक कानून का उल्लंघन करते पाए जाएंगे, उन पर नियमानुसार कार्रवाई होगी।

महाराष्ट्र सरकार के मराठी अनिवार्यता के फैसले को लेकर कई यूनियनों और संगठनों ने कड़ा विरोध जताया था और आंदोलन की चेतावनी दी थी। उनका कहना था कि बिना प्रशिक्षण और समय दिए अचानक मराठी अनिवार्य करने से लाखों ऑटो रिक्शा व टैक्सी चालकों की रोजी-रोटी पर असर पड़ेगा। उन्होंने सरकार से मराठी सीखने के लिए समय देने की मांग की थी, जिसे अब स्वीकार कर लिया गया है।

मराठी अनिवार्यता पर राज ठाकरे का तीखा बयान

इस मुद्दे पर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने पहली बार खुलकर प्रतिक्रिया दी है। पुणे में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने मराठी भाषा को लेकर राज्य सरकार के रुख पर कटाक्ष किया।

राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए राज ठाकरे ने कहा, जहां जमीन कमजोर होती है, वहीं समस्याएं पैदा होती हैं। मजबूत समाज पर कोई दबाव नहीं बना सकता। उन्होंने मराठी लोगों से एकजुट होकर सख्त रुख अपनाने की अपील की।

उत्तर भारतीयों को मराठी सिखाने पर ये कहा

राज ठाकरे ने हिंदी भाषी (उत्तर भारतीय) चालकों को मराठी सिखाने के विचार पर भी अपनी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि उनके राज्यों में सुधार न होने के कारण वहां के लोग यहां आते हैं, लेकिन उनके नेताओं से कोई सवाल नहीं पूछता। ठाकरे ने तंज कसते हुए कहा कि अगर आज उन्हें मराठी सिखाई जा रही है, तो कल वे मराठी पुरस्कार लेते हुए भी दिखाई देंगे। जहां मिट्टी नरम होती है, वहां चूहे बिल बना लेते हैं, लेकिन चट्टान में ऐसा संभव नहीं है। इसलिए हमें (मराठी लोगों को) चट्टान की तरह मजबूत होने की जरूरत है।

‘हर बार महाराष्ट्र ही क्यों?’

राज ठाकरे ने सवाल उठाया कि देश में हर बार विवाद और दबाव की स्थिति महाराष्ट्र में ही क्यों बनती है। उन्होंने कहा कि बाहरी राज्यों से आने वाले लोगों को मराठी सिखाने की बात हो रही है, लेकिन उनके अपने राज्यों की स्थिति पर कोई चर्चा नहीं होती।

उन्होंने राज्य सरकार की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर किस दबाव में निर्णय लिए जा रहे हैं और क्यों बार-बार बैकफुट पर खेला जा रहा है।

राजनीतिक माहौल गरमाने के संकेत

मराठी अनिवार्यता के मुद्दे पर सरकार की नरमी और राज ठाकरे के बयान से राज्य का राजनीतिक माहौल एक बार फिर गरमाता नजर आ रहा है। आने वाले समय में यह मुद्दा और तेज होने की संभावना है, खासकर तब जब 15 अगस्त के बाद नियमों को सख्ती से लागू किया जाएगा।

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