MP News: मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले से चौंका देने वाला मामला सामने आया है। जिले के करैरा क्षेत्र के ग्राम हाजीनगर में शनिवार को एक बुजुर्ग ने अपनी मौत से पहले ही मृत्यु भोज का आयोजन कर दिया। इस कार्यक्रम में हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए। बुजुर्ग को यह चिंता थी कि उसकी मौत के बाद उसके परिवार के लोग यह आयोजन करेंगे या नही। इसी के चलते बुजुर्ग ने यह बड़ा फैसला लिया।
दरअसल, हाजीनगर में रहने वाले 60 वर्षीयकल्याण पाल के मन में वर्षों से एक ही चिंता थी कि उसके मरने के बाद अंतिम संस्कार से लेकर मृत्यु भोज से लेकर अन्य कार्यक्रम होगा या नही। इसी सवाल ने उन्हें ऐसा कदम उठाने पर मजबूर कर दिया। इधर इस पूरे कार्यक्रम को लेकर पूरे क्षेत्र में चर्चा बनी हुई है।
प्रयागराज जाकर खुद कराया कर्मकांड
आयोजन से दो दिन पहले कल्याण पाल खुद प्रयागराज पहुंचे। वहां उन्होंने अपने नाम से विधि.विधान के साथ कर्मकांड कराया। इतना ही नहीं, अस्थि विसर्जन की परंपरा की तरह गंगा स्नान भी किया और फिर वापस आकर अपने गांव में 15 मई से 24 घंटे के लिए सीताराम रामधुन पाठ शुरू कराया। पूरे गांव में धार्मिक माहौल बना रहा और लोग इस अनोखे आयोजन को लेकर चर्चा करते रहे।
शनिवार 16 मई को धार्मिक कार्यक्रमों के बाद दोपहर करीब 4 बजे से बड़े स्तर पर भंडारा शुरू हुआ। यह आयोजन पूरी तरह मृत्यु भोज की तरह किया गया था, लेकिन फर्क सिर्फ इतना था कि जिसका मृत्यु भोज हो रहा था, वह खुद लोगों का स्वागत करता नजर आ रहा था। बताया जा रहा है कि गांव और आसपास के क्षेत्रों से हजारों लोग आयोजन में पहुंचे। ग्रामीणों के मुताबिक करीब ५ हजार लोग इस भोज में शामिल हुए। आयोजन में खाने.पीने और बैठने की विशेष व्यवस्था की गई थी।

आमंत्रण कार्ड हुआ वायरल, लिखा- हमें तो अपनों ने लूटा…
पहले सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था मृत्यु भोज का आमंत्रण कार्ड। कुछ दिन पहले इस आयोजन का निमंत्रण कार्ड सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ था। कार्ड में लिखा था कि अपना अपने सामने अंतिम गंगा पूजन, भंडारा इस तारीख को है। साथ ही कार्ड पर एक शायरी भी लिखी थी, जिसमें यह लिखा था कि मुझे तो अपनों ने लूटा, गैरों में कहां दम था, मेरी कश्ती वहां डूबी जहां पानी कम था। कार्ड वायरल होने के बाद से ही लोग यह जानने को उत्सुक थे कि आखिर ऐसा आयोजन क्यों किया जा रहा है। कल्याण पाल ने बताया कि वह अपने पिता के इकलौते बेटे है और उनकी शादी भी नही हुई। ऐसे में उनकी मौत के बाद यह सब काम कौन करेंगा, इसको लेकर वह काफी पशोपेश में थे। इसलिए यह पूरा आयोजन मौत से पहले हुआ। कल्याण का कहना है कि अब इस आयोजन के बाद वह सुकून से मर सकेंगे।



