Israel-Iran War Update: मिडिल ईस्ट में अब हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। युद्ध रुकने के कोई संकेत नजर नहीं आ रहे। 28 फरवरी से शुरू हुआ संघर्ष अब एक बड़े क्षेत्रीय संकट में बदल चुका है। अमेरिका और ईरान के बीच टकराव, होर्मुज स्ट्रेट पर डबल नाकाबंदी और फेल होती शांति वार्ताओं ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
इसी बीच चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) ने शांति के लिए चार सूत्रीय प्रस्ताव पेश कर कूटनीतिक पहल की है। लेकिन हालात तब और सख्त हो गए जब इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद के प्रमुख डेविड बार्निया (David Barnea) ने साफ कहा कि ईरान में मौजूदा शासन बदले बिना उनका मिशन पूरा नहीं होगा। इस बयान ने संकेत दे दिया है कि आने वाले समय में तनाव और बढ़ सकता है।
ईरान को लेकर मोसाद चीफ का बड़ा बयान
इजरायली मीडिया के अनुसार, मोसाद प्रमुख डेविड बार्निया (David Barnea) ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि जब तक ईरान में मौजूदा सख्त शासन नहीं बदलेगा, तब तक उनका (इजरायल) मिशन पूरा नहीं माना जाएगा। उन्होंने यह भी साफ किया कि तेहरान पर हमलों के बाद तुरंत कार्रवाई खत्म करने की कोई योजना नहीं थी। पहले से ही तय था कि युद्ध खत्म होने के बाद भी ऑपरेशन जारी रहेगा।
युद्ध समाप्ति के लिए चीन ने दिए चार सूत्रीय सुझाव
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव को देखते हुए चीन ने शांति की पहल करते हुए एक बड़ा कूटनीतिक दांव चला है। दरअसल, चीन के प्रेसिडेंट शी जिनपिंग (Xi Jinping) ने चार सूत्रीय प्लान पेश किया, जिसे स्थायी शांति की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
पहले सूत्र में उन्होंने खाड़ी देशों से आपसी रिश्ते मजबूत करने और साथ मिलकर सुरक्षा ढांचा बनाने की बात कही। दूसरे में साफ संदेश दिया कि किसी भी देश की जमीन और संप्रभुता पर नजर न डालें। तीसरे बिंदु में संयुक्त राष्ट्र के नियमों को सबसे ऊपर रखते हुए अंतरराष्ट्रीय कानून (UN) का पालन जरूरी बताया।
आखिरी यानी चौथे सूत्र में जिनपिंग ने विकास और सुरक्षा को एक-दूसरे का साथी बताया… साथ ही आर्थिक साझेदारी का संकेत भी दिया।
अमेरिकी नाकाबंदी पर आगबबूला हुआ चीन
चीन ने ईरान के बंदरगाहों पर अमेरिका नाकेबंदी को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने इसे सीधे तौर पर खतरनाक और गैर-जिम्मेदार कदम बताया है। उनका कहना है कि इससे मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ सकता है। चीन ने चेतावनी दी है कि इस नाकेबंदी का असर होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर पड़ेगा, जिससे उनकी सुरक्षा को बड़ा खतरा हो सकता है।


