अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते लंबे समय से वेनेजुएला में सीमित गतिविधियों के बाद अब ओएनजीसी के लिए वहां कामकाज का रास्ता काफी आसान हो गया है। सरकारी तेल कंपनी ओएनजीसी की विदेशी इकाई ओएनजीसी विदेश लिमिटेड को अमेरिकी वित्त मंत्रालय के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय से वेनेजुएला में संचालन की मंजूरी मिल गई है। इससे कंपनी अपनी मौजूदा तेल परियोजनाओं में काम तेज करने और उत्पादन बढ़ाने की तैयारी कर रही है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, इस मंजूरी से ओएनजीसी विदेश को वेनेजुएला में पहले की तुलना में ज्यादा स्वतंत्रता मिलेगी। कंपनी उत्पादन बढ़ाने के साथ नए समझौते कर सकती है और कुछ बड़ी परियोजनाओं का सीधे संचालन अपने हाथ में लेने की संभावना भी तलाश सकती है। इन परियोजनाओं में फिलहाल वेनेजुएला की सरकारी तेल कंपनी पीडीवीएसए की अहम भूमिका है।
ओएनजीसी के वित्त निदेशक अनूपम अग्रवाल ने बताया कि प्रतिबंधों के कारण कंपनी पहले अपने काम को सीमित रख रही थी, लेकिन अब स्थिति बदल गई है। उनके मुताबिक, कंपनी को वेनेजुएला की परियोजनाओं पर काम करने की ज्यादा स्वतंत्रता मिल गई है और प्रतिबंधों से जुड़े जोखिम अब पहले जैसी बाधा नहीं हैं। ओएनजीसी वेनेजुएला सरकार और पीडीवीएसए के साथ नए समझौतों को लेकर भी बातचीत कर रही है।
इस मंजूरी का एक बड़ा फायदा कंपनी को लंबे समय से अटके लाभांश के रूप में भी मिल सकता है। ओएनजीसी को करीब 50 से 60 करोड़ डॉलर की राशि मिलने की उम्मीद है, जो प्रतिबंधों से जुड़ी पाबंदियों के कारण अभी तक कंपनी तक नहीं पहुंच पाई है। परियोजनाओं के वित्तीय संचालन में ज्यादा स्वतंत्रता मिलने से इस रकम की वसूली का रास्ता भी साफ हो सकता है।
गौरतलब है कि ओएनजीसी विदेश की सैन क्रिस्टोबाल तेल परियोजना में 40 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इसके अलावा काराबोबो-1 परियोजना में कंपनी की 11 प्रतिशत हिस्सेदारी है। सैन क्रिस्टोबाल में उत्पादन फिलहाल उसकी क्षमता से काफी कम है। वित्त वर्ष 2025-26 में यहां करीब 2.65 लाख टन तेल के बराबर उत्पादन हुआ था।
ओएनजीसी अब सैन क्रिस्टोबाल में निवेश और ऑपरेशन की गतिविधियां बढ़ाकर उत्पादन को मौजूदा करीब 12 से 15 हजार बैरल प्रतिदिन से बढ़ाकर एक साल में 30 हजार बैरल प्रतिदिन तक ले जाना चाहती है। अनूपम अग्रवाल के अनुसार, वेनेजुएला के जमीन से जुड़े उथले तेल क्षेत्र भूगर्भीय रूप से पश्चिमी भारत के मेहसाणा और अहमदाबाद के आसपास मौजूद कुछ क्षेत्रों से मिलते-जुलते हैं। इससे ओएनजीसी के मौजूदा तकनीकी अनुभव का वहां इस्तेमाल करने में मदद मिल सकती है।
बता दें कि भारत लगातार कच्चे तेल की आपूर्ति के लिए अलग-अलग देशों पर निर्भरता बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। पश्चिम एशिया में तनाव और वैश्विक ऊर्जा बाजार में लगातार बदलती परिस्थितियों के बीच वेनेजुएला जैसे बड़े तेल उत्पादक देश में ओएनजीसी की सक्रियता भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आने वाले समय में उत्पादन बढ़ने पर भारत को कच्चे तेल की आपूर्ति का एक अतिरिक्त स्रोत भी मिल सकता है।


