US-Iran Conflict: अमेरिका और ईरान के बीच समुद्री तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना द्वारा ईरान के बंदरगाहों की नौसैनिक नाकाबंदी करने के दावे के बाद, ईरान ने बेहद कड़ी प्रतिक्रिया दी है। ईरान के सर्वोच्च नेता के सैन्य सलाहकार मोहसेन रेजाई ने अमेरिका को सीधी चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर उनके देश को कोई खतरा हुआ, तो वे अमेरिकी युद्धपोतों को डुबो देंगे। रेजाई ने ईरानी सरकारी मीडिया प्रेस टीवी को दिए एक इंटरव्यू में अमेरिका को चेताते हुए कहा, “हमें दबाव बढ़ाना होगा। हमारे मिसाइल लॉन्चरों का निशाना अब अमेरिकी युद्धपोतों पर पूरी तरह से केंद्रित है। अगर जरूरत पड़ी, तो हम उन सभी को समुद्र में डुबो देंगे।” उन्होंने अमेरिकी नाकाबंदी के प्रयासों को विफल बताते हुए कहा कि जिस तरह अमेरिका पहले होर्मुज जलडमरूमध्य में नाकाम हुआ था, वैसे ही इस बार भी उसकी हार निश्चित है। ईरान का दावा है कि उसके पास पलटवार करने के लिए अभी भी कई ‘अचूक और अप्रयुक्त हथियार’ मौजूद हैं।
अमेरिका का दावा: 36 घंटे में रोका समुद्री व्यापार
ईरान की यह चेतावनी अमेरिका के उस बड़े दावे के बाद आई है, जिसमें यूएस सेंट्रल कमान ने कहा था कि उसने ईरान के सभी प्रमुख बंदरगाहों और जलमार्गों पर सफलतापूर्वक नियंत्रण कर लिया है। अमेरिकी कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर के मुताबिक, ऑपरेशन शुरू होने के महज 36 घंटों के भीतर ही अमेरिकी सेना ने ईरान से आने-जाने वाले सभी समुद्री व्यापारिक रास्तों को पूरी तरह से बंद कर दिया है।
खुफिया हमले और यूरेनियम लूटने का आरोप
रेजाई ने अमेरिका और इजरायल पर एक गंभीर आरोप भी लगाया। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ने पहले इजरायल के साथ मिलकर ईरान पर बड़े सैन्य हमले की साजिश रची थी। इस योजना के तहत अमेरिकी सैनिकों को ईरान के इस्फहान शहर में उतारकर वहां से यूरेनियम जब्त करने की कोशिश की जानी थी। हालांकि, इन दावों की अभी तक किसी स्वतंत्र संस्था ने पुष्टि नहीं की है।
युद्धविराम और बातचीत पर ईरान की शर्तें
मौजूदा अस्थायी युद्धविराम पर रेजाई ने स्पष्ट किया कि ईरान ने केवल ‘नैतिक और मानवीय’ आधार पर इसे स्वीकार किया था। उन्होंने कहा कि जब तक ईरान के सभी अधिकार नहीं दिए जाते और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कोई ठोस प्रस्ताव पेश नहीं किया जाता, तब तक युद्धविराम को आगे बढ़ाना ईरान के हित में नहीं है।
ईरान को अब बहुत ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत
उन्होंने भविष्य में अमेरिका के साथ किसी भी तरह की बातचीत की संभावनाओं पर जोर देकर कहा कि ईरान को अब बहुत ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा, “हमें अमेरिका के साथ बातचीत करने के दौरान हर एक शब्द को लेकर अत्यधिक संवेदनशील और सावधान रहना होगा।” (इनपुट: ANI)


