UPI Payment Charges और UPI New Rules सामने आते ही जनता खुश, Modi Hai To Sab Mumkin Hai

UPI Payment Charges और UPI New Rules सामने आते ही जनता खुश, Modi Hai To Sab Mumkin Hai

देश में डिजिटल भुगतान की सबसे लोकप्रिय व्यवस्था यूपीआई को लेकर बड़ा बदलाव होने जा रहा है। इस बदलाव को लेकर विपक्ष मोदी सरकार पर निशाना साध रहा है लेकिन सरकार का कहना है कि आम आदमी का हित जरा भी प्रभावित नहीं होगा। लेकिन फिर भी मीडिया से लेकर सोशल मीडिया तक में इस मुद्दे पर भ्रमित करने वाले समाचार और टिप्पणियां दिख रही हैं। जहां तक संभावित बदलाव की बात है तो आपको बता दें कि भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम ने व्यापारी लेन-देन पर लागू व्यापारी छूट दर के ढांचे में संशोधन किया है, जो 15 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होगा। नए प्रावधान के तहत दो हजार रुपये से अधिक के कुछ व्यापारी भुगतान पर शून्य दशमलव चार प्रतिशत की दर से शुल्क लिया जाएगा। हालांकि, यह शुल्क व्यापारी से लिया जाएगा और किसी भी स्थिति में ग्राहक से वसूल नहीं किया जा सकेगा।

नए नियम के अनुसार प्रति लेन-देन अधिकतम तीन सौ रुपये शुल्क तय किया गया है। यानी पांच हजार रुपये के भुगतान पर बीस रुपये और पचास हजार रुपये के भुगतान पर दो सौ रुपये शुल्क बनेगा। पचहत्तर हजार रुपये के भुगतान पर शुल्क तीन सौ रुपये तक पहुंचेगा और इसके बाद भी अधिकतम सीमा तीन सौ रुपये ही रहेगी।

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सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आम लोगों के बीच होने वाले व्यक्ति से व्यक्ति भुगतान इस शुल्क के दायरे से बाहर रहेंगे। रोजमर्रा के अधिकांश छोटे व्यापारी भुगतान भी पहले की तरह निःशुल्क बने रहेंगे। सरकार ने साफ किया है कि यूपीआई प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराने वाली कंपनियां भी इन लेन-देन पर कोई अतिरिक्त मंच शुल्क या छिपा हुआ शुल्क नहीं लगा सकतीं। बैंकों को भी यह सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है कि व्यापारी इस शुल्क का बोझ ग्राहकों पर न डालें।

इस बदलाव में छोटे कारोबारियों को विशेष राहत दी गई है। यूपीआई क्यूआर माध्यम से प्रतिमाह एक लाख रुपये तक भुगतान प्राप्त करने वाले छोटे व्यापारी नए शुल्क से पूरी तरह मुक्त रहेंगे। अधिकारियों के अनुसार, इससे लगभग 96 प्रतिशत व्यापारी लेन-देन सुरक्षित रहेंगे। ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में व्यापारियों को किए जाने वाले यूपीआई क्यूआर भुगतान भी निःशुल्क रहेंगे। शुल्क से प्राप्त राशि का पांच प्रतिशत एक विशेष कोष में जाएगा, जिसका इस्तेमाल छोटे व्यापारियों के बीच यूपीआई की पहुंच बढ़ाने के लिए किया जाएगा।

साथ ही कुछ आवश्यक सेवाओं के लिए अलग व्यवस्था रखी गई है। रेलवे, दूरसंचार, ईंधन और बीमा जैसे क्षेत्रों में दो हजार रुपये से अधिक के भुगतान पर पांच रुपये का स्थिर शुल्क होगा। वहीं, म्यूचुअल फंड और शेयर कारोबार जैसे पूंजी बाजार संबंधी लेन-देन पर केवल शून्य दशमलव शून्य दो प्रतिशत शुल्क लगेगा, जिसकी अधिकतम सीमा तीन सौ रुपये होगी।

यूपीआई के विशाल आकार को देखते हुए यह बदलाव खासा महत्वपूर्ण है। वित्त वर्ष 2025-26 में यूपीआई के जरिये 24,161.69 करोड़ लेन-देन हुए, जिनका कुल मूल्य लगभग 314 लाख करोड़ रुपये रहा। वित्त वर्ष 2016-17 में यह संख्या केवल 1.78 करोड़ लेन-देन और मूल्य सात हजार करोड़ रुपये के आसपास था। इसी अवधि में यूपीआई से जुड़े बैंकों की संख्या 44 से बढ़कर 703 हो गई।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक व्यापारी से भुगतान वाले लेन-देन कुल संख्या का 63 प्रतिशत हैं। इनमें लगभग 86 प्रतिशत भुगतान पांच सौ रुपये से कम के हैं। दूसरी ओर, व्यक्ति से व्यक्ति भुगतान संख्या में 37 प्रतिशत हैं, लेकिन कुल राशि में उनकी हिस्सेदारी 71 प्रतिशत है। इनमें भी लगभग 59 प्रतिशत भुगतान पांच सौ रुपये से कम के हैं।

दिलचस्प पहलू यह है कि वित्त वर्ष 2025-26 में केवल लगभग चार प्रतिशत व्यापारी लेन-देन दो हजार रुपये की सीमा से ऊपर थे, लेकिन यूपीआई के कुल भुगतान मूल्य में उनकी हिस्सेदारी करीब दो-तिहाई थी। यानी नया शुल्क व्यापक डिजिटल भुगतान पर नहीं, बल्कि अपेक्षाकृत बड़े व्यापारी लेन-देन पर केंद्रित है।

हम आपको यह भी बता दें कि भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम के अनुसार, इस व्यवस्था से मिलने वाली आय का इस्तेमाल ढांचागत मजबूती, साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी रोकने, नवाचार और ग्राहक सेवा में निवेश के लिए किया जाएगा। वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि इससे बैंकों और भुगतान कंपनियों के लिए आय का नया स्रोत बन सकता है। हालांकि, इसका वास्तविक आर्थिक प्रभाव लेन-देन की मात्रा, परिचालन दक्षता और अतिरिक्त वित्तीय सेवाओं से आय बढ़ाने की क्षमता पर निर्भर करेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, छोटे व्यापारियों पर असर सीमित रहने की संभावना है, जबकि बड़े मूल्य वाले व्यापारी भुगतान से डिजिटल भुगतान क्षेत्र की आर्थिक तस्वीर में महत्वपूर्ण बदलाव आ सकता है।

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