बरनाला में अपनी मांगों को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रहे बेरोजगार नेता सुखविंदर सिंह ढिल्लवां को प्रशासन ने आखिरकार बिना शर्त रिहा कर दिया है। जेल से बाहर आने पर क्रांतिकारी संगठनों, किसानों और ग्रामीणों ने उनका भव्य स्वागत किया। रिहाई के बाद ढिल्लवां को एक विशाल काफिले के रूप में उनके पैतृक गांव तक ले जाया गया, जिसे संगठनों ने ‘विजय मार्च’ का नाम दिया। मुख्यमंत्री के आगमन से पहले हुई थी गिरफ्तारी गौरतलब है कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के बरनाला आगमन से पहले थाना धनौला पुलिस ने सुखविंदर सिंह को बडबर टोल प्लाजा से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। ढिल्लवां पिछले चार वर्षों से शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग में खाली पदों को भरने की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं और संगरूर डीसी कार्यालय के बाहर पिछले साढ़े चार महीनों से उनका पक्का मोर्चा जारी है। उनकी गिरफ्तारी को सरकार द्वारा लोकतांत्रिक आवाज को दबाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा था। प्रशासन को झुकना पड़ा, बिना शर्त हुई रिहाई सुखविंदर ढिल्लवां की गिरफ्तारी के बाद विभिन्न क्रांतिकारी संगठनों में भारी रोष फैल गया था। संगठनों ने चेतावनी दी थी कि यदि उन्हें रिहा नहीं किया गया, तो 9 मई को बरनाला जेल के सामने एक बड़ा विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। प्रशासन ने शुरुआत में जमानत पर रिहाई का प्रस्ताव रखा, लेकिन संघर्षशील संगठनों की ‘बिना शर्त रिहाई’ की मांग के आगे सरकार को झुकना पड़ा और उन्हें शनिवार को रिहा कर दिया गया। “सवाल पूछने से डर गई सरकार” रिहाई के बाद सुखविंदर ढिल्लवां ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि बेरोजगार सांझा मोर्चा का इरादा मुख्यमंत्री को काले झंडे दिखाना या नारेबाजी करना नहीं था, बल्कि वे केवल अपनी मांगों पर सवाल पूछना चाहते थे। उन्होंने कहा कि सरकार ने उन्हें गिरफ्तार करके अपनी कमजोरी और डर का सबूत दिया है। गांव ढिल्लवां के गुरुद्वारा साहिब के पास हुए जनसमूह में वक्ताओं ने कहा कि पंजाब की धरती पर हक मांगने वालों को जेल भेजना निंदनीय है और उनका संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक मांगें पूरी नहीं हो जातीं।


