बलरामपुर में मध्यान्ह भोजन योजना (एमडीएम) के तहत सरकारी धन के गबन मामले में पुलिस ने रविवार को एक और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में अब तक कुल 14 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। आरोप है कि सरकारी अभिलेखों और एक्सेल शीट में हेरफेर कर 11 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि का गबन किया गया। पुलिस अधीक्षक विकास कुमार के निर्देश पर चलाए जा रहे अभियान के तहत कोतवाली नगर पुलिस ने आरोपी जैनुल आबदीन को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पुलिस जांच में सामने आया है कि मध्यान्ह भोजन योजना के जिला समन्वयक और उनके सहयोगियों ने सरकारी पोर्टल तथा एक्सेल शीट का इस्तेमाल कर घोटाले को अंजाम दिया। जांच के मुताबिक, पहले विद्यालयों में छात्रों की संख्या के आधार पर कन्वर्जन कॉस्ट की गणना कर मूल एक्सेल शीट तैयार की जाती थी। इसे बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय से अनुमोदित कर जिलाधिकारी की स्वीकृति के लिए भेजा जाता था। चिन्हित विद्यालयों के खातों में दर्शाते थे अधिक धनराशि आरोप है कि जिलाधिकारी से स्वीकृति मिलने के बाद मूल एक्सेल शीट की जगह संशोधित एक्सेल शीट पीएफएमएस पोर्टल पर अपलोड कर दी जाती थी। इस बदली गई शीट में कुछ चिन्हित विद्यालयों के खातों में अधिक धनराशि दर्शाई जाती थी, जबकि अन्य विद्यालयों की राशि कम कर दी जाती थी, ताकि कुल राशि में कोई अंतर दिखाई न दे। जांच में यह भी सामने आया कि जिन विद्यालयों के खातों में अतिरिक्त रकम भेजी जाती थी, वहां के प्रधानाध्यापक, ग्राम प्रधान और अभिभावक समिति के अध्यक्ष मिलकर धनराशि निकालकर आपस में बांट लेते थे। कन्वर्जन कॉस्ट के आधार पर तैयार करते थे एक्सेल शीट गिरफ्तार आरोपी जैनुल आबदीन ने पूछताछ में कथित रूप से स्वीकार किया कि वह जिला समन्वयक फिरोज अहमद खान के साथ मिलकर इस फर्जीवाड़े में शामिल था। उसने बताया कि छात्र संख्या और कन्वर्जन कॉस्ट के आधार पर तैयार एक्सेल शीट में बाद में हेरफेर कर सरकारी धन का गबन किया जाता था। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी की जांच के बाद 26 नवंबर को कोतवाली नगर थाने में 45 आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस के अनुसार, मामले की विवेचना अभी जारी है और जल्द ही अन्य आरोपियों पर भी कार्रवाई की जाएगी। गिरफ्तारी अभियान में प्रभारी निरीक्षक मनोज कुमार सिंह, उपनिरीक्षक उमेश सिंह और कांस्टेबल मोहित पटेल शामिल रहे।


