भागलपुर जिले में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में रिक्त सीटों को भरने के लिए शिक्षा विभाग ने अब सख्त रुख अपना लिया है। राज्य परियोजना निदेशक के निर्देश पर जिले में ‘अंतिम प्रहार’ अभियान शुरू किया गया है, जिसके तहत 30 अप्रैल 2026 तक शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करने का लक्ष्य तय किया गया है। जिला शिक्षा पदाधिकारी को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए हैं कि सभी प्रखंडों में विशेष रणनीति बनाकर नामांकन बढ़ाया जाए। जिले में संचालित कस्तूरबा विद्यालयों में खासकर कक्षा 9 से 12 तक नामांकन अपेक्षाकृत कम है। इसे देखते हुए शिक्षा विभाग ने ब्लॉक-टू-ब्लॉक रणनीति अपनाने का निर्णय लिया है। जिन प्रखंडों में 12वीं तक की पढ़ाई की सुविधा उपलब्ध नहीं है, वहां की छात्राओं को दूसरे प्रखंडों के कस्तूरबा विद्यालयों के छात्रावासों में प्राथमिकता के आधार पर नामांकित किया जाएगा। इससे छात्राओं की पढ़ाई बीच में बाधित न हो और वे उच्च कक्षाओं तक शिक्षा प्राप्त कर सकें। घर-घर दस्तक देगी टीम इस अभियान को ‘प्रवेश उत्सव’ के रूप में मनाने की योजना बनाई गई है, ताकि अधिक से अधिक छात्राओं और अभिभावकों को इससे जोड़ा जा सके। इसके तहत पंचायत स्तर तक जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। आंगनबाड़ी सेविकाओं, जीविका समूहों, शिक्षकों और जनप्रतिनिधियों की मदद से घर-घर संपर्क कर छात्राओं को विद्यालय में नामांकन के लिए प्रेरित किया जाएगा। शिक्षा विभाग का मानना है कि कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों की बालिकाओं के लिए शिक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। यहां निशुल्क शिक्षा के साथ-साथ आवास, भोजन और अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाती है। इसके बावजूद कई विद्यालयों में सीटें खाली रहना चिंता का विषय है, जिसे अब अभियान चलाकर दूर करने की कोशिश की जा रही है। डीईओ ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे नियमित रूप से प्रगति की समीक्षा करें और जहां भी कमी पाई जाए, वहां तुरंत सुधारात्मक कदम उठाएं। उन्होंने कहा कि 30 अप्रैल तक हर हाल में सभी सीटों को भरना है और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। भागलपुर जिले में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में रिक्त सीटों को भरने के लिए शिक्षा विभाग ने अब सख्त रुख अपना लिया है। राज्य परियोजना निदेशक के निर्देश पर जिले में ‘अंतिम प्रहार’ अभियान शुरू किया गया है, जिसके तहत 30 अप्रैल 2026 तक शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करने का लक्ष्य तय किया गया है। जिला शिक्षा पदाधिकारी को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए हैं कि सभी प्रखंडों में विशेष रणनीति बनाकर नामांकन बढ़ाया जाए। जिले में संचालित कस्तूरबा विद्यालयों में खासकर कक्षा 9 से 12 तक नामांकन अपेक्षाकृत कम है। इसे देखते हुए शिक्षा विभाग ने ब्लॉक-टू-ब्लॉक रणनीति अपनाने का निर्णय लिया है। जिन प्रखंडों में 12वीं तक की पढ़ाई की सुविधा उपलब्ध नहीं है, वहां की छात्राओं को दूसरे प्रखंडों के कस्तूरबा विद्यालयों के छात्रावासों में प्राथमिकता के आधार पर नामांकित किया जाएगा। इससे छात्राओं की पढ़ाई बीच में बाधित न हो और वे उच्च कक्षाओं तक शिक्षा प्राप्त कर सकें। घर-घर दस्तक देगी टीम इस अभियान को ‘प्रवेश उत्सव’ के रूप में मनाने की योजना बनाई गई है, ताकि अधिक से अधिक छात्राओं और अभिभावकों को इससे जोड़ा जा सके। इसके तहत पंचायत स्तर तक जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। आंगनबाड़ी सेविकाओं, जीविका समूहों, शिक्षकों और जनप्रतिनिधियों की मदद से घर-घर संपर्क कर छात्राओं को विद्यालय में नामांकन के लिए प्रेरित किया जाएगा। शिक्षा विभाग का मानना है कि कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों की बालिकाओं के लिए शिक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। यहां निशुल्क शिक्षा के साथ-साथ आवास, भोजन और अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाती है। इसके बावजूद कई विद्यालयों में सीटें खाली रहना चिंता का विषय है, जिसे अब अभियान चलाकर दूर करने की कोशिश की जा रही है। डीईओ ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे नियमित रूप से प्रगति की समीक्षा करें और जहां भी कमी पाई जाए, वहां तुरंत सुधारात्मक कदम उठाएं। उन्होंने कहा कि 30 अप्रैल तक हर हाल में सभी सीटों को भरना है और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।


