सैनिक नहीं, रोबोट्स के दम पर रूसी पोस्ट कब्ज़ा रहा यूक्रेन

सैनिक नहीं, रोबोट्स के दम पर रूसी पोस्ट कब्ज़ा रहा यूक्रेन

रूस (Russia) और यूक्रेन (Ukraine) के बीच 4 साल से भी ज़्यादा समय से युद्ध चल रहा है। 24 फरवरी, 2022 को रूस ने यूक्रेन पर हमला कर दिया था और तभी से यह युद्ध जारी है। युद्ध की शुरुआत में लगा था कि रूसी सेना कुछ दिन में ही जीत हासिल कर लेगी, लेकिन लगातार मिले इंटरनेशनल सपोर्ट की वजह से यूक्रेनी सेना अभी भी रूसी सेना के सामने डटी हुई है। यूक्रेन में इस युद्ध की वजह से जान-माल का भारी नुकसान हुआ है। कई शहर तबाह हो गए हैं। रूसी सेना ने भी युद्ध में कई सैनिक गंवा दिए हैं। हालांकि अब यह युद्ध सिर्फ सिर्फ सैनिकों के बीच लड़ाई नहीं रही, बल्कि एक हाई-टेक जंग बन गई है।

रोबोट्स निभा रहे अहम भूमिका

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेन्स्की ने बताया कि यूक्रेनी सैनिकों के साथ-साथ रोबॉट्सऔर अपने आप चलने वाली मशीनें युद्ध में बड़ी भूमिका निभा रही हैं। यूक्रेन में निर्मित इन रोबोट्स से सैनिकों की जान बचाने में सहयोग मिल रहा है और यूक्रेन का कम से कम नुकसान हो रहा है। यूक्रेन पहले से ही सैनिकों की कमी से जूझ रहा है। इन रोबो-मशीनों का इस्तेमाल आपूर्ति पहुंचाने, घायलों को निकालने, बारूदी सुरंगें हटाने और रक्षात्मक मोर्चों को मजबूत करने के लिए भी किया जा रहा है।

रोबोट्स के सहारे रूसी पोस्ट पर कब्जा

ज़ेलेन्स्की ने बताया की यूक्रेन ने पहली बार बिना किसी यूक्रेनी सैनिक के सिर्फ रोबोट्स के सहारे ही रूसी पोस्ट पर कब्ज़ा कर लिया है। इस सैन्य ऑपरेशन में यूक्रेन को किसी भी प्रकार का नुकसान भी नहीं हुआ था। पिछले तीन महीनों में यूक्रेन के ग्राउंड रोबोट्स ने 22,000 से ज़्यादा मिशन पूरे किए हैं। ऐसा करके यूक्रेन ने सैनिकों को होने वाले नुकसान को रोकने की कोशिश की। ऐसी जगह जहाँ सैनिकों के लिए खतरनाक हो सकती है, वहाँ रोबोट्स ने अपनी भूमिका निभाई।

अलग-अलग काम कर रहे हैं रोबोट्स

यूक्रेन के रोबोट्स रैटल, टर्मिट, अर्दाल, रीस, जमी, प्रोटेक्टर और वोलिया युद्ध के मैदान में अलग-अलग काम कर रहे हैं। इसके अलावा यूक्रेन हर साल लाखों ड्रोन भी बना रहा है, जिनमें खास तौर पर एफपीवी (फर्स्ट पर्सन व्यू) ड्रोन शामिल हैं।

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