Uddhav Thackeray: ‘धनुष-बाण’ फ्रीज करो, 4 साल से क्यों लटका है फैसला? उद्धव ठाकरे का शिंदे गुट-चुनाव आयोग पर सीधा हमला

Uddhav Thackeray: ‘धनुष-बाण’ फ्रीज करो, 4 साल से क्यों लटका है फैसला? उद्धव ठाकरे का शिंदे गुट-चुनाव आयोग पर सीधा हमला

Maharashtra Politics: शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उनके गुट पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल की उस दलील का समर्थन किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर पार्टी की पहचान पर अंतिम फैसला आने में और देरी होती है तो अविभाजित पार्टी के चुनाव चिह्न ‘धनुष-बाण’ को फ्रीज कर दिया जाए। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ठाकरे ने कहा कि जिन लोगों ने पार्टी, उसका नाम और चुनाव चिह्न ‘चुराया’ है, उन्हें उसी संपत्ति का इस्तेमाल कर अपनी सत्ता मजबूत करने और गलत तरीके से शासन करने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए।

‘कानूनी लड़ाई को चार साल हो चुके’

उन्होंने कहा कि इस कानूनी लड़ाई को चार साल हो चुके हैं। इस दौरान दो बड़े चुनाव, नगर निगम चुनाव और जिला परिषद चुनाव हो चुके हैं, लेकिन मामला तारीख-दर-तारीख आगे बढ़ रहा है। इसका खामियाजा उनकी पार्टी को भुगतना पड़ रहा है। सत्ता बनाए रखने के लिए चुनाव चिह्न के कथित गलत इस्तेमाल को रोका जाना चाहिए। उद्धव ठाकरे ने कहा कि पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर उनकी पार्टी का ही अधिकार है। उन्होंने कहा कि मौजूदा शासक शासन चलाने में सक्षम नहीं हैं और यह विवाद कभी पैदा ही नहीं होना चाहिए था। उन्होंने कहा कि अपनी पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न बनाए रखने के लिए उन्हें कानूनी लड़ाई लड़ने की नौबत नहीं आनी चाहिए थी।

चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उठाए सवाल

ठाकरे ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग उनकी पार्टी के संविधान की जांच कर रहा है, लेकिन नरोदा में एक ही कार्यालय साझा करने वाली छह कथित फर्जी राजनीतिक पार्टियों की ओर आंखें मूंदे हुए है। उन्होंने दावा किया कि इन पार्टियों के पास 620 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति है। ठाकरे ने सवाल किया कि क्या चुनाव आयोग इन पार्टियों के संविधानों की भी जांच कर रहा है? उन्होंने कहा कि एकनाथ शिंदे और उनके साथी जड़ बुद्धि वाले लोग हैं। मैं उन्हें गौशाला भेजने के लिए नहीं कहूंगा, क्योंकि मवेशी भी मानवता के काम आते हैं। इन जड़ बुद्धि वाले चोरों ने ‘धनुष-बाण’ पर बात करने का नैतिक अधिकार खो दिया है।

तेज आवाज वाले डीजे पर पाबंदी का समर्थन

पार्टी के अंदरूनी विवाद के अलावा ठाकरे ने त्योहारों और दूसरे सार्वजनिक मुद्दों पर भी बात की। त्योहारों के दौरान तेज आवाज में बजने वाले डीजे से होने वाली परेशानी पर उन्होंने पाबंदियों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि हर कोई त्योहार मनाना चाहता है, लेकिन कोई भी असहनीय शोर और प्रदूषण नहीं चाहता। ठाकरे ने गणेशोत्सव और दही हांडी जैसे बड़े त्योहारों में तेज आवाज वाले डीजे पर प्रतिबंध का समर्थन किया। उन्होंने इसके बजाय पारंपरिक भारतीय वाद्ययंत्रों के इस्तेमाल की बात कही। उन्होंने कहा कि लोकमान्य तिलक ने त्योहारों को देश की आजादी की लड़ाई के लिए जन आंदोलन में बदल दिया था। बाद में ये बड़े सार्वजनिक उत्सवों में बदल गए। हालांकि, इन उत्सवों को शोर-शराबे और उपद्रव में नहीं बदलना चाहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *