UAPA मामले में ISIS समर्थक समूह के कथित सदस्य को Delhi High Court से मिली जमानत

UAPA मामले में ISIS समर्थक समूह के कथित सदस्य को Delhi High Court से मिली जमानत

दिल्ली उच्च न्यायालय ने आतंकवाद रोधी कानून के तहत दर्ज एक मामले में आईएसआईएस-समर्थक समूह हरकत-उल-हर्ब-ए-इस्लाम के एक कथित सदस्य को आठ साल तक उसके जेल में रहने का हवाला देते हुए जमानत दे दी। न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति रविंदर डुडेजा की पीठ ने कहा कि मुकदमे के ‘‘जल्द खत्म होने की संभावना नहीं है’’ और उनके समक्ष मौजूद सबूतों के आधार पर मोहम्मद साकिब उर्फ ​​साकिब इफ्तिखार को जमानत देने से इनकार करने का कोई ठोस कारण नहीं बनता। साकिब उत्तर प्रदेश के बक्सर की जामा मस्जिद में इमाम था और हापुड़ का रहने वाला है।

साकिब ने मुकदमे की सुनवाई कर रही अदालत के 2024 के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया गया था। यह मामला 2018 में दर्ज प्राथमिकी से संबंधित है, जिसमें गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए), विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धाराएं लगाई गई थीं। अपीलकर्ता को 26 दिसंबर 2018 को हिरासत में लिया गया था और इसलिए वह लगभग आठ साल से जेल में है।

फिलहाल, अभियोजन पक्ष द्वारा उल्लेख किये गए 120 गवाहों में से केवल 40 गवाहों के बयान दर्ज किए गए हैं। सोमवार को सुनाये गए फैसले में अदालत ने कहा, ‘‘विशेष लोक अभियोजक ने यह बताया है कि प्रतिवादी 39 गवाहों को हटा देगा। भले ही ऐसा हो, लेकिन मुकदमे के जल्द खत्म होने की संभावना नहीं है।’’
अदालत ने आदेश दिया, ‘‘गवाहों के बयानों और अपीलकर्ता पर लगे आरोपों पर गौर करने के बाद, और खासकर अपीलकर्ता के लंबे समय तक जेल में रहने को ध्यान में रखते हुए, हमारा मानना है अपीलकर्ता जमानत पर रिहा होने का मामला बनाने में सफल रहा है।

इसलिए, हम आदेश देते हैं कि अपीलकर्ता को जमानत पर रिहा किया जाए।’’
अदालत ने जमानत के लिए कई शर्तें तय कीं और साकिब से 50,000 रुपये का निजी मुचलका और उतनी ही रकम के दो जमानतदार पेश करने को कहा। अदालत ने आरोपी से अपना पासपोर्ट जमा करने और मुकदमे की सुनवाई कर रही अदालत की मंज़ूरी के बिना देश से बाहर न जाने का निर्देश दिया।

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