अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने गुरुवार को कहा कि ईरान युद्ध के दौरान NATO देशों के रवैये से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प काफी निराश हैं। रूबियो ने खासतौर पर स्पेन का जिक्र करते हुए कहा कि उसने अमेरिका को अपने सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं दी। उन्होंने कहा कि अमेरिका NATO का हिस्सा इसलिए है ताकि जरूरत पड़ने पर वह यूरोप और मिडिल ईस्ट जैसे इलाकों में अपने सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल कर सके। रूबियो ने सवाल उठाते हुए कहा, अगर कोई देश अमेरिका को अपने बेस इस्तेमाल नहीं करने देता, तो फिर वह NATO में क्यों है? उन्होंने कहा कि ट्रम्प NATO देशों के सहयोग से खुश नहीं हैं और अमेरिका इस मुद्दे को गंभीरता से देख रहा है। पिछले 24 घंटे क 5 बड़े अपडेट्स… 1. ट्रम्प बोले- जंग के अलावा कोई विकल्प नहीं था: ट्रम्प ने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए अमेरिका के पास युद्ध के अलावा कोई विकल्प नहीं था। उन्होंने दावा किया कि होर्मुज में खड़े 1600 तेल जहाज जल्द निकलेंगे, जिससे तेल की कीमतें गिरेंगी। 2. ईरान बोला- हमारे पास अभी कई सीक्रेट हथियार बाकी अमेरिका की धमकियों के बीच ईरान ने दावा किया कि उसके पास कई आधुनिक और अनटेस्टेड हथियार मौजूद हैं। ईरानी सैन्य सूत्रों ने कहा कि अगली बार हमला हुआ तो जवाब बिना किसी संयम के दिया जाएगा। 3. ईरान जंग पर ट्रम्प-नेतन्याहू में मतभेद रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ईरान के साथ तनाव कम करने और सीजफायर बनाए रखने की कोशिश कर रहा है, जबकि इजराइल दोबारा सैन्य कार्रवाई के पक्ष में है। नेतन्याहू सरकार ईरान पर दबाव बनाए रखना चाहती है। 4. जंग के बीच फिर महंगा हुआ तेल: ईरान युद्ध और सप्लाई संकट की आशंका के बीच ब्रेंट क्रूड 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। होर्मुज स्ट्रेट को लेकर तनाव और अमेरिकी तेल भंडार में गिरावट से बाजार में चिंता बढ़ी है। 5. अमेरिका बोला- ईरान ने होर्मुज में टोल वसूला तो डील मुश्किल अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि अगर ईरान होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों से टोल वसूलता है, तो अमेरिका-ईरान समझौता मुश्किल हो जाएगा। ट्रम्प ने भी कहा कि होर्मुज एक अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्ता है और यहां टोल मंजूर नहीं होगा। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
ट्रम्प ईरान जंग में NATO के रुख से नाराज:अमेरिका बोला- जो देश हमारी मदद नहीं कर रहे वो NATO में क्यों हैं


