बक्सर के डुमरांव में आए भीषण आंधी-तूफान के बाद राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई है। पूर्व माले विधायक अजीत कुशवाहा ने प्रशासन और वर्तमान विधायक पर निशाना साधा है। उन्होंने बताया कि राजगढ़ चौक पर लगभग 300 वर्ष पुराना पेड़ गिरने से शहर की बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। 24 घंटे बाद भी प्रशासन और क्षेत्र के जनप्रतिनिधि सक्रिय नहीं दिखे। कुशवाहा ने आरोप लगाया कि संकट की इस स्थिति में जनता अपने प्रतिनिधि से अपेक्षा रखती है, लेकिन वर्तमान विधायक की चुप्पी पर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि का दायित्व केवल चुनाव तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि संकट के समय जनता के बीच रहकर समस्याओं का समाधान करना भी आवश्यक है। बिजली आपूर्ति बाधित होने के कारण पूरे शहर में अंधेरा है और पेयजल संकट भी उत्पन्न हो गया है। गर्मी में लोग पानी और बिजली के बिना परेशान हैं। आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी मौके पर मौजूद नहीं हैं। इसे जनहित के प्रति लापरवाही बताया जा रहा है। पूर्व विधायक ने यह भी कहा कि यदि समय रहते वन विभाग और संबंधित अधिकारियों को सचेत किया जाता, तो इस स्थिति से बचा जा सकता था। उन्होंने इसे प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय की कमी बताया। अधिकारियों से बात कर कार्रवाई की मांग की अजीत कुशवाहा ने घटनास्थल का दौरा किया और संबंधित अधिकारियों से बात कर तत्काल कार्रवाई की मांग की। उन्होंने प्रशासन से गिरे हुए पेड़ को हटाकर जल्द बिजली बहाल करने की अपील की, ताकि लोगों को राहत मिल सके। इस पूरे मामले पर स्थानीय लोगों में भी असंतोष है। लोगों का कहना है कि संकट के समय जनप्रतिनिधियों की सक्रियता महत्वपूर्ण होती है, लेकिन इस मामले में स्थिति भिन्न दिख रही है। डुमरांव में यह मुद्दा अब राजनीतिक रंग ले चुका है और आने वाले दिनों में इस पर बयानबाजी और तेज होने की संभावना है। बक्सर के डुमरांव में आए भीषण आंधी-तूफान के बाद राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई है। पूर्व माले विधायक अजीत कुशवाहा ने प्रशासन और वर्तमान विधायक पर निशाना साधा है। उन्होंने बताया कि राजगढ़ चौक पर लगभग 300 वर्ष पुराना पेड़ गिरने से शहर की बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। 24 घंटे बाद भी प्रशासन और क्षेत्र के जनप्रतिनिधि सक्रिय नहीं दिखे। कुशवाहा ने आरोप लगाया कि संकट की इस स्थिति में जनता अपने प्रतिनिधि से अपेक्षा रखती है, लेकिन वर्तमान विधायक की चुप्पी पर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि का दायित्व केवल चुनाव तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि संकट के समय जनता के बीच रहकर समस्याओं का समाधान करना भी आवश्यक है। बिजली आपूर्ति बाधित होने के कारण पूरे शहर में अंधेरा है और पेयजल संकट भी उत्पन्न हो गया है। गर्मी में लोग पानी और बिजली के बिना परेशान हैं। आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी मौके पर मौजूद नहीं हैं। इसे जनहित के प्रति लापरवाही बताया जा रहा है। पूर्व विधायक ने यह भी कहा कि यदि समय रहते वन विभाग और संबंधित अधिकारियों को सचेत किया जाता, तो इस स्थिति से बचा जा सकता था। उन्होंने इसे प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय की कमी बताया। अधिकारियों से बात कर कार्रवाई की मांग की अजीत कुशवाहा ने घटनास्थल का दौरा किया और संबंधित अधिकारियों से बात कर तत्काल कार्रवाई की मांग की। उन्होंने प्रशासन से गिरे हुए पेड़ को हटाकर जल्द बिजली बहाल करने की अपील की, ताकि लोगों को राहत मिल सके। इस पूरे मामले पर स्थानीय लोगों में भी असंतोष है। लोगों का कहना है कि संकट के समय जनप्रतिनिधियों की सक्रियता महत्वपूर्ण होती है, लेकिन इस मामले में स्थिति भिन्न दिख रही है। डुमरांव में यह मुद्दा अब राजनीतिक रंग ले चुका है और आने वाले दिनों में इस पर बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।


