झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) एक बार फिर अपनी परीक्षा प्रणाली में गंभीर लापरवाही को लेकर सवालों के घेरे में है। रविवार को आयोजित सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा (पीटी) के प्रश्न पत्र में हिंदी अनुवाद की कई बड़ी गलतियां सामने आई हैं। स्थिति यह रही कि झारखंड के प्रचलित शब्द ‘डोकलो’ को ‘ठोकलो’, ‘पड़हा’ को ‘परहा’ और ‘सारंडा’ को ‘सारंदा’ लिख दिया गया। इससे पहले सहायक वन संरक्षक मुख्य परीक्षा में भी अंग्रेजी से हिंदी अनुवाद में 65 से अधिक अशुद्धियां मिली थीं, जिस पर आयोग की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं आया। सामान्य अध्ययन पेपर-2 में सबसे ज्यादा त्रुटियां अभ्यर्थियों के अनुसार, इस बार की पीटी परीक्षा में खासतौर पर सामान्य अध्ययन के पेपर-2 में अनुवाद संबंधी गड़बड़ियां अधिक देखने को मिलीं। एक प्रश्न में ‘‘ठोकलो सोहोर शासन व्यवस्था’ पूछा गया, जबकि सही शब्द ‘डोकलो’ होना चाहिए था। इसी तरह ‘परहा के राजनीतिक प्रमुख’ में ‘पड़हा’ की जगह ‘परहा’ लिखा गया। ‘सारंदा वन क्षेत्र’ भी गलत रूप में छपा। इसके अलावा नृत्य से जुड़े एक सवाल में ‘पाइका’ की जगह ‘पड़का’ लिखा गया, जबकि विश्वविद्यालयों के क्रम से जुड़े प्रश्न में ‘नीलाबर’ की जगह ‘निलंबर’ छापा गया। पेपर-1 में भी ‘बेटन वुड्स सम्मेलन’ को ‘बेटेन वुड्स’ लिखने की गलती सामने आई। मॉडरेशन और प्रूफरीडिंग पर उठे सवाल जेपीएससी जैसी बड़ी परीक्षा में प्रश्न पत्र तैयार करने के बाद मॉडरेशन और प्रूफरीडिंग की प्रक्रिया अनिवार्य होती है। इसके बावजूद इस स्तर की गलतियों का सामने आना आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ टाइपिंग की गलती नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की विफलता को दर्शाता है। यदि समय रहते इन त्रुटियों को ठीक किया जाता, तो अभ्यर्थियों में भ्रम की स्थिति नहीं बनती। वहीं अभ्यर्थियों का कहना है कि परीक्षा का संचालन तो ठीक हुआ, लेकिन इस स्तर की परीक्षा में ऐसी त्रुटियां अस्वीकार्य हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अब परीक्षार्थी अनुमान के आधार पर उत्तर देंगे। अभ्यर्थियों का कहना है कि आयोग को इन गलतियों की जिम्मेदारी तय करनी चाहिए।
————————————— इसे भी पढ़ें.… JPSC सहायक वन संरक्षक परीक्षा; प्रश्नपत्र में कई गलतियां:राष्ट्रीय को लिखा ‘रार्ष्ट्रीय’, महत्वपूर्ण हुआ ‘महत्वपूर्न’, मॉडरेशन प्रक्रिया पर उठे सवाल झारखंड लोक सेवा आयोग की सहायक वन संरक्षक मुख्य परीक्षा इन दिनों गंभीर त्रुटियों को लेकर चर्चा में है। चार अप्रैल से शुरू हुई यह परीक्षा 12 अप्रैल तक चलनी है, लेकिन सोमवार को आयोजित सामान्य अध्ययन के दूसरे पेपर ने आयोग की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अभ्यर्थियों के अनुसार प्रश्न पत्र में दर्जनों अशुद्धियां हैं, जिससे कई सवालों के अर्थ ही बदल गए। स्थिति इतनी खराब रही कि लगभग हर प्रश्न में तीन से चार तक गलतियां देखने को मिलीं, जिससे परीक्षार्थियों को उत्तर देने में भारी परेशानी हुई। यहां पढ़ें पूरी खबर… झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) एक बार फिर अपनी परीक्षा प्रणाली में गंभीर लापरवाही को लेकर सवालों के घेरे में है। रविवार को आयोजित सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा (पीटी) के प्रश्न पत्र में हिंदी अनुवाद की कई बड़ी गलतियां सामने आई हैं। स्थिति यह रही कि झारखंड के प्रचलित शब्द ‘डोकलो’ को ‘ठोकलो’, ‘पड़हा’ को ‘परहा’ और ‘सारंडा’ को ‘सारंदा’ लिख दिया गया। इससे पहले सहायक वन संरक्षक मुख्य परीक्षा में भी अंग्रेजी से हिंदी अनुवाद में 65 से अधिक अशुद्धियां मिली थीं, जिस पर आयोग की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं आया। सामान्य अध्ययन पेपर-2 में सबसे ज्यादा त्रुटियां अभ्यर्थियों के अनुसार, इस बार की पीटी परीक्षा में खासतौर पर सामान्य अध्ययन के पेपर-2 में अनुवाद संबंधी गड़बड़ियां अधिक देखने को मिलीं। एक प्रश्न में ‘‘ठोकलो सोहोर शासन व्यवस्था’ पूछा गया, जबकि सही शब्द ‘डोकलो’ होना चाहिए था। इसी तरह ‘परहा के राजनीतिक प्रमुख’ में ‘पड़हा’ की जगह ‘परहा’ लिखा गया। ‘सारंदा वन क्षेत्र’ भी गलत रूप में छपा। इसके अलावा नृत्य से जुड़े एक सवाल में ‘पाइका’ की जगह ‘पड़का’ लिखा गया, जबकि विश्वविद्यालयों के क्रम से जुड़े प्रश्न में ‘नीलाबर’ की जगह ‘निलंबर’ छापा गया। पेपर-1 में भी ‘बेटन वुड्स सम्मेलन’ को ‘बेटेन वुड्स’ लिखने की गलती सामने आई। मॉडरेशन और प्रूफरीडिंग पर उठे सवाल जेपीएससी जैसी बड़ी परीक्षा में प्रश्न पत्र तैयार करने के बाद मॉडरेशन और प्रूफरीडिंग की प्रक्रिया अनिवार्य होती है। इसके बावजूद इस स्तर की गलतियों का सामने आना आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ टाइपिंग की गलती नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की विफलता को दर्शाता है। यदि समय रहते इन त्रुटियों को ठीक किया जाता, तो अभ्यर्थियों में भ्रम की स्थिति नहीं बनती। वहीं अभ्यर्थियों का कहना है कि परीक्षा का संचालन तो ठीक हुआ, लेकिन इस स्तर की परीक्षा में ऐसी त्रुटियां अस्वीकार्य हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अब परीक्षार्थी अनुमान के आधार पर उत्तर देंगे। अभ्यर्थियों का कहना है कि आयोग को इन गलतियों की जिम्मेदारी तय करनी चाहिए।
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