समस्तीपुर-दरभंगा रेलखंड पर दोहरीकरण का कार्य पूरा हो गया है। इसके साथ ही चीफ सेफ्टी कमिश्नर गुरू प्रकाश ने गुरुवार शाम खंड का निरीक्षण कर स्पीड ट्रायल लिया। इस दौरान ट्रेन 123 किलोमीटर की रफ्तार से चली। इसके साथ ही अब इस खंड के दोहरीलाइन पर ट्रेनों के परिचालन का रास्ता साफ हो गया है। सीआरएस की हरी झंडी के साथ ही ट्रेन सेवा शुरू कर दी जाएगी। डीआरएम ज्योति प्रकाश मिश्रा ने बताया कि चीफ सेफ्टी कमिश्नर ने सर्व प्रथम रामभद्रपुर से थलवारा 12 किलोमीटर में मोटर ट्रॉली से रेलवे लाइन का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने रेलवे पुल, रेलवे क्रासिंग,आदि जगहों पर रूक पर पथ निर्माण की जांच की। जांच में सब कुछ ठीक मिलने के बाद शाम साढे पांच बजे थलवारा से रामभद्रपुर स्पीड ट्रालय किया गया। डीआरएम बोले- ट्रायल में लोकोपायलट को कोई परेशानी नहीं हुई डीआरएम ज्योति प्रकाश मिश्रा ने बताया कि ट्रायल ट्रेन शाम के 5.37 मिनट पर थलवारा से खुली और 5.43 बजे रामभद्रपुर पहुंच गई। लोकोपायलट को परिचालन में कोई परेशानी नहीं हुई। निरीक्षण के दौरान डीआरएम के अलावा रेलवे मंडल के इंजीनियरिंग विभाग के अभियंता के साथ ही रेलवे के निर्माण विभाग के इंजीनियर भी साथ-साथ थे। 2016 में शुरू किया गया था दोहरीकरण का कार्य समस्तीपुर- दरभंगा 38 किलोमीटर दोहरीकरण का कार्य वर्ष 2016 में शुरू किया गया था। इस कार्य को तीन वर्षों के अंदर पूरा करना था। लेकिन इस योजना के पूरा होने में करीब 10 साल लग गए। कोरोना के कारण तीन साल कार्य की गती धीमी रही। कोरोना बाद कार्य को जल्द पूरा करने के लिए परियोजना को चार भागों में बांट कर पूरा किया है। पहले चरण में समस्तीपुर से किशनपुर, दूसरे चरण में किशनपुर से – रामभद्रपुर, तीसरे चरण में दरभंगा से – थलवारा और चौथे चरण में थलवारा से रामभद्रपुर तक कार्य को पूरा किया गया। इस खंड के बागमती, करेह नदी पर के साथ बूढरगंडक नदी पर मेजर ब्रिज का निर्माण कराया गया। जिससे भी कार्य में देरी हुई हर साल बाढ में बंद हो जाती थी ट्रेन सेवा बाढ के दौरान प्रत्येक वर्ष समस्तीपुर-दरभंगा रेलखंड पर ट्रेन सेवा करीब एक महीने तक ठप रहता था। बागमती व करेह नदी का पानी पुल नंबर 16 और 17 पर चढ़ जाता था। अब इस खंड पर बाढ के दौरान भी ट्रेन सेवा बाधित नहीं होगी। समस्तीपुर-दरभंगा रेलखंड पर दोहरीकरण का कार्य पूरा हो गया है। इसके साथ ही चीफ सेफ्टी कमिश्नर गुरू प्रकाश ने गुरुवार शाम खंड का निरीक्षण कर स्पीड ट्रायल लिया। इस दौरान ट्रेन 123 किलोमीटर की रफ्तार से चली। इसके साथ ही अब इस खंड के दोहरीलाइन पर ट्रेनों के परिचालन का रास्ता साफ हो गया है। सीआरएस की हरी झंडी के साथ ही ट्रेन सेवा शुरू कर दी जाएगी। डीआरएम ज्योति प्रकाश मिश्रा ने बताया कि चीफ सेफ्टी कमिश्नर ने सर्व प्रथम रामभद्रपुर से थलवारा 12 किलोमीटर में मोटर ट्रॉली से रेलवे लाइन का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने रेलवे पुल, रेलवे क्रासिंग,आदि जगहों पर रूक पर पथ निर्माण की जांच की। जांच में सब कुछ ठीक मिलने के बाद शाम साढे पांच बजे थलवारा से रामभद्रपुर स्पीड ट्रालय किया गया। डीआरएम बोले- ट्रायल में लोकोपायलट को कोई परेशानी नहीं हुई डीआरएम ज्योति प्रकाश मिश्रा ने बताया कि ट्रायल ट्रेन शाम के 5.37 मिनट पर थलवारा से खुली और 5.43 बजे रामभद्रपुर पहुंच गई। लोकोपायलट को परिचालन में कोई परेशानी नहीं हुई। निरीक्षण के दौरान डीआरएम के अलावा रेलवे मंडल के इंजीनियरिंग विभाग के अभियंता के साथ ही रेलवे के निर्माण विभाग के इंजीनियर भी साथ-साथ थे। 2016 में शुरू किया गया था दोहरीकरण का कार्य समस्तीपुर- दरभंगा 38 किलोमीटर दोहरीकरण का कार्य वर्ष 2016 में शुरू किया गया था। इस कार्य को तीन वर्षों के अंदर पूरा करना था। लेकिन इस योजना के पूरा होने में करीब 10 साल लग गए। कोरोना के कारण तीन साल कार्य की गती धीमी रही। कोरोना बाद कार्य को जल्द पूरा करने के लिए परियोजना को चार भागों में बांट कर पूरा किया है। पहले चरण में समस्तीपुर से किशनपुर, दूसरे चरण में किशनपुर से – रामभद्रपुर, तीसरे चरण में दरभंगा से – थलवारा और चौथे चरण में थलवारा से रामभद्रपुर तक कार्य को पूरा किया गया। इस खंड के बागमती, करेह नदी पर के साथ बूढरगंडक नदी पर मेजर ब्रिज का निर्माण कराया गया। जिससे भी कार्य में देरी हुई हर साल बाढ में बंद हो जाती थी ट्रेन सेवा बाढ के दौरान प्रत्येक वर्ष समस्तीपुर-दरभंगा रेलखंड पर ट्रेन सेवा करीब एक महीने तक ठप रहता था। बागमती व करेह नदी का पानी पुल नंबर 16 और 17 पर चढ़ जाता था। अब इस खंड पर बाढ के दौरान भी ट्रेन सेवा बाधित नहीं होगी।


