पवित्र नगरी अमरकंटक में शुक्रवार को वैशाख मास की सतुवाई अमावस्या के अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं ने नर्मदा नदी में आस्था की डुबकी लगाई। तड़के सुबह से ही रामघाट और गांधी कुंड जैसे प्रमुख घाटों पर स्नान और धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला शुरू हो गया। एमपी और महाराष्ट्र से हजारों श्रद्धालु पहुंचे इस अवसर पर मध्य प्रदेश के बैतूल, सीहोर, शाजापुर सहित महाराष्ट्र के नागपुर, नासिक और जलगांव से बड़ी संख्या में भक्त अमरकंटक पहुंचे। गर्मी के प्रभाव को देखते हुए अधिकांश श्रद्धालुओं ने सुबह जल्दी ही स्नान-ध्यान और पूजन किया। रामघाट पर सीहोर के भक्तों ने किया हवन-पूजन सीहोर से आए श्रद्धालुओं ने रामघाट पर विधिवत हवन, पूजन और आरती का आयोजन किया। अनुष्ठान बाद दाल-बाफले का भोग लगाया गया और सामूहिक रूप से प्रसाद ग्रहण किया गया। इसके बाद श्रद्धालुओं ने नर्मदा उद्गम सहित अन्य पर्यटन स्थलों का भ्रमण किया। धार्मिक परंपरा में सत्तू दान का विशेष महत्व सतुवाई अमावस्या पर ‘सत्तू’ दान करने की प्राचीन परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रीष्म ऋतु में सत्तू का दान न केवल पुण्यदायी है, बल्कि यह शरीर को शीतलता प्रदान कर स्वास्थ्य की दृष्टि से भी श्रेष्ठ माना गया है। धार्मिक पर्यटन से क्षेत्र में रही चहल-पहल स्नान और पूजन के बाद श्रद्धालुओं ने अपने परिजनों के साथ क्षेत्र के विभिन्न मंदिरों के दर्शन किए। बड़ी संख्या में बाहरी जिलों के लोगों के पहुंचने से अमरकंटक में दिन भर धार्मिक पर्यटन की सक्रियता बनी रही। देखें तस्वीरें…


