पूर्णिया में शिवमय हुआ माहौल:द्वादश ज्योतिर्लिंग मेला के चौथे दिन उमड़ी भीड़, राजयोग मेडिटेशन बना आकर्षण का केंद्र

पूर्णिया में शिवमय हुआ माहौल:द्वादश ज्योतिर्लिंग मेला के चौथे दिन उमड़ी भीड़, राजयोग मेडिटेशन बना आकर्षण का केंद्र

पूर्णिया में इन दिनों आस्था और आध्यात्म का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। टैक्सी स्टैंड स्थित राजस्थान सेवा समिति भवन परिसर में चल रहे द्वादश ज्योतिर्लिंग दर्शन मेले के चौथे दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। सुबह से ही शहर और आसपास के इलाकों से लोग भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन के लिए पहुंचते रहे। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, जिला शाखा की ओर से बीके मुकुट मणि के नेतृत्व में आयोजित इस आध्यात्मिक प्रदर्शनी ने पूरे शहर को शिवमय कर दिया है। मेले में 12 ज्योतिर्लिंगों की भव्य और आकर्षक झांकियां तैयार की गई हैं, जिन्हें देखकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो रहे हैं। लोग कतार में लगकर शांतिपूर्वक दर्शन कर रहे हैं और अंदर एक अलग ही सुकून महसूस कर रहे हैं।
मेले का सबसे खास आकर्षण राजयोग मेडिटेशन है। तीसरे दिन राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी अनिता दीदी ने श्रद्धालुओं को मेडिटेशन के जरिए तनाव मुक्त जीवन जीने का सरल तरीका बताया। उन्होंने कहा कि आज के समय में भौतिक सुविधाएं बढ़ी हैं, लेकिन मानसिक तनाव भी उतना ही बढ़ गया है। इससे बाहर निकलने के लिए रोज आत्म-चिंतन और परमात्मा से जुड़ाव जरूरी है। सरल शब्दों में समझाया कि मैं शरीर नहीं, एक शक्तिशाली आत्मा हूं। इस तरह का सकारात्मक चिंतन अपनाने से मन शांत होता है और जीवन में स्थिरता आती है। परमपिता शिव से सच्चा संबंध ही आंतरिक शांति का सबसे बड़ा आधार है। एक ही जगह प्रसिद्ध 12 ज्योतिर्लिंगों का दर्शन वहीं, बीके मुकुट मणि दीदी ने ज्योतिर्लिंगों के आध्यात्मिक महत्व को समझाते हुए कहा कि यह मेला सिर्फ दर्शन के लिए नहीं, बल्कि अपने अंदर की नकारात्मकताओं को छोड़कर सकारात्मक जीवन अपनाने का एक अवसर है। पहली बार पूर्णिया में इस तरह का आयोजन किया गया है, जिससे लोग एक ही जगह देश के प्रसिद्ध 12 ज्योतिर्लिंगों सोमनाथ, महाकालेश्वर, केदारनाथ, काशी विश्वनाथ, त्र्यंबकेश्वर, वैद्यनाथ, नागेश्वर, रामेश्वरम, घृष्णेश्वर, मल्लिकार्जुन और ओंकारेश्वर के दर्शन कर पा रहे हैं। धार्मिक आस्था और सकारात्मक ऊर्जा मेले में श्रद्धालुओं के बीच ब्रह्माकुमारी बहनों और भाइयों द्वारा ईश्वरीय सौगात और प्रसाद का वितरण भी किया जा रहा है। लोगों का कहना है कि ऐसे आयोजनों से न सिर्फ धार्मिक आस्था मजबूत होती है, बल्कि मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा भी मिलती है। ये मेला रोज सुबह 8 बजे से शाम 7 बजे तक आम लोगों के लिए खुला है और 21 तारीख तक चलेगा। ऐसे में अभी भी श्रद्धालुओं के पास इस आध्यात्मिक अनुभव का लाभ उठाने का अच्छा मौका है। पूर्णिया में इन दिनों आस्था और आध्यात्म का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। टैक्सी स्टैंड स्थित राजस्थान सेवा समिति भवन परिसर में चल रहे द्वादश ज्योतिर्लिंग दर्शन मेले के चौथे दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। सुबह से ही शहर और आसपास के इलाकों से लोग भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन के लिए पहुंचते रहे। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, जिला शाखा की ओर से बीके मुकुट मणि के नेतृत्व में आयोजित इस आध्यात्मिक प्रदर्शनी ने पूरे शहर को शिवमय कर दिया है। मेले में 12 ज्योतिर्लिंगों की भव्य और आकर्षक झांकियां तैयार की गई हैं, जिन्हें देखकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो रहे हैं। लोग कतार में लगकर शांतिपूर्वक दर्शन कर रहे हैं और अंदर एक अलग ही सुकून महसूस कर रहे हैं।
मेले का सबसे खास आकर्षण राजयोग मेडिटेशन है। तीसरे दिन राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी अनिता दीदी ने श्रद्धालुओं को मेडिटेशन के जरिए तनाव मुक्त जीवन जीने का सरल तरीका बताया। उन्होंने कहा कि आज के समय में भौतिक सुविधाएं बढ़ी हैं, लेकिन मानसिक तनाव भी उतना ही बढ़ गया है। इससे बाहर निकलने के लिए रोज आत्म-चिंतन और परमात्मा से जुड़ाव जरूरी है। सरल शब्दों में समझाया कि मैं शरीर नहीं, एक शक्तिशाली आत्मा हूं। इस तरह का सकारात्मक चिंतन अपनाने से मन शांत होता है और जीवन में स्थिरता आती है। परमपिता शिव से सच्चा संबंध ही आंतरिक शांति का सबसे बड़ा आधार है। एक ही जगह प्रसिद्ध 12 ज्योतिर्लिंगों का दर्शन वहीं, बीके मुकुट मणि दीदी ने ज्योतिर्लिंगों के आध्यात्मिक महत्व को समझाते हुए कहा कि यह मेला सिर्फ दर्शन के लिए नहीं, बल्कि अपने अंदर की नकारात्मकताओं को छोड़कर सकारात्मक जीवन अपनाने का एक अवसर है। पहली बार पूर्णिया में इस तरह का आयोजन किया गया है, जिससे लोग एक ही जगह देश के प्रसिद्ध 12 ज्योतिर्लिंगों सोमनाथ, महाकालेश्वर, केदारनाथ, काशी विश्वनाथ, त्र्यंबकेश्वर, वैद्यनाथ, नागेश्वर, रामेश्वरम, घृष्णेश्वर, मल्लिकार्जुन और ओंकारेश्वर के दर्शन कर पा रहे हैं। धार्मिक आस्था और सकारात्मक ऊर्जा मेले में श्रद्धालुओं के बीच ब्रह्माकुमारी बहनों और भाइयों द्वारा ईश्वरीय सौगात और प्रसाद का वितरण भी किया जा रहा है। लोगों का कहना है कि ऐसे आयोजनों से न सिर्फ धार्मिक आस्था मजबूत होती है, बल्कि मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा भी मिलती है। ये मेला रोज सुबह 8 बजे से शाम 7 बजे तक आम लोगों के लिए खुला है और 21 तारीख तक चलेगा। ऐसे में अभी भी श्रद्धालुओं के पास इस आध्यात्मिक अनुभव का लाभ उठाने का अच्छा मौका है।  

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