खेल अभी बाकी है, नीतीश ने क्या भाजपा को फंसाया:जाते-जाते BJP को CM की कुर्सी दी; JDU को मजबूती, लालू-तेजस्वी, भाजपा को चौंकाया

नीतीश कुमार के जाने के बाद जनता दल यूनाइटेड (JDU) का क्या होगा। पार्टी बचेगी या कमजोर होकर खत्म हो जाएगी। बिहार की सियासत में सबसे ज्यादा पूछे जाने वाले इन सवाल का जवाब नीतीश कुमार के मूव में है। उन्होंने अपनी पसंद के आदमी को मुख्यमंत्री और डिप्टी CM बनवाकर JDU के भविष्य को कुछ हद तक सुरक्षित और मजबूत करने का प्रयास किया है। आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाहीं में नीतीश कैसे जाते-जाते अपनी पार्टी को मजबूत कर गए… जाते-जाते नीतीश ने खेला बड़ा दांव 1. सम्राट को बनवाया CM, लव-कुश गठजोड़ मजबूत पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लव-कुश मतलब कुर्मी-कोईरी गठजोड़ की राजनीति करते रहे हैं। संख्या बल में अधिक होने के बावजूद कोईरी समाज ने अपना नेता कुर्मी समाज से आने वाले नीतीश कुमार को माना। दोनों का कॉम्बिनेशन जब बना तो EBC जातियों का सहयोग मिला। इसके बदौलत नीतीश कुमार 20 साल से ज्यादा समय से बिहार की सत्ता पर काबिज थे। नीतीश कुमार समय-समय पर कोईरी समाज को संकेत देते रहे हैं कि हमारे बाद आपका ही नंबर है। उस संकेत को उन्होंने गद्दी छोड़ने के बाद पूरा कर दिया। कोईरी समाज से आने वाले सम्राट चौधरी को उन्होंने मुख्यमंत्री बनवा दिया है। बताया जा रहा है कि सम्राट के नाम पर भाजपा के ना-हां करने पर नीतीश कुमार नाराज हो गए थे। उन्होंने भाजपा को सख्त मैसेज भेजा। उसके बाद ही भाजपा सम्राट को मुख्यमंत्री बनाने पर राजी हुई। सम्राट चौधरी के लिए नीतीश कुमार के प्रेशर को पूर्व डिप्टी CM विजय सिन्हा के शब्दों से समझा जा सकता है। उन्होंने 14 अप्रैल की शाम कहा, ‘वर्षों बरस तक जमीन पर मेहनत किए, पसीना बहाए, लहू बहाए, बलिदान दिए, आज कमल खिलाने का अवसर आया। भाजपा का सिपाही होने के नाते अपने कमांडर (शीर्ष नेतृत्व) के आदेश पर गठबंधन की राजनीति को लेकर चलने के लिए हमने सम्राट चौधरी जी के नाम का प्रस्ताव दिया।’ 2. भरोसेमंद विजय के बहाने भूमिहारों के लिए खोला ऑप्शन नीतीश कुमार ने अपनी पार्टी के कोटे से अपने भरोसेमंद विजय चौधरी को डिप्टी CM बनाया है। वह भूमिहार समाज से आते हैं। राज्य में आबादी 2.86% हैं। इससे पहले इसी समाज के विजय सिन्हा भाजपा कोटे से डिप्टी CM थे। दरअसल, भूमिहार समाज को भाजपा का कोर वोटर माना जाता है। हालांकि, एक समय ऐसा भी था जब नीतीश कुमार को इस समाज पर काफी भरोसा था। उन्होंने अपनी पार्टी के कोटे से 2005 से 2014 तक 3-3 भूमिहार को मंत्री बनाया था। 2006 में करण थापर ने नीतीश कुमार से इंटरव्यू में सवाल तक पूछ लिया था- बिहार में सुशासन है कि भू-शासन? भू-शासन मतलब भूमिहार शासन। दरअसल, तब बिहार के डीजीपी अभयानंद, एडवोकेट जनरल पीके शाही और JDU के प्रदेश अध्यक्ष ललन सिंह भूमिहार जाति से थे। नीतीश कुमार ने करण के सवालों का जवाब देते हुए कहा था- तीनों लोग अपनी योग्यता, ईमानदारी और मेहनत के कारण पद पर हैं। क्या किसी योग्य व्यक्ति को इसलिए पद से वंचित कर दिया जाना चाहिए क्योंकि वो किसी अमुक जाति का है? मेरी नजर में इन सब बातों का कोई मतलब नहीं है। लेकिन 2014 लोकसभा चुनाव के बाद नीतीश ने अपनी रणनीति में बदलाव किया और भूमिहार कोटे के मंत्रियों को घटा दिया। दरअसल, 2014 में भाजपा और JDU अलग चुनाव लड़ी। JDU को सिर्फ 2 सीटों पर जीत मिली थी। 3. बिजेंद्र बने डिप्टी CM, यादव समाज को मैसेज-खुला रहेगा दरवाजा नीतीश कुमार ने अपने सबसे सीनियर और भरोसेमंद साथी बिजेंद्र प्रसाद यादव को दूसरा डिप्टी CM बनाया है। वह यादव समाज से आते हैं, जिनकी राज्य में आबादी 14.27% है। यादव समाज के बड़े लीडर लालू यादव और उनके बेटे तेजस्वी यादव हैं। नीतीश कुमार ने एक चाल से भाजपा, लालू-तेजस्वी को फंसाया नीतीश कुमार के जाने के बाद जनता दल यूनाइटेड (JDU) का क्या होगा। पार्टी बचेगी या कमजोर होकर खत्म हो जाएगी। बिहार की सियासत में सबसे ज्यादा पूछे जाने वाले इन सवाल का जवाब नीतीश कुमार के मूव में है। उन्होंने अपनी पसंद के आदमी को मुख्यमंत्री और डिप्टी CM बनवाकर JDU के भविष्य को कुछ हद तक सुरक्षित और मजबूत करने का प्रयास किया है। आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाहीं में नीतीश कैसे जाते-जाते अपनी पार्टी को मजबूत कर गए… जाते-जाते नीतीश ने खेला बड़ा दांव 1. सम्राट को बनवाया CM, लव-कुश गठजोड़ मजबूत पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लव-कुश मतलब कुर्मी-कोईरी गठजोड़ की राजनीति करते रहे हैं। संख्या बल में अधिक होने के बावजूद कोईरी समाज ने अपना नेता कुर्मी समाज से आने वाले नीतीश कुमार को माना। दोनों का कॉम्बिनेशन जब बना तो EBC जातियों का सहयोग मिला। इसके बदौलत नीतीश कुमार 20 साल से ज्यादा समय से बिहार की सत्ता पर काबिज थे। नीतीश कुमार समय-समय पर कोईरी समाज को संकेत देते रहे हैं कि हमारे बाद आपका ही नंबर है। उस संकेत को उन्होंने गद्दी छोड़ने के बाद पूरा कर दिया। कोईरी समाज से आने वाले सम्राट चौधरी को उन्होंने मुख्यमंत्री बनवा दिया है। बताया जा रहा है कि सम्राट के नाम पर भाजपा के ना-हां करने पर नीतीश कुमार नाराज हो गए थे। उन्होंने भाजपा को सख्त मैसेज भेजा। उसके बाद ही भाजपा सम्राट को मुख्यमंत्री बनाने पर राजी हुई। सम्राट चौधरी के लिए नीतीश कुमार के प्रेशर को पूर्व डिप्टी CM विजय सिन्हा के शब्दों से समझा जा सकता है। उन्होंने 14 अप्रैल की शाम कहा, ‘वर्षों बरस तक जमीन पर मेहनत किए, पसीना बहाए, लहू बहाए, बलिदान दिए, आज कमल खिलाने का अवसर आया। भाजपा का सिपाही होने के नाते अपने कमांडर (शीर्ष नेतृत्व) के आदेश पर गठबंधन की राजनीति को लेकर चलने के लिए हमने सम्राट चौधरी जी के नाम का प्रस्ताव दिया।’ 2. भरोसेमंद विजय के बहाने भूमिहारों के लिए खोला ऑप्शन नीतीश कुमार ने अपनी पार्टी के कोटे से अपने भरोसेमंद विजय चौधरी को डिप्टी CM बनाया है। वह भूमिहार समाज से आते हैं। राज्य में आबादी 2.86% हैं। इससे पहले इसी समाज के विजय सिन्हा भाजपा कोटे से डिप्टी CM थे। दरअसल, भूमिहार समाज को भाजपा का कोर वोटर माना जाता है। हालांकि, एक समय ऐसा भी था जब नीतीश कुमार को इस समाज पर काफी भरोसा था। उन्होंने अपनी पार्टी के कोटे से 2005 से 2014 तक 3-3 भूमिहार को मंत्री बनाया था। 2006 में करण थापर ने नीतीश कुमार से इंटरव्यू में सवाल तक पूछ लिया था- बिहार में सुशासन है कि भू-शासन? भू-शासन मतलब भूमिहार शासन। दरअसल, तब बिहार के डीजीपी अभयानंद, एडवोकेट जनरल पीके शाही और JDU के प्रदेश अध्यक्ष ललन सिंह भूमिहार जाति से थे। नीतीश कुमार ने करण के सवालों का जवाब देते हुए कहा था- तीनों लोग अपनी योग्यता, ईमानदारी और मेहनत के कारण पद पर हैं। क्या किसी योग्य व्यक्ति को इसलिए पद से वंचित कर दिया जाना चाहिए क्योंकि वो किसी अमुक जाति का है? मेरी नजर में इन सब बातों का कोई मतलब नहीं है। लेकिन 2014 लोकसभा चुनाव के बाद नीतीश ने अपनी रणनीति में बदलाव किया और भूमिहार कोटे के मंत्रियों को घटा दिया। दरअसल, 2014 में भाजपा और JDU अलग चुनाव लड़ी। JDU को सिर्फ 2 सीटों पर जीत मिली थी। 3. बिजेंद्र बने डिप्टी CM, यादव समाज को मैसेज-खुला रहेगा दरवाजा नीतीश कुमार ने अपने सबसे सीनियर और भरोसेमंद साथी बिजेंद्र प्रसाद यादव को दूसरा डिप्टी CM बनाया है। वह यादव समाज से आते हैं, जिनकी राज्य में आबादी 14.27% है। यादव समाज के बड़े लीडर लालू यादव और उनके बेटे तेजस्वी यादव हैं। नीतीश कुमार ने एक चाल से भाजपा, लालू-तेजस्वी को फंसाया  

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