राजस्थान क्राइम फाइल्स के पार्ट-1 में आपने पढ़ा कि जयपुर के मानसरोवर थाना इलाके में रहने वाली एक नाबालिग लड़की के साथ उसी के घर में युवक ने रेप किया। देर रात पिता ने थाने पहुंचकर आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस ने मामला दर्ज कर सबूत जुटाना शुरू कर दिया। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी नाबालिग के पड़ोस में रहता है। दोनों के मकानों के किनारे मिलते हैं। आरोपी ने सोशल मीडिया पर फेक अकाउंट बनाकर नाबालिग को अपने जाल में फंसाया। उससे दोस्ती की। फिर एक दिन अचानक से उसके सामने आकर बता दिया कि वह वही है, जिससे वह सोशल मीडिया पर बात करती है। इसके बाद आरोपी ने नाबालिग को दबाव में लेना शुरू किया। साथ ही उसके परिवार को मारने की धमकी देकर उसे जबरन मैसेज कर छत पर बुलाया और गलत काम किया। पुलिस टीम ने आरोपी के खिलाफ 18 सबूत कोर्ट के सामने पेश किए। इस केस में आरोपी के वकील ने कोर्ट को बताया कि पीड़ित और आरोपी पक्ष के बीच में कूड़ा डालने का विवाद था। इस कारण से युवक को केस में गलत फंसाया जा रहा है। पीड़िता के माता और पिता के बयानों में घटनाक्रम को लेकर गंभीर विरोधाभास है। तर्क दिया कि पीड़िता ने बताया कि आरोपी ने उसके साथ 5 दिन पहले भी इसी प्रकार की घटना की थी, लेकिन माता-पिता के बयान में 15 दिन पहले होना बताया गया। रिपोर्ट में बताया कि पीड़िता और आरोपी की दोस्ती इंस्टाग्राम पर हुई, लेकिन पुलिस ने पिछले तीन माह का कोई रिकॉर्ड कोर्ट में पेश ही नहीं किया। आरोपी पक्ष के वकील ने यह तर्क दिया कि आरोपी गरीब परिवार का है। वह अपने परिवार में अकेला कमाने वाला है। इसका यह पहला अपराध है। इस का पूर्व में कोई अपराधिक रिकॉर्ड भी नहीं है। आरोपी काफी समय तक जेल में रहा, ऐसे में सजा में नरमी बरती जाए। कोर्ट ने पुलिस जांच रिपोर्ट और दोनों पक्षों की बहस और तर्क सुनने के बाद दोषी को 20 साल की सजा सुनाई। साथ ही, 50 हजार का जुर्माना भी लगाया।


