देश के सबसे बड़े गोल्ड लूट गिरोह के सरगना सुबोध सिंह को बेऊर से पूर्णिया सेंट्रल जेल में शिफ्ट कर दिया गया है। मोस्ट वांटेड सुबोध के सेंट्रल जेल में शिफ्टिंग के बाद जेल प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है। सुबोध सिंह को जेल के स्पेशल सेल में रखा गया है, जहां उसकी रात कटी। जेल सुपरिटेंडेंट मनोज कुमार ने खुद इसकी पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि सुबोध सिंह को प्रशासनिक दृष्टिकोण से बेऊर से सेंट्रल जेल लाया गया है। जेल की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। आने-जाने वाले हर व्यक्ति पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। लूट की साजिश बेऊर जेल से रची थी सुबोध सिंह देशभर में करोड़ों के सोना लूटकांड के लिए कुख्यात रहा है। बिहार से लेकर राजस्थान, महाराष्ट्र, बंगाल, उत्तराखंड, तमिलनाडु और मध्यप्रदेश तक सोना लूट की वारदात को अंजाम दे चुका है। 26 जुलाई 2024 को पूर्णिया के तनिष्क शोरूम में हुई 3 करोड़ 70 लाख रुपए की डायमंड लूट के बाद सुबोध सिंह का नाम चर्चा में आया था। पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि इस हाई प्रोफाइल लूट की साजिश बेऊर जेल से रची गई थी। तब सुबोध सिंह बेऊर जेल में बंद था, लेकिन वहीं से उसने अपने गिरोह और लोकल क्रिमिनल के जरिए लूट की पूरी साजिश तैयार की। कुख्यात बिट्टू सिंह की भूमिका अहम लूट की प्लानिंग वारदात से करीब दो महीने पहले शुरू हो चुकी थी। इसमें जिले के कुख्यात अपराधी बिट्टू सिंह और अन्य लाइनरों की अहम भूमिका थी। पुलिस और STF ने जांच के दौरान चार लाइनरों को गिरफ्तार किया था। इनके पास से घटना में इस्तेमाल बाइक, मोबाइल फोन और हथियार बरामद किए गए थे। जांच में सामने आया कि बदमाशों ने एक सप्ताह तक कस्टमर बनकर तनिष्क शोरूम की रेकी की थी। वे शोरूम खुलने और बंद होने के समय, भीड़ का पैटर्न और पुलिस पेट्रोलिंग की गतिविधियों पर नजर रख रहे थे। लोकल लाइनर की भी भूमिका फेस्टिवल ऑफ डायमंड के दौरान लगे डायमंड नेकलेस एग्जीबिशन को गिरोह ने वारदात के लिए सबसे सही समय माना। लोकल लाइनर की मदद से अपराधियों ने यह भी पता कर लिया था कि सुबह शोरूम खुलने के तुरंत बाद पुलिस की सक्रियता कम रहती है। इसी का फायदा उठाकर बदमाश वारदात को अंजाम देने के बाद आसानी से जिले की सीमा पार कर गए। बिहार, बंगाल, झारखंड में रेड तत्कालीन एसपी उपेंद्र नाथ वर्मा ने बताया था कि अपराधियों को पकड़ने के लिए पूर्णिया पुलिस और STF कीकुल 10 टीमें लगातार छापेमारी कर रही थी। बिहार, बंगाल और झारखंड के कई इलाकों में रेड की गई थी। जांच में सामने आया कि वारदात के बाद अपराधी पहले पश्चिम बंगाल के मालदा पहुंचे और वहां से नेपाल भाग निकले। पुलिस का मानना था कि अपराधियों को पता था कि नेपाल सीमा पार करने के बाद उनकी तलाश और मुश्किल हो जाएगी। यही कारण था कि गिरोह लगातार ऐसे ठिकानों पर रुक रहा था जहां CCTV कैमरे न हों। पहली गिरफ्तारी 1999 में हुई थी पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, सुबोध सिंह गिरोह ने साल 2023 में धनतेरस के दिन उत्तराखंड के देहरादून स्थित रिलायंस ज्वेलरी शोरूम में 20 करोड़ रुपए से अधिक के सोने और हीरे की लूट को अंजाम दिया था। इसे देश की सबसे बड़ी ज्वेलरी लूट की घटनाओं में गिना जाता है। अपराध की दुनिया में ऐसे बढ़ा सुबोध सिंह का नेटवर्क नालंदा जिले के चिश्तीपुर गांव का रहने वाला सुबोध सिंह मैट्रिक तक पढ़ा है। उसकी पहली गिरफ्तारी 1999 में दानापुर रेलवे स्टेशन पर आर्म्स एक्ट मामले में हुई थी। इसके बाद 2003 में चोरी की बाइक के साथ पकड़ा गया। 2016 में जेल से बाहर आया था धीरे-धीरे उसने बैंक लूट और सोना लूट की घटनाओं के जरिए देशभर में अपना नेटवर्क खड़ा कर लिया। 2007 में कोलकाता के इंडियन ओवरसीज बैंक लूटकांड, 2009 में रायपुर के SBI और सेंट्रल बैंक लूटकांड, बंगाल के ICICI बैंक लूटकांड समेत कई बड़ी वारदातों में उसका नाम सामने आया। 2011 में गिरफ्तारी के बाद वह पांच साल जेल में रहा, लेकिन 2016 में बाहर निकलते ही उसने ज्वेलरी शोरूम और फाइनेंस कंपनियों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। सुबोध सिंह गिरोह पर राजस्थान, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, मध्यप्रदेश, बंगाल, बिहार और अरुणाचल प्रदेश समेत कई राज्यों में करोड़ों की सोना लूट की घटनाओं को अंजाम देने का आरोप है। जयपुर, नागपुर, नासिक, सांगली, लातूर, भोपाल, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर और हाजीपुर जैसे शहरों में हुई कई हाईप्रोफाइल लूट में भी इस गिरोह का नाम सामने आया। वहीं पूर्णिया सेंट्रल जेल में शिफ्ट किए जाने के बाद सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट हो गई हैं। देश के सबसे बड़े गोल्ड लूट गिरोह के सरगना सुबोध सिंह को बेऊर से पूर्णिया सेंट्रल जेल में शिफ्ट कर दिया गया है। मोस्ट वांटेड सुबोध के सेंट्रल जेल में शिफ्टिंग के बाद जेल प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है। सुबोध सिंह को जेल के स्पेशल सेल में रखा गया है, जहां उसकी रात कटी। जेल सुपरिटेंडेंट मनोज कुमार ने खुद इसकी पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि सुबोध सिंह को प्रशासनिक दृष्टिकोण से बेऊर से सेंट्रल जेल लाया गया है। जेल की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। आने-जाने वाले हर व्यक्ति पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। लूट की साजिश बेऊर जेल से रची थी सुबोध सिंह देशभर में करोड़ों के सोना लूटकांड के लिए कुख्यात रहा है। बिहार से लेकर राजस्थान, महाराष्ट्र, बंगाल, उत्तराखंड, तमिलनाडु और मध्यप्रदेश तक सोना लूट की वारदात को अंजाम दे चुका है। 26 जुलाई 2024 को पूर्णिया के तनिष्क शोरूम में हुई 3 करोड़ 70 लाख रुपए की डायमंड लूट के बाद सुबोध सिंह का नाम चर्चा में आया था। पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि इस हाई प्रोफाइल लूट की साजिश बेऊर जेल से रची गई थी। तब सुबोध सिंह बेऊर जेल में बंद था, लेकिन वहीं से उसने अपने गिरोह और लोकल क्रिमिनल के जरिए लूट की पूरी साजिश तैयार की। कुख्यात बिट्टू सिंह की भूमिका अहम लूट की प्लानिंग वारदात से करीब दो महीने पहले शुरू हो चुकी थी। इसमें जिले के कुख्यात अपराधी बिट्टू सिंह और अन्य लाइनरों की अहम भूमिका थी। पुलिस और STF ने जांच के दौरान चार लाइनरों को गिरफ्तार किया था। इनके पास से घटना में इस्तेमाल बाइक, मोबाइल फोन और हथियार बरामद किए गए थे। जांच में सामने आया कि बदमाशों ने एक सप्ताह तक कस्टमर बनकर तनिष्क शोरूम की रेकी की थी। वे शोरूम खुलने और बंद होने के समय, भीड़ का पैटर्न और पुलिस पेट्रोलिंग की गतिविधियों पर नजर रख रहे थे। लोकल लाइनर की भी भूमिका फेस्टिवल ऑफ डायमंड के दौरान लगे डायमंड नेकलेस एग्जीबिशन को गिरोह ने वारदात के लिए सबसे सही समय माना। लोकल लाइनर की मदद से अपराधियों ने यह भी पता कर लिया था कि सुबह शोरूम खुलने के तुरंत बाद पुलिस की सक्रियता कम रहती है। इसी का फायदा उठाकर बदमाश वारदात को अंजाम देने के बाद आसानी से जिले की सीमा पार कर गए। बिहार, बंगाल, झारखंड में रेड तत्कालीन एसपी उपेंद्र नाथ वर्मा ने बताया था कि अपराधियों को पकड़ने के लिए पूर्णिया पुलिस और STF कीकुल 10 टीमें लगातार छापेमारी कर रही थी। बिहार, बंगाल और झारखंड के कई इलाकों में रेड की गई थी। जांच में सामने आया कि वारदात के बाद अपराधी पहले पश्चिम बंगाल के मालदा पहुंचे और वहां से नेपाल भाग निकले। पुलिस का मानना था कि अपराधियों को पता था कि नेपाल सीमा पार करने के बाद उनकी तलाश और मुश्किल हो जाएगी। यही कारण था कि गिरोह लगातार ऐसे ठिकानों पर रुक रहा था जहां CCTV कैमरे न हों। पहली गिरफ्तारी 1999 में हुई थी पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, सुबोध सिंह गिरोह ने साल 2023 में धनतेरस के दिन उत्तराखंड के देहरादून स्थित रिलायंस ज्वेलरी शोरूम में 20 करोड़ रुपए से अधिक के सोने और हीरे की लूट को अंजाम दिया था। इसे देश की सबसे बड़ी ज्वेलरी लूट की घटनाओं में गिना जाता है। अपराध की दुनिया में ऐसे बढ़ा सुबोध सिंह का नेटवर्क नालंदा जिले के चिश्तीपुर गांव का रहने वाला सुबोध सिंह मैट्रिक तक पढ़ा है। उसकी पहली गिरफ्तारी 1999 में दानापुर रेलवे स्टेशन पर आर्म्स एक्ट मामले में हुई थी। इसके बाद 2003 में चोरी की बाइक के साथ पकड़ा गया। 2016 में जेल से बाहर आया था धीरे-धीरे उसने बैंक लूट और सोना लूट की घटनाओं के जरिए देशभर में अपना नेटवर्क खड़ा कर लिया। 2007 में कोलकाता के इंडियन ओवरसीज बैंक लूटकांड, 2009 में रायपुर के SBI और सेंट्रल बैंक लूटकांड, बंगाल के ICICI बैंक लूटकांड समेत कई बड़ी वारदातों में उसका नाम सामने आया। 2011 में गिरफ्तारी के बाद वह पांच साल जेल में रहा, लेकिन 2016 में बाहर निकलते ही उसने ज्वेलरी शोरूम और फाइनेंस कंपनियों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। सुबोध सिंह गिरोह पर राजस्थान, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, मध्यप्रदेश, बंगाल, बिहार और अरुणाचल प्रदेश समेत कई राज्यों में करोड़ों की सोना लूट की घटनाओं को अंजाम देने का आरोप है। जयपुर, नागपुर, नासिक, सांगली, लातूर, भोपाल, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर और हाजीपुर जैसे शहरों में हुई कई हाईप्रोफाइल लूट में भी इस गिरोह का नाम सामने आया। वहीं पूर्णिया सेंट्रल जेल में शिफ्ट किए जाने के बाद सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट हो गई हैं।


