Supreme Court में राजनीतिक दलों के Cash Donation प्रावधान पर 31 अगस्त को होगी सुनवाई

Supreme Court में राजनीतिक दलों के Cash Donation प्रावधान पर 31 अगस्त को होगी सुनवाई

उच्चतम न्यायालय 31 अगस्त को उस याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें राजनीतिक दलों को 2,000 रुपये से कम की नकद चंदा राशि लेने की अनुमति देने वाले आयकर अधिनियम के प्रावधान की वैधता को चुनौती दी गई है। उच्चतम न्यायालय की 31 अगस्त की वाद सूची के अनुसार, इस याचिका पर न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ के समक्ष सुनवाई होगी। शीर्ष अदालत ने पिछले वर्ष 24 नवंबर को याचिका पर सुनवाई करने की सहमति जताई थी और इस मामले में केंद्र सरकार तथा अन्य पक्षों से जवाब मांगा था।

याचिका में दावा किया गया है कि पारदर्शिता की यह कमी चुनाव प्रक्रिया की शुचिता को कमजोर करती है, क्योंकि यह मतदाताओं को दानकर्ता और उनके उद्देश्य समेत राजनीतिक वित्तपोषण के स्रोत के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी से वंचित करती है, जिससे वे वोट डालते समय तर्कसंगत, बुद्धिमत्तापूर्ण और पूरी तरह से सूचित निर्णय लेने से वंचित रह जाते हैं। खेम सिंह भाटी द्वारा दायर याचिका में निर्वाचन आयोग को यह निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है कि वह किसी राजनीतिक दल के पंजीकरण और चुनाव चिह्न के आवंटन के लिए एक शर्त के रूप में यह निर्धारित करे कि कोई भी राजनीतिक दल नकद में कोई राशि प्राप्त नहीं कर सकता। याचिका में आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 13ए के खंड (डी) को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द करने का अनुरोध किया गया है और साथ ही उच्चतम न्यायालय के 2024 के फैसले का भी हवाला दिया गया है, जिसमें चुनावी बॉण्ड योजना को रद्द कर दिया गया था।

अधिनियम की धारा 13ए राजनीतिक दलों की आय से संबंधित विशेष प्रावधान से जुड़ा है। याचिका में कहा गया कि अधिनियम में धारा 13ए जोड़ी गई है और राजनीतिक दलों को मिलने वाली जमानत राशि पर ब्याज, मकान/संपत्ति से आय, अन्य स्रोतों से आय, तथा स्वैच्छिक चंदे के रूप में मिलने वाली किसी भी रकम को कुल आय की गणना से मुक्त रखा गया है। याचिका में यह निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है कि निर्वाचन आयोग सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रपत्र 24ए (चंदा विवरण) की जांच करे और जिन चंदों में दाता का पता या पैन नहीं दिया गया है, उस राशि को संबंधित दलों से वापस जमा करवाए।

इसमें केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) को पिछले पांच वर्षों के दौरान आयकर अधिनियम की धाराओं के तहत राजनीतिक दलों द्वारा दाखिल आयकर रिटर्न और ऑडिट रिपोर्ट की जांच करने का निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है।

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