Subhash Chandra अब स्विट्जरलैंड में शुरू करेंगे नया काम, वीडियो में बताया अपना आगे का प्लान

Subhash Chandra अब स्विट्जरलैंड में शुरू करेंगे नया काम, वीडियो में बताया अपना आगे का प्लान

Subhash Chandra Debt: मीडिया कारोबारी सुभाष चंद्रा ने हाल ही में एक वीडियो मैसेज में कहा कि वे अब स्विट्जरलैंड में अपने दोस्तों के साथ मिलकर नया काम शुरू करने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने बताया कि अगले 1-2 हफ्तों में वे इस नए प्लान की पूरी जानकारी देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ी तो परिवार से 2-4 करोड़ रुपये का लोन लेकर वे कुछ स्टार्टअप्स में निवेश कर सकते हैं, जो आगे बढ़ने की क्षमता रखते हैं। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) द्वारा एक पुनर्भुगतान योजना को मंजूरी दिए जाने के बाद उन्होंने ये बात कही।

चंद्रा ने क्या कहा?

वीडियो में सुभाष चंद्रा ने कहा कि वे किसी ऐसे इंसान की तरह बात नहीं कर रहे जिसने सबकुछ खो दिया हो। उन्होंने बताया कि उनके पास एक छोटा सा घर है जो किराए पर दिया हुआ है, और वे उसी किराए से अपना खर्च चला रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें कोई पछतावा नहीं है और वे फिर से कमाएंगे क्योंकि वे नई चीजें करना जानते हैं।

क्या था मामला?

सुभाष चंद्रा का यह बयान NCLT यानी नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल के एक फैसले के कुछ दिन बाद आया है। NCLT ने उनकी दिवालिया प्रक्रिया में एक रीपेमेंट प्लान को मंजूरी दी है, जिसके तहत उन्हें कर्जदाताओं के 22,006 करोड़ रुपये के दावे के बदले सिर्फ करीब 6.5 करोड़ रुपये ही चुकाने होंगे। NCLT के सदस्य नीलेश शर्मा ने, IBC की धारा 114 के तहत यह प्लान मंजूर किया। LIC हाउसिंग फाइनेंस समेत HDFC बैंक, एक्सिस बैंक, केनरा बैंक, RBL बैंक और यूनियन बैंक ने इस प्लान का विरोध किया था। इसके बावजूद 80.81 फीसदी कर्जदाताओं ने इस प्लान के पक्ष में वोट किया था।

22,006 करोड़ रूपये के आंकड़े पर सुभाष चंद्रा

22,006 करोड़ रुपये की देनदारी की खबरों पर आपत्ति जताते हुए, सुभाष चंद्रा के ऑफिस ने कहा कि कुछ मीडिया हाउस उनके पर्सनल दिवालियापन मामले के बारे में गलत जानकारी फैला रहे हैं। बयान के अनुसार, आपत्ति करने वाले लेनदारों ने कुल 3,392 करोड़ रुपये के दावे दायर किए थे। इसमें से 620 करोड़ रुपये का निपटारा पहले ही हो चुका था। जबकि उधार लेने वाली कंपनियों ने ऐसे कई लेनदारों को लगभग 1,113 करोड़ रुपये की पेशकश की थी। उन्होंने यह भी कहा कि यह फैसला अभी औपचारिक आदेश में तब्दील नहीं हुआ है, इसलिए मामला तकनीकी रूप से अब भी NCLT में लंबित है।

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