Nepal Flood: नेपाल में आई बाढ़ के बाद शनिवार को राहत और बचाव अभियान चौथे दिन भी जारी रहा। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कम से कम 2,478 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। बाढ़ और मलबे ने सीमा क्षेत्र में बने घरों, सड़कों और अन्य बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है।
बाढ़ कितनी खतरनाक थी, इसका अंदाजा सैटेलाइट से ली गई पहले और बाद की तस्वीरों से लगाया जा सकता है। इसको लेकर सोशल मीडिया पर कई तस्वीरें वायरल हो रही है। जिसमें ग्यिरोंग पोर्ट-रसुवागढ़ी सीमा क्रॉसिंग पूरी तरह सुरक्षित नजर आती है। यहां कई इमारतें, एक पुल, सड़कें और अन्य ढांचे नदी के किनारे जंगलों से घिरी हिमालयी पहाड़ियों के बीच दिखाई देते हैं।
हालांकि बाढ़ के बाद की तस्वीरों में हालात पूरी तरह बदले हुए नजर आ रहे हैं। जिसमें सीमा परिसर का लगभग पूरा हिस्सा गायब दिखाई देता है। इसके अलावा नदी का रास्ता भी काफी चौड़ा हो गया है और जहां पहले इमारतें व सड़कें थीं, वहां अब भारी मात्रा में कीचड़ और मलबा जमा है। आसपास की पहाड़ियों पर भी बाढ़ के निशान साफ दिखाई दे रहे हैं और कई हिस्सों से मिट्टी की ऊपरी परत पूरी तरह बह गई है।
‘जहां तक नजर गई, सिर्फ मलबा ही मलबा था’
बाढ़ के बाद राहत और बचाव कार्य शुरू है। इसी बीच 21 सदस्यीय चीनी बचाव दल, एक खोजी कुत्ते के साथ, पहाड़ों और घाटियों को पार करते हुए शुक्रवार को प्रभावित सीमा क्षेत्र तक पहुंचा। बताया जा रहा है कि सड़कें पूरी तरह तबाह हो जाने के कारण टीम को रस्सियों की मदद से जंगलों और खड़ी चट्टानों के बीच से गुजरना पड़ा।
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, बचावकर्मी झोउ मिंगची ने बताया कि वहां पहुंचने के लिए कोई सड़क नहीं बची थी। टीम को घने जंगल और खड़ी चट्टानों के बीच से रास्ता बनाना पड़ा। उन्होंने कहा कि सीमा परिसर में पहुंचने के बाद जहां तक नजर गई, सिर्फ मलबा ही मलबा था।
दोबारा बाढ़ के खतरे से बचाव अभियान रुका
सीमा क्षेत्र तक बचाव दल के पहुंचने के बावजूद शुक्रवार को दोबारा बाढ़ आने के खतरे के कारण अभियान को कुछ समय के लिए रोकना पड़ा। बाढ़ के कारण बनी एक झील का पानी ल्हेंडे खोला और त्रिशूली नदियों में ओवरफ्लो होने लगा। इससे इलाके में अफरातफरी की स्थिति पैदा हो गई और नेपाली अधिकारियों ने लोगों को सतर्क किया।
सुरक्षा को देखते हुए करीब तीन घंटे तक बचाव अभियान स्थगित रहा। इस दौरान चीनी बचावकर्मियों और उनके वाहनों को भी प्रभावित क्षेत्र से पीछे हटना पड़ा। स्थिति सामान्य होने के बाद अभियान दोबारा शुरू किया गया।

