खैरथल-तिजारा जिलेभर के ठेका एवं अस्थाई सफाई कर्मचारियों की हड़ताल बुधवार को आठवें दिन भी जारी रही। सफाई व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतर गई है। शहर के वार्डों, गलियों और मोहल्लों में जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हुए हैं, जिससे आमजन को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बदबू और गंदगी के कारण लोगों में रोष बढ़ता जा रहा है। रैली निकालते हुए कलेक्ट्रेट तक पहुंचे
गुरुवार को वाल्मीकि सेना राजस्थान प्रदेश के नेतृत्व में जिले की विभिन्न निकायों के सफाई कर्मचारियों ने शहर के मुख्य मार्गों से रैली निकालते हुए जिला कलेक्ट्रेट पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन और नगर निकायों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अतिरिक्त जिला कलेक्टर शिवपाल जाट को मांग पत्र सौंपा। सुपरवाइजर पर प्रताड़ना के आरोप
वाल्मीकि सेना प्रमुख अनिल वाल्मीकि ने बताया कि जिले की सभी नगर निकायों में ठेका सफाई कर्मचारियों का लगातार शोषण किया जा रहा है। कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिल रहा, न्यूनतम मजदूरी से वंचित रखा जा रहा है तथा ईपीएफ और ईएसआई जैसी सुविधाओं में भी भारी अनियमितताएं बरती जा रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ठेकेदारों के सुपरवाइजर सफाई कर्मचारियों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करते हैं तथा बार-बार नौकरी से निकालने की धमकी देते हैं। उन्होंने कहा कि निकायों में अधिशासी अधिकारी, आयुक्त, जमादार, एएसआई और सफाई ठेकेदारों की मिलीभगत से भ्रष्टाचार चरम पर पहुंच गया है। संगठन ने जिले की सभी निकायों में कार्यरत ठेका सफाई कर्मचारियों का पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक करने तथा गत वर्ष से अब तक के ईपीएफ और ईएसआई का पूरा ब्योरा जारी करने की मांग की है। अनिल वाल्मीकि ने बताया कि केन्द्र सरकार के नए आदेश के अनुसार 1 अप्रैल 2026 से अकुशल श्रमिक की दैनिक मजदूरी 783 रुपए निर्धारित की गई है, इसलिए सभी सफाई कर्मचारियों को इसी दर से वेतन दिया जाए। साथ ही ठेका प्रथा समाप्त कर कर्मचारियों को संविदा पर नियुक्त किया जाए। एडीएम ने आयुक्त से की वार्ता
धरना प्रदर्शन के दौरान अतिरिक्त जिला कलेक्टर शिवपाल जाट ने कर्मचारियों की समस्याएं सुनते हुए नगर परिषद आयुक्त मुकेश कुमार से वार्ता की। उन्होंने आयुक्त को निर्देश दिए कि ठेकेदारों को बुलाकर शीघ्र वार्ता करें तथा कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान निकालते हुए हड़ताल समाप्त करवाने का प्रयास करें। हड़ताल के चलते नगर परिषद की व्यवस्था प्रभावित हो गई है। सामान्य दिनों में शहर से प्रतिदिन करीब 30 टन कचरा उठाया जाता था, लेकिन वर्तमान में यह आंकड़ा घटकर करीब 20 टन रह गया है। फिलहाल स्थाई कर्मचारियों के माध्यम से केवल मुख्य मार्गों पर सीमित सफाई कार्य कराया जा रहा है। वाल्मीकि सेना पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।


