Why Share Market Fall Today: भारतीय शेयर बाजार में आज शुक्रवार को बड़ी गिरावट देखने को मिली। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक सेंसेक्स आज 593 अंक की गिरावट के साथ 74,309 पर खुला। शुरुआती कारोबार में 9 बजकर 26 मिनट पर यह 0.85 फीसदी या 640 अंक की गिरावट के साथ 74,278 पर ट्रेड करता दिखा। इस समय सेंसेक्स पैक के 30 शेयरों में से 7 शेयर हरे निशान पर और 23 शेयर लाल निशान पर ट्रेड करते दिखे। वहीं, एनएसई का निफ्टी-50 इस समय 0.95 फीसदी या 221 अंक गिरकर 23,256 पर ट्रेड करता दिखा। बाजार में गिरावट सिर्फ बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी जमकर बिकवाली हुई। BSE Midcap 150 और Smallcap 250 इंडेक्स में करीब 1.5% तक की गिरावट देखने को मिली।
कुल मार्केट कैप में आई 6 लाख करोड़ रुपये की गिरावट
शुक्रवार को कारोबार शुरू होते ही बाजार में बिकवाली इतनी तेज रही कि BSE पर लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब 484 लाख करोड़ रुपये से घटकर 478 लाख करोड़ रुपये के आसपास आ गया। यानी कुछ ही मिनटों में निवेशकों की संपत्ति में करीब 6 लाख करोड़ रुपये की कमी आ गई। बाजार की इस कमजोरी के पीछे घरेलू के साथ-साथ वैश्विक कारण भी जिम्मेदार हैं।
सेंसेक्स के शेयरों का हाल

क्यों आई बाजार में गिरावट?
- वैश्विक बाजारों में बिकवाली का दबाव
भारतीय बाजार पर दबाव की एक बड़ी वजह कमजोर वैश्विक संकेत हैं। अमेरिका में महंगाई से जुड़े अहम आंकड़ों के बाद निवेशकों की चिंता बढ़ी है। इसके अलावा अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव भी बाजार के सेंटीमेंट पर भारी पड़ रहा है। अमेरिकी बाजार में गुरुवार को Dow Jones Industrial Average और S&P 500 में करीब 0.6% की गिरावट रही। Nasdaq Composite भी 0.65% नीचे बंद हुआ। MSCI का ग्लोबल स्टॉक्स इंडेक्स भी 0.66% गिरा। एशियाई बाजारों में हालात और कमजोर रहे। बढ़ती बॉन्ड यील्ड और महंगाई दोबारा बढ़ने की आशंका ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। जापान का Nikkei, दक्षिण कोरिया का Kospi और Taiwan Weighted Index करीब 3% तक टूट गए।
- 108 डॉलर के पार पहुंचा क्रूड ऑयल
क्रूड ऑयल में तेजी रुकने का नाम ही नहीं ले रही है। शुक्रवार सुबह ब्रेंट क्रूड 0.42 फीसदी या 0.45 डॉलर की बढ़त के साथ 108.10 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड करता दिखा। वहीं, WTI क्रूड इस समय 0.33 फीसदी या 0.34 डॉलर की बढ़त के साथ 102.80 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड करता दिखा। यमन में हूती विद्रोहियों और सऊदी समर्थित बलों के बीच संघर्ष बढ़ने से तेल सप्लाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ी है। अगर यह तनाव लंबा खिंचता है तो दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी तेल की सप्लाई पर असर पड़ सकता है।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार के मुताबिक मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने से बाजार के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं। अगर कच्चे तेल की कीमत लंबे समय तक ऊंची रहती हैं या इसमें और उछाल आता है, तो भारत की आर्थिक विकास दर और कंपनियों की कमाई पर असर पड़ सकता है।
- अमेरिका में बॉन्ड यील्ड 5% के करीब
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेज उछाल भी दुनिया भर के शेयर बाजारों के लिए चिंता का कारण बन गया है। शुक्रवार को अमेरिका की 10 साल की बॉन्ड यील्ड 4.98% तक पहुंच गई। यानी यह 5% के बेहद करीब है। महंगाई और अमेरिका के बढ़ते कर्ज को लेकर चिंता के बीच बॉन्ड यील्ड ऊपर गई है। निवेशकों को अब डर है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख अपना सकता है। ऊंची बॉन्ड यील्ड की वजह से विदेशी निवेशकों को शेयर बाजार के मुकाबले अमेरिकी बॉन्ड ज्यादा आकर्षक लग सकते हैं। ऐसे में उभरते बाजारों से पैसा निकलने का खतरा बढ़ जाता है। विजयकुमार के अनुसार 10 साल की अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का 5% के करीब पहुंचना वैश्विक शेयर बाजार के लिए बड़ा दबाव है। इससे दुनिया भर के इक्विटी बाजारों में गिरावट का खतरा बढ़ सकता है।
- अमेरिका-ईरान तनाव ने बढ़ाई चिंता
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के बजाय और बढ़ता नजर आ रहा है। इससे बाजार में जल्द समाधान की उम्मीदों को झटका लगा है। रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को कहा कि ईरान के साथ चल रहे युद्ध को लेकर उन्हें पछतावा नहीं है। इस संघर्ष का असर नवंबर में होने वाले अमेरिकी मिडटर्म चुनावों पर भी पड़ सकता है। इधर ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के यमन में Mocha पोर्ट सिटी पर नियंत्रण हासिल करने और लाल सागर की ओर बढ़ने की खबरों ने तेल सप्लाई को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है। अगर तनाव होर्मुज स्ट्रेट से आगे दूसरे इलाकों तक फैलता है, तो वैश्विक तेल सप्लाई पर दबाव और बढ़ सकता है। यही डर बाजार के लिए सबसे बड़ी चिंता बना हुआ है।
- IPO में जा रहा पैसा भी बाजार पर डाल रहा दबाव
घरेलू बाजार में IPO की बढ़ती हलचल भी शेयर बाजार की गिरावट के बीच चर्चा में है। नए आईपीओ में निवेश के लिए बड़ी रकम लग रही है। कई आईपीओ में भारी सब्सक्रिप्शन और लिस्टिंग पर अच्छे मुनाफे की उम्मीद ने निवेशकों को आकर्षित किया है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि आईपीओ में जा रहा बड़ा पैसा सेकेंडरी मार्केट से कुछ हद तक निकल रहा है। इसका असर पहले से दबाव में चल रहे शेयर बाजार पर पड़ रहा है।
(डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी मात्र है। यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर मार्केट/म्यूचुअल फंड में निवेश जोखिम भरा होता है। कहीं भी पैसा लगाने से पहले अपने निवेश सलाहकार से परामर्श लें।)


BREAKING: Saudi Arabia has officially informed OPEC that its crude oil production plummeted to 6.238 million barrels per day, marking the kingdom’s lowest output level since the 1990 Gulf War.