इंग्लैंड की टेस्ट टीम के नए मुख्य कोच स्टीफन फ्लेमिंग ने पद संभालते ही अपना बड़ा लक्ष्य साफ कर दिया है। फ्लेमिंग चाहते हैं कि इंग्लैंड विश्व टेस्ट चैंपियनशिप को जीतने की दिशा में गंभीरता से आगे बढ़े और आने वाले वर्षों में दुनिया की नंबर एक टेस्ट टीम बने। उनका मानना है कि इंग्लैंड के पास इस मुकाम तक पहुंचने की क्षमता है, लेकिन इसके लिए टीम को लंबे समय तक लगातार मेहनत करनी होगी।
श्रीलंका के खिलाफ इंग्लैंड का सीमित ओवरों का अभियान खत्म होने की ओर है। इसी बीच फ्लेमिंग ने अपना ध्यान टेस्ट क्रिकेट की ओर कर लिया है। उन्होंने कहा कि विश्व टेस्ट चैंपियनशिप उनके लक्ष्यों में काफी ऊपर है। उनके मुताबिक अगर यह विश्व क्रिकेट की सबसे बड़ी ट्रॉफियों में से एक है तो इंग्लैंड को इसे जीतने के लिए पूरी कोशिश करनी चाहिए।
फ्लेमिंग ने यह भी माना कि इस लक्ष्य को हासिल करना आसान नहीं होगा। खिलाड़ियों के कार्यभार, टीम के संतुलन और खेल के तरीके पर लगातार काम करना होगा। उन्होंने खास तौर पर ओवर पूरे करने की गति को भी टीम की पहचान और खेलने के अंदाज से जोड़कर देखा। उनका कहना है कि केवल बड़े लक्ष्य तय करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि उसके लिए सही तैयारी और लंबे समय तक एक जैसी मेहनत जरूरी होगी।
फ्लेमिंग का इंग्लैंड के साथ करार 2030 तक है। इतने लंबे समय की जिम्मेदारी मिलने के बाद उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में इंग्लैंड को दुनिया की नंबर एक टीम बनाने की इच्छा भी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि दुनिया की शीर्ष टेस्ट टीम का प्रभारी बनना उनका सपना होगा। फिलहाल ऑस्ट्रेलिया टेस्ट क्रिकेट की दुनिया में नंबर एक स्थान पर है और इंग्लैंड की पुरानी प्रतिद्वंद्विता भी ऑस्ट्रेलिया के साथ रही है।
बता दें कि फ्लेमिंग का टेस्ट क्रिकेट से जुड़ाव नया नहीं है। उनके कोचिंग करियर का बड़ा हिस्सा सीमित ओवरों के क्रिकेट में बीता है, खासकर आईपीएल में चेन्नई सुपर किंग्स के साथ उन्होंने लंबे समय तक काम किया है। फ्रेंचाइजी क्रिकेट में लगातार सफलता हासिल करने के बाद अब वह राष्ट्रीय टीम के साथ लंबे समय तक काम करने को लेकर उत्साहित हैं।
फ्लेमिंग के लिए इंग्लैंड की टेस्ट टीम के साथ काम करने का सबसे खास पहलू खिलाड़ियों के साथ लंबे समय तक संबंध बनाना है। उन्होंने कहा कि फ्रेंचाइजी क्रिकेट में खिलाड़ियों के साथ काम करने का समय सीमित होता है। किसी राष्ट्रीय टीम के साथ महीनों और वर्षों तक काम करने का मौका उन्हें खास तौर पर उत्साहित कर रहा है। उनके मुताबिक इससे खिलाड़ियों को बेहतर तरीके से समझने और टीम को अपनी सोच के मुताबिक तैयार करने में मदद मिलेगी।
गौरतलब है कि इंग्लैंड के नए टेस्ट कोच के तौर पर फ्लेमिंग की पहली बड़ी परीक्षा दक्षिण अफ्रीका के दौरे से होगी। दोनों टीमों के बीच तीन टेस्ट मैचों की सीरीज 17 दिसंबर से शुरू होनी है। विदेशी जमीन पर होने वाली यह सीरीज फ्लेमिंग के लिए टीम की तैयारी, खिलाड़ियों के संयोजन और टेस्ट क्रिकेट में उनकी योजनाओं को परखने का पहला बड़ा मौका होगी।
विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के मौजूदा चक्र में हर टेस्ट का महत्व है। ऐसे में इंग्लैंड को केवल अलग-अलग सीरीज में अच्छा प्रदर्शन करने के बजाय पूरे चक्र में लगातार अंक हासिल करने होंगे। फ्लेमिंग की योजना भी इसी लंबे सफर को ध्यान में रखकर टीम तैयार करने की है। उनका साफ कहना है कि दुनिया की नंबर एक टेस्ट टीम बनना एक बड़ा लक्ष्य है, लेकिन उस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए इंग्लैंड को काफी काम करना बाकी है।

