SRN अस्पताल में मनाया विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस:मानसिक कलंक समाप्त करने की शुरू हुई पहल, 10 नवंबर तक चलेगा अभियान

SRN अस्पताल में मनाया विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस:मानसिक कलंक समाप्त करने की शुरू हुई पहल, 10 नवंबर तक चलेगा अभियान

प्रयागराज के स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल के मानसिक रोग विभाग की ओर से विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने और इससे जुड़े सामाजिक कलंक को समाप्त करने के उद्देश्य से 10 अक्टूबर से 10 नवंबर तक चलने वाले जागरूकता अभियान की भी शुरुआत की गई। ​समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. मोहित जैन उपस्थित रहे। युवाओं में तेजी से बढ़ती मानसिक समस्याओं पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव, नियमित व्यायाम, सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग से बचाव और स्क्रीन टाइम कम करने की आवश्यकता पर जोर दिया। साइकाइट्री विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अभिषेक प्रताप सिंह ने मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं। ​कार्यक्रम के दौरान नर्सिंग कॉलेज और नर्सिंग स्कूल के छात्र-छात्राओं ने नशे की लत तथा प्रसव उपरांत महिलाओं में होने वाली मानसिक समस्याओं जैसे गंभीर विषयों पर प्रभावशाली लघु नाटिका (स्किट) प्रस्तुत की, जिसकी सभी ने सराहना की। 9 और 10 अक्टूबर को आयोजित पोस्टर, क्विज और स्किट प्रतियोगिताओं के विजेता प्रतिभागियों को सर्टिफिकेट व पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। इससे पूर्व 9 अक्टूबर को एमबीबीएस छात्र-छात्राओं के लिए ‘मनोचिकित्सा प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता’ का भी आयोजन किया गया था। कार्यक्रम में स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय की प्रमुख अधीक्षिका डॉ. नीलम सिंह, एएमएस डॉ. जितेंद्र शुक्ला, न्यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. कमलेश कुमार सोनकर, डॉ. रजनीश तिवारी, प्रो. श्याम शर्मा, श्रीमती जया कुमारी जायसवाल, डॉ. संतोष कुमार केशरवानी, डॉ. अनुराग वर्मा, डॉ. शैलेन्द्र कुमार मिश्रा समेत कई वरिष्ठ चिकित्सक व नर्सिंग अधिकारी उपस्थित रहे। डॉक्टरों के मुताबिक भारत में मानसिक विकारों का ‘लाइफटाइम प्रिवलेंस’ 13.7% है, लेकिन जागरूकता की कमी, अंधविश्वास और सामाजिक संकोच के चलते 70% से 92% मरीजों को सही समय पर उपचार नहीं मिल पाता। लोग अक्सर झाड़-फूंक के चक्कर में समय गंवा देते हैं, जिससे बीमारी गंभीर रूप ले लेती है। 10 नवंबर तक चलने वाले इस अभियान के तहत विभिन्न विद्यालयों में तनाव प्रबंधन और बच्चों व किशोरों की मानसिक समस्याओं पर सत्र आयोजित किए जाएंगे। इसके साथ ही मेडिकल कॉलेज, अस्पताल की ओपीडी परिसर में नुक्कड़ नाटकों, भाषणों और जागरूकता बैनरों के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जाएगा।

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