Soumya Ranjan Mahapatra केस: पत्नी बिद्याभारती पांडा को Orissa High Court से राहत नहीं

Soumya Ranjan Mahapatra केस: पत्नी बिद्याभारती पांडा को Orissa High Court से राहत नहीं

ओडिशा उच्च न्यायालय ने सहायक वन संरक्षक दिवंगत सौम्य रंजन महापात्र की पत्नी बिद्याभारती पांडा को उनकी मौत से जुड़े मामले में गिरफ्तारी से अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है। पांडा ने अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई लंबित रहने के दौरान गिरफ्तारी से अंतरिम राहत मांगी थी। महापात्र 12 जुलाई, 2021 को ओडिशा के गजपति जिले के पारलाखेमुंडी स्थित अपने आवास पर झुलस गए थे और अगले दिन उनकी मौत हो गई थी।

इसके बाद पारलाखेमुंडी के उप-मंडलीय न्यायिक मजिस्ट्रेट ने महापात्र के पिता की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 (हत्या) और 120-बी (आपराधिक साजिश) के तहत अपराधों का संज्ञान लिया था। न्यायमूर्ति आदित्य कुमार महापात्र की अवकाशकालीन पीठ ने शुक्रवार को पूजा अवकाश के दौरान पांडा को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। पीठ ने जांच एजेंसी को पांडा की अग्रिम जमानत याचिका के संबंध में केस डायरी पेश करने का निर्देश दिया।

अदालत के अवकाश के बाद दोबारा खुलने पर याचिका पर सुनवाई होगी। उच्च न्यायालय में मंगलवार से नियमित सुनवाई शुरू होने वाली है। ताजा आदेश के बाद पांडा को गिरफ्तारी से कोई अंतरिम संरक्षण नहीं मिला है।

उन्हें 30 अक्टूबर तक पारलाखेमुंडी की अदालत में पेश होने का निर्देश दिया गया है। उच्च न्यायालय ने 30 सितंबर को पेशी की समयसीमा एक अक्टूबर से बढ़ाकर 30 अक्टूबर कर दी थी। इससे पहले उच्चतम न्यायालय ने मजिस्ट्रेट के संज्ञान संबंधी आदेश में हस्तक्षेप करने से उच्च न्यायालय के इनकार को चुनौती देने वाली पांडा की विशेष अनुमति याचिका खारिज कर दी थी।

हालांकि, शीर्ष अदालत ने उन्हें अग्रिम जमानत के लिए आवेदन करने की छूट दी थी। मामले की शुरुआत में अपराध शाखा ने आईपीसी की धारा 285 और 304-ए के तहत जांच की थी। बाद में मजिस्ट्रेट ने महापात्र के पिता की शिकायत के आधार पर हत्या और आपराधिक साजिश जैसे गंभीर आरोपों का संज्ञान लिया।

इस मामले में दो अन्य लोग भी आरोपी हैं। पारलाखेमुंडी के तत्कालीन संभागीय वन अधिकारी संग्राम केशरी बेहेरा ने अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया है, जबकि परिवार के रसोइये मन्मथ कुंभा को गिरफ्तार कर लिया गया है। इस मामले पर पहले टिप्पणी करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता उमेश प्रसाद रथ ने कहा था कि पांडा के पास आगे राहत पाने के लिए सीमित समय है और सक्षम अदालतों के आदेशों के आधार पर तीनों आरोपियों को हिरासत में लिया जा सकता है।

रथ ने कहा, ‘‘वह एक आरोपी हैं और उच्च न्यायालय के अंतरिम आदेश में ऐसा कुछ नहीं है जिसे मामले के गुण-दोष पर निष्कर्ष माना जाए।’’

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