प्रसिद्ध भारतीय इंजीनियर, प्रर्वतक और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक 01 सितंबर को अपा 60वां जन्मदिन मना रहे हैं। वांगचुक लद्दाख में शिक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने का काम करते हैं। वहीं समाज और पर्यावरण के कार्यों के लिए साल 2018 में सोनम वांगचुक को प्रतिष्ठित रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। तो आइए जानते हैं उनके जन्मदिन के मौके पर सोनम वांगचुक के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में…
जन्म और शिक्षा
लद्दाख के छोटे से गांव उलेटोकपो में 01 सितंबर 1966 को सोनम वांगचुक का जन्म हुआ था। उनका बचपन काफी चुनौतियों से भरा था। उस दौरान उनके गांव में आधुनिक तकनीक सुविधा मौजूद नहीं थी। जिस वजह से वह 9 साल की उम्र तक पढ़ाई नहीं कर सके। बाद में वह श्रीनगर गए, लेकिन यहां भी उऩको पढ़ाई के दौरान समस्याओं का सामना करना पड़ा।
क्योंकि उनको इंग्लिश और हिंदी दोनों भाषाओं में दिक्कत थी। लेकिन इसके बाद उन्होंने अपनी पढ़ाई को जारी रखा। सोनम वांगचुक ने श्रीनगर के नेशनल इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। वह अपनी पढ़ाई का खर्चा ट्यूशन पढ़ाकर निकालते थे।
लद्दाख में शिक्षा सुधार और इनोवेशन
साल 1988 में उन्होंने स्टूडेंट एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख की स्थापना की। इस संस्था को शुरू करने का मकसद लद्दाख के बच्चों को उनकी भाषा और संस्कृति के हिसाब से शिक्षा देना था। बाद में सोनम वांगचुक ने हिमालयन इंस्टीट्यूट आफ अल्टरनेटिव्स लद्दाख बनाया। इसको वैकल्पिक शिक्षा और रिसर्च का बड़ा केंद्र माना जाता है।
सोनम वांगचुक के इनोवेशन की सबसे बड़ी मिसाल की आइस स्टूपा तकनीक यानी कृत्रिम ग्लेशियर है। इस तकनीक की मदद से पानी की समस्या को काफी हद तक सुलझाया गया। सोनम के इस काम ने उनको अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।
थ्री इडियट्स फिल्म
माना जाता है कि फिल्म 3 इडियट्स का किरदार फुंसुख वांगड़ू, सोनम वांगचुक से प्रेरित है। इस फिल्म में जिस तरह से एक वैज्ञानिक शिक्षा और इनोवेशन का नजरिया दिखाया गया है। असल जिंदगी में वह काम सोनम वांगचुक कर रहे हैं। जिस कारण वह युवाओं के बीच काफी पॉपुलर हैं।

