‘ठेकेदार के कहने पर ग्रिल उठा रहा था बेटा’:बेगूसराय में छात्र की मौत पर पिता का दावा, कहा- मौत से पहले बेटे ने बताया था सच

‘ठेकेदार के कहने पर ग्रिल उठा रहा था बेटा’:बेगूसराय में छात्र की मौत पर पिता का दावा, कहा- मौत से पहले बेटे ने बताया था सच

‘स्कूल कैंपस में लाइब्रेरी के लिए कमरा बन रहा था। इसके लिए क्लासरूम में ही लोहे का ग्रिल लगा था। काम करा रहे ठेकेदार सोनू ने ग्रिल को उठाने के लिए मेरे बेटे समेत अन्य छात्रों को बुलाया था। जब मेरा बेटा और अन्य छात्र ग्रिल उठा रहे थे, तभी 300 वजन का ग्रिल मेरे बेटे के ऊपर गिर गया था। गंभीर रूप से घायल मेरे बेटे को जब अस्पताल ले जाया जा रहा था, तब उसने ठेकेदार का नाम बताया था।’ बेगूसराय के बछवाड़ा प्रखंड के अरवा गांव के रहने वाले फूलो यादव ने ये दावा किया है। दरअसल, जहानपुर उत्क्रमित उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में 6 मई को ग्रिल से दबकर 11 साल के विवान राज उर्फ मुन्ना की मौत हो गई थी। घटना के दिन 6 घंटे तक हंगामा चला था। घटना वाले दिन विवान के पिता फूलो यादव ने कहा था कि क्लास रूम में ग्रिल से दबकर मेरे बच्चे की मौत हुई है, लेकिन अब पिता का बयान बदल गया है। सबसे पहले घटना से जुड़ी 2 तस्वीरें देखिए अब सिलसिलेवार तरीके से जानिए पूरा मामला दरअसल, छठी क्लास का छात्र विवान घटना वाले दिन रोजाना की तरह सुबह 6 बजे स्कूल गया था। करीब तीन घंटे बाद यानी 9 बजे के आसपास खिड़की में लगाए जाने वाले लोहे के ग्रिल से दबकर विवान की मौत की सूचना आई। मौत की सूचना मिलते ही विवान के परिजन और गांव के लोग आक्रोशित हो गए। अरवा में विवान के शव को घर के पास बछवाड़ा-समसा-मंसूरचक सड़क को जाम कर दिया। करीब 500 से भी अधिक लोग स्कूल पर पहुंचकर हंगामा करने लगे। इस दौरान विद्यालय प्रभारी हेडमास्टर अमित कुमार और कंप्यूटर टीचर अविनाश कुमार ग्रामीण के हत्थे चढ़ गए, जबकि अन्य शिक्षक फरार हो गए थे। प्रभारी प्रधानाध्यापक की जमकर पिटाई कर दी। घटना की सूचना मिलते ही बछवाड़ा थाना की पुलिस मौके पर पहुंची तो ग्रामीण और उग्र हो गए। इसके बाद बछवाड़ा के साथ-साथ मंसूरचक्र भगवानपुर थाना की पुलिस मौके पर पहुंची। हेडमास्टर को ग्रामीणों के चंगुल छुड़ाया। घटना की सूचना मिलते ही तेघड़ा एसडीओ राकेश कुमार और डीएसपी कृष्ण कुमार मौके पर पहुंचे थे। प्रथमदृष्टया दोषी मानकर एसडीओ ने प्रभारी हेडमास्टर को सस्पेंड कर दिया था डीएम श्रीकांत शास्त्री ने कहा था कि प्रथम दृष्टया एसडीओ की जांच में प्रधानाध्यापक को दोषी पाकर सस्पेंड कर दिया गया है। इसके बाद करीब 6 घंटे तक चले हंगामा के बाद परिजनों को विद्यालय एवं आपदा कोष से सरकारी मुआवजा दिलाने के आश्वासन पर लोग शांत हुए और लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया था। उस समय पिता फूलो यादव ने बताया था कि सुबह 6:30 बजे मुन्ना स्कूल गया था। जहां वह क्लास में था, इसी क्लास में 7-8 ग्रिल एक साथ करके रखा हुआ था। जो ग्रिल मेरे बेटे के सिर पर गिर गया, जिसमें सिर फट गया और सभी शिक्षक भाग गए। मेरे बेटा को इस रूम में बंद कर दिया‌‌। स्कूल से बच्चा सब आया तो जानकारी दिया। हम दौड़ कर गए तब तक उसे उठाकर अस्पताल ले गए, लेकिन उससे पहले ही मौत हो चुकी थी। जिस क्लासरूम में मेरा बेटा पढ़ता था, उसे बंद करके शिक्षक भाग गए। जैसे चोट लगा और डॉक्टर के पास ले जाते तो मेरा बेटा बच जाता। लेकिन एक डेढ़ घंटा रूम में ही पड़ा रह गया। छठी क्लास में पढ़ता था, सात भाई-बहनों में वह सबसे छोटा था। अब जानिए FIR में क्या कहा गया है बछवाड़ा थाना में दर्ज कराए गए FIR में फूलो यादव ने कहा है कि मेरा बेटा विवान राज रोज की तरह 6 मई को पढ़ने के लिए स्कूल गया था। स्कूल परिसर में प्रयोगशाला का निर्माण चल रहा है। प्रयोगशाला में ही लोहे का ग्रिल रखा हुआ था। करीब 9:30 बजे ठेकेदार सोनू कुमार आया और बच्चों से ग्रिल उठकर बाहर लाने के लिए कहा। मौके पर मौजूद सभी बच्चे भाग गए, लेकिन मेरे बेटे ने ग्रिल उठाने का प्रयास किया। इस दौरान ग्रिल उसके सिर पर गिर गया तो सिर फट गया। आंख बाहर निकलने और अत्यधिक खून गिर जाने से वो बेहोश होकर गिर गया। उन्होंने बताया कि घटना के बाद ठेकेदार मौके पर से भाग गया और ग्रामीणों की भीड़ स्कूल परिसर में जुट गई। हमारे परिवार के बच्चे ने आकर सूचना दी, तो हम भी मौके पर पहुंचे तो देखा कि मेरा बेटा लोहे के ग्रिल के नीचे दबा हुआ है। ग्रामीणों के सहयोग से उसे लेकर बछवाड़ा पीएचसी जा रहे थे, तो रास्ते में विवान ने बताया कि ठेकेदार सोनू कुमार ने ग्रिल उठाने को कहा था। इसी दौरान घटना हो गई। हम जब बच्चे को लेकर डॉक्टर के पास पहुंचे तो डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया। घटना के दिन दिए गए बयान और प्राथमिकी में अंतर पाए जाने पर दैनिक भास्कर फूलो यादव के घर पहुंचा तो उन्होंने ऑन कैमरा कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया। ऑफ द कैमरा बताया कि 7 मई को गांव के लोग जुटे थे। इसी दौरान शिक्षक की ओर से 6 लाख रुपया दिया गया‌। हमसे आवेदन पर हस्ताक्षर करवाया गया था। गांव के लोगों और जिस समाज पर विश्वास किया, उसने मेरे साथ धोखा किया है। उस दिन 6 लाख मिलने के बाद शनिवार को फिर शिक्षकों की ओर से 2 लाख 68 हजार रुपया दिया गया है। ‘स्कूल कैंपस में लाइब्रेरी के लिए कमरा बन रहा था। इसके लिए क्लासरूम में ही लोहे का ग्रिल लगा था। काम करा रहे ठेकेदार सोनू ने ग्रिल को उठाने के लिए मेरे बेटे समेत अन्य छात्रों को बुलाया था। जब मेरा बेटा और अन्य छात्र ग्रिल उठा रहे थे, तभी 300 वजन का ग्रिल मेरे बेटे के ऊपर गिर गया था। गंभीर रूप से घायल मेरे बेटे को जब अस्पताल ले जाया जा रहा था, तब उसने ठेकेदार का नाम बताया था।’ बेगूसराय के बछवाड़ा प्रखंड के अरवा गांव के रहने वाले फूलो यादव ने ये दावा किया है। दरअसल, जहानपुर उत्क्रमित उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में 6 मई को ग्रिल से दबकर 11 साल के विवान राज उर्फ मुन्ना की मौत हो गई थी। घटना के दिन 6 घंटे तक हंगामा चला था। घटना वाले दिन विवान के पिता फूलो यादव ने कहा था कि क्लास रूम में ग्रिल से दबकर मेरे बच्चे की मौत हुई है, लेकिन अब पिता का बयान बदल गया है। सबसे पहले घटना से जुड़ी 2 तस्वीरें देखिए अब सिलसिलेवार तरीके से जानिए पूरा मामला दरअसल, छठी क्लास का छात्र विवान घटना वाले दिन रोजाना की तरह सुबह 6 बजे स्कूल गया था। करीब तीन घंटे बाद यानी 9 बजे के आसपास खिड़की में लगाए जाने वाले लोहे के ग्रिल से दबकर विवान की मौत की सूचना आई। मौत की सूचना मिलते ही विवान के परिजन और गांव के लोग आक्रोशित हो गए। अरवा में विवान के शव को घर के पास बछवाड़ा-समसा-मंसूरचक सड़क को जाम कर दिया। करीब 500 से भी अधिक लोग स्कूल पर पहुंचकर हंगामा करने लगे। इस दौरान विद्यालय प्रभारी हेडमास्टर अमित कुमार और कंप्यूटर टीचर अविनाश कुमार ग्रामीण के हत्थे चढ़ गए, जबकि अन्य शिक्षक फरार हो गए थे। प्रभारी प्रधानाध्यापक की जमकर पिटाई कर दी। घटना की सूचना मिलते ही बछवाड़ा थाना की पुलिस मौके पर पहुंची तो ग्रामीण और उग्र हो गए। इसके बाद बछवाड़ा के साथ-साथ मंसूरचक्र भगवानपुर थाना की पुलिस मौके पर पहुंची। हेडमास्टर को ग्रामीणों के चंगुल छुड़ाया। घटना की सूचना मिलते ही तेघड़ा एसडीओ राकेश कुमार और डीएसपी कृष्ण कुमार मौके पर पहुंचे थे। प्रथमदृष्टया दोषी मानकर एसडीओ ने प्रभारी हेडमास्टर को सस्पेंड कर दिया था डीएम श्रीकांत शास्त्री ने कहा था कि प्रथम दृष्टया एसडीओ की जांच में प्रधानाध्यापक को दोषी पाकर सस्पेंड कर दिया गया है। इसके बाद करीब 6 घंटे तक चले हंगामा के बाद परिजनों को विद्यालय एवं आपदा कोष से सरकारी मुआवजा दिलाने के आश्वासन पर लोग शांत हुए और लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया था। उस समय पिता फूलो यादव ने बताया था कि सुबह 6:30 बजे मुन्ना स्कूल गया था। जहां वह क्लास में था, इसी क्लास में 7-8 ग्रिल एक साथ करके रखा हुआ था। जो ग्रिल मेरे बेटे के सिर पर गिर गया, जिसमें सिर फट गया और सभी शिक्षक भाग गए। मेरे बेटा को इस रूम में बंद कर दिया‌‌। स्कूल से बच्चा सब आया तो जानकारी दिया। हम दौड़ कर गए तब तक उसे उठाकर अस्पताल ले गए, लेकिन उससे पहले ही मौत हो चुकी थी। जिस क्लासरूम में मेरा बेटा पढ़ता था, उसे बंद करके शिक्षक भाग गए। जैसे चोट लगा और डॉक्टर के पास ले जाते तो मेरा बेटा बच जाता। लेकिन एक डेढ़ घंटा रूम में ही पड़ा रह गया। छठी क्लास में पढ़ता था, सात भाई-बहनों में वह सबसे छोटा था। अब जानिए FIR में क्या कहा गया है बछवाड़ा थाना में दर्ज कराए गए FIR में फूलो यादव ने कहा है कि मेरा बेटा विवान राज रोज की तरह 6 मई को पढ़ने के लिए स्कूल गया था। स्कूल परिसर में प्रयोगशाला का निर्माण चल रहा है। प्रयोगशाला में ही लोहे का ग्रिल रखा हुआ था। करीब 9:30 बजे ठेकेदार सोनू कुमार आया और बच्चों से ग्रिल उठकर बाहर लाने के लिए कहा। मौके पर मौजूद सभी बच्चे भाग गए, लेकिन मेरे बेटे ने ग्रिल उठाने का प्रयास किया। इस दौरान ग्रिल उसके सिर पर गिर गया तो सिर फट गया। आंख बाहर निकलने और अत्यधिक खून गिर जाने से वो बेहोश होकर गिर गया। उन्होंने बताया कि घटना के बाद ठेकेदार मौके पर से भाग गया और ग्रामीणों की भीड़ स्कूल परिसर में जुट गई। हमारे परिवार के बच्चे ने आकर सूचना दी, तो हम भी मौके पर पहुंचे तो देखा कि मेरा बेटा लोहे के ग्रिल के नीचे दबा हुआ है। ग्रामीणों के सहयोग से उसे लेकर बछवाड़ा पीएचसी जा रहे थे, तो रास्ते में विवान ने बताया कि ठेकेदार सोनू कुमार ने ग्रिल उठाने को कहा था। इसी दौरान घटना हो गई। हम जब बच्चे को लेकर डॉक्टर के पास पहुंचे तो डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया। घटना के दिन दिए गए बयान और प्राथमिकी में अंतर पाए जाने पर दैनिक भास्कर फूलो यादव के घर पहुंचा तो उन्होंने ऑन कैमरा कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया। ऑफ द कैमरा बताया कि 7 मई को गांव के लोग जुटे थे। इसी दौरान शिक्षक की ओर से 6 लाख रुपया दिया गया‌। हमसे आवेदन पर हस्ताक्षर करवाया गया था। गांव के लोगों और जिस समाज पर विश्वास किया, उसने मेरे साथ धोखा किया है। उस दिन 6 लाख मिलने के बाद शनिवार को फिर शिक्षकों की ओर से 2 लाख 68 हजार रुपया दिया गया है।  

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