सरहद की सुरक्षा के लिए बंदूक थामने वाले हाथ जब मिट्टी में पसीना बहाते हैं, तो वह सोना उगलने लगती है। सुजाखेड़ा के पूर्व सैनिक गोपाल जाट ने इस कहावत को हकीकत में बदल दिया है।
साल 2014 में सीमा सुरक्षा बल (BSF) से वीआरएस लेकर लौटे गोपाल ने खेती को सिर्फ आजीविका नहीं, बल्कि एक मुनाफे वाला ‘बिजनेस मॉडल’ बना दिया है। आज उनकी सफलता की गूंज दिल्ली से लेकर यूरोप तक है।
सफर: फौजी के अनुशासन से ‘एग्री-प्रेन्योर’ तक
गोपाल जाट की सफलता रातों-रात नहीं आई। उन्होंने पारंपरिक खेती की पुरानी लकीर छोड़कर चरणबद्ध तरीके से तकनीक को अपनाया।
- 2016-18: डेयरी क्षेत्र में कदम रखा, दुग्ध समिति बनाई और सरस डेयरी बीएमसी स्थापित की।
- 2020: ₹18.48 लाख की लागत से पहला पॉलीहाउस लगाया।
- 2023-24: शेड नेट हाउस और आधुनिक फॉर्म पोंड से खेती को ‘हाई-टेक’ बनाया।
सफलता का गणित: महज 4 बीघा में ₹8 लाख का शुद्ध मुनाफा
गोपाल ने सरकारी योजनाओं का ऐसा सटीक उपयोग किया कि लागत कम और मुनाफा बढ़ता गया। वर्तमान में वे हाई-टेक फार्मिंग से शानदार कमाई कर रहे हैं।
इन्वेस्टमेंट और सब्सिडी का ‘पावर गेम’
| प्रोजेक्ट / संसाधन | साल | कुल लागत | सरकारी मदद (सब्सिडी) | मुख्य उत्पादन |
|---|---|---|---|---|
| पॉलीहाउस-1 | 2020 | ₹18.48 लाख | ₹12 लाख | खीरा व रंगीन शिमला मिर्च |
| पॉलीहाउस-2 | 2022 | ₹22.00 लाख | ₹12 लाख | प्रीमियम सब्जियां |
| शेड नेट हाउस | 2023 | ₹29.00 लाख | ₹27 लाख | नियंत्रित वातावरण खेती |
| फॉर्म पोंड | 2023 | ₹2.70 लाख | ₹1.35 लाख | जल संचय व सिंचाई |
| वर्मी कंपोस्ट | 2024 | ₹1.00 लाख | ₹50 हजार | जैविक खाद उत्पादन |
डेनमार्क से सीखा ‘प्रिसिजन फार्मिंग’ का मंत्र
गोपाल जाट की प्रतिभा देख राजस्थान सरकार ने उन्हें अक्टूबर 2025 में डेनमार्क (यूरोप) के अध्ययन दौरे पर भेजा। गोपाल बताते हैं, डेनमार्क में मैंने देखा कि कैसे सेंसर आधारित तकनीक से पौधों को सटीक पोषण दिया जाता है। वहां का वेस्ट मैनेजमेंट अद्भुत है। अब मैं वही मॉडल अपने गांव में लागू कर रहा हूं।
“उपलब्धियां: दिल्ली परेड में विशेष मेहमान बने
गणतंत्र दिवस (2024): केंद्र सरकार के विशेष आमंत्रण पर दिल्ली कर्तव्य पथ पर परेड के साक्षी बने।
जिला पुरस्कार: ‘आत्मा’ योजना के तहत ₹25,000 के पुरस्कार से सम्मानित।
विशेषज्ञ की राय
गोपाल जाट ने साबित किया है कि तकनीक और सरकारी योजनाओं के तालमेल से खेती का जोखिम खत्म कर मुनाफा कई गुना बढ़ाया जा सकता है।
डॉ. शंकर लाल जाट, जॉइंट डायरेक्टर (हॉर्टिकल्चर), चित्तौड़गढ़
गोपाल के तीन ‘सक्सेस टिप्स’
- ड्रिप इरिगेशन: पानी की हर बूंद का हिसाब रखें, इससे पैदावार बढ़ती है।
- मल्चिंग तकनीक: खरपतवार पर लगाम लगाएं और मिट्टी की नमी बरकरार रखें।
- वर्मी कंपोस्ट: रासायनिक खाद पर निर्भरता खत्म करें, मिट्टी की सेहत सुधारें।


