Shiksha Mitra: मानदेय में ऐतिहासिक बढ़ोतरी: शिक्षामित्र और अनुदेशक हुए मालामाल, योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला

Shiksha Mitra: मानदेय में ऐतिहासिक बढ़ोतरी: शिक्षामित्र और अनुदेशक हुए मालामाल, योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला

Shiksha Mitra UP Cabinet Decision: उत्तर प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और शिक्षा कर्मियों को आर्थिक राहत देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। सरकार ने शिक्षामित्रों और अंशकालिक अनुदेशकों के मानदेय में ऐतिहासिक वृद्धि को मंजूरी दे दी है। इस फैसले से प्रदेश के लाखों शिक्षा कर्मियों को सीधा लाभ मिलेगा और शिक्षा क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद बढ़ गई है।

शिक्षामित्रों के मानदेय में बड़ा इजाफा

कैबिनेट के फैसले के अनुसार, वर्ष 2017 से ₹10,000 प्रतिमाह मानदेय प्राप्त कर रहे शिक्षामित्रों का मानदेय अब बढ़ाकर ₹18,000 कर दिया गया है। यह वृद्धि लंबे समय से की जा रही मांग को ध्यान में रखते हुए की गई है। सरकार का मानना है कि इससे शिक्षामित्रों के जीवन स्तर में सुधार होगा और वे अधिक समर्पण के साथ अपने कार्यों को निभा सकेंगे।

अनुदेशकों को भी बड़ी राहत

इसी प्रकार अंशकालिक अनुदेशकों के मानदेय में भी उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। वर्ष 2017 में निर्धारित ₹9,000 मानदेय को बढ़ाकर अब ₹17,000 प्रतिमाह कर दिया गया है। यह निर्णय भी शिक्षा क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों के हित में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

1 अप्रैल से लागू होगा नया मानदेय

सरकार ने स्पष्ट किया है कि बढ़ा हुआ मानदेय 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगा। मई माह में दिए जाने वाले भुगतान में यह वृद्धि शामिल की जाएगी, जिससे कर्मचारियों को जल्द ही इसका लाभ मिल सकेगा।

सरकार पर बढ़ेगा व्यय भार

इस निर्णय से प्रदेश सरकार पर कुल 1475.27 करोड़ रुपए से अधिक का अतिरिक्त व्यय भार आने का अनुमान है। इसके बावजूद सरकार ने शिक्षा कर्मियों के हितों को प्राथमिकता देते हुए यह फैसला लिया है।

कैबिनेट मंजूरी से लाखों को राहत

1.43 लाख शिक्षामित्रों को लाभ

बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के अनुसार, प्रदेश में वर्तमान में 1,42,929 शिक्षामित्र कार्यरत हैं। इनमें से 1,29,332 शिक्षामित्रों का मानदेय अब तक समग्र शिक्षा अभियान के तहत केंद्र और राज्य के बीच 60:40 अनुपात में वहन किया जाता था। सरकार इस संबंध में केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजेगी। यदि केंद्र से अनुमोदन नहीं मिलता है, तो राज्य सरकार स्वयं ही बढ़े हुए मानदेय का अतिरिक्त व्यय वहन करेगी।

राज्य सरकार उठाएगी अतिरिक्त भार

शेष 13,597 शिक्षामित्र ऐसे हैं, जिनका पूरा मानदेय राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाता है। इनके लिए ₹119.65 करोड़ का अतिरिक्त भार भी सरकार उठाएगी। इसके अलावा, केंद्रांश के अनुमोदन न मिलने की स्थिति में ₹1138.12 करोड़ का अतिरिक्त खर्च भी राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।

25 हजार अनुदेशकों को मिलेगा लाभ

प्रदेश के 13,769 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 24,717 अंशकालिक अनुदेशक कार्यरत हैं। इस निर्णय से इन सभी को सीधा लाभ मिलेगा। सरकार पर इन अनुदेशकों के मानदेय में वृद्धि से ₹217.50 करोड़ का अतिरिक्त व्यय भार आएगा।

शिक्षा व्यवस्था को मिलेगा बल

सूत्रों  का मानना है कि इस निर्णय से शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव आएगा। आर्थिक रूप से सशक्त होने पर शिक्षामित्र और अनुदेशक अपने कार्यों को अधिक प्रभावी ढंग से कर पाएंगे।

लंबे समय से थी मांग

शिक्षामित्र और अनुदेशक लंबे समय से मानदेय बढ़ाने की मांग कर रहे थे। कई बार उन्होंने प्रदर्शन और आंदोलन भी किए थे। ऐसे में सरकार का यह निर्णय उनके लिए बड़ी राहत लेकर आया है।

सरकार की प्राथमिकता में शिक्षा

सरकार ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि शिक्षा और शिक्षा कर्मियों का कल्याण उसकी प्राथमिकताओं में शामिल है। यह निर्णय इसी दिशा में एक बड़ा कदम है।

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