Shaurya Path: Rudra और Prachand को स्वदेशी 20mm Aviation Gun से लैस करेगा India, China और Pakistan चिंतित

Shaurya Path: Rudra और Prachand को स्वदेशी 20mm Aviation Gun से लैस करेगा India, China और Pakistan चिंतित

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आत्मनिर्भर भारत का संकल्प अब रक्षा क्षेत्र में भी तेजी से जमीन पर उतर रहा है। भारत अपने लड़ाकू हेलिकॉप्टरों रुद्र और प्रचंड को स्वदेशी हथियारों से लैस करने की दिशा में बड़ा कदम उठा रहा है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने भारतीय कंपनियों SSS Defence और कल्याणी ग्रुप को इन हेलिकॉप्टरों के लिए स्वदेशी 20mm तोप और बुर्ज सिस्टम विकसित करने के लिए शॉर्टलिस्ट किया है। यह भारत में अपनी तरह की पहली पहल है, जिसका मकसद विदेशी हथियारों पर निर्भरता घटाना और देश की अपनी ताकत बढ़ाना है। प्रधानमंत्री मोदी की अगुवाई में भारत ऐसी रक्षा क्षमता तैयार करने में जुटा है, जिससे देश की सीमाओं पर आंख उठाने से पहले दुश्मनों को सौ बार सोचना पड़े। संदेश साफ है कि भारत शांति चाहता है, लेकिन उसकी सुरक्षा और संप्रभुता को चुनौती देने वालों को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए देश अपनी सैन्य ताकत और आत्मनिर्भरता लगातार बढ़ा रहा है।

देखा जाये तो यह महज एक तोप बनाने की परियोजना नहीं, बल्कि उस सामरिक सोच का हिस्सा है जिसमें भारत अपने हथियारों की आपूर्ति, रखरखाव और भविष्य के आधुनिकीकरण पर अधिक नियंत्रण हासिल करना चाहता है। युद्ध की स्थिति में किसी विदेशी कंपनी की मंजूरी, कलपुर्जों की उपलब्धता या अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति शृंखला में बाधा भारत की सैन्य तैयारियों को प्रभावित न कर सके, यही आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन की असली ताकत है।

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दो साल में विकास का लक्ष्य, दो कंपनियों के बीच बंटेगा उत्पादन

हम आपको बता दें कि स्वदेशी 20mm गन और बुर्ज प्रणाली के विकास चरण में लगभग दो साल लगने का अनुमान है। इसके बाद निर्धारित परीक्षण और स्वीकृति प्रक्रियाओं के पूरा होने पर उत्पादन के ऑर्डर दिए जाएंगे। परियोजना के लिए ARDE और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के बीच पिछले वर्ष ही समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए थे। उत्पादन का काम दोनों चयनित कंपनियों के बीच लागत के आधार पर बांटा जाएगा। सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी को 60 प्रतिशत और दूसरी कंपनी को 40 प्रतिशत ऑर्डर मिलेगा। इस व्यवस्था से उत्पादन क्षमता विकसित करने के साथ प्रतिस्पर्धा बनाए रखने और एक से अधिक घरेलू औद्योगिक साझेदार तैयार करने का अवसर मिलेगा।

रुद्र और प्रचंड की मारक क्षमता को मिलेगा स्वदेशी आधार

हम आपको बता दें कि HAL का एडवांस्ड लाइट हेलिकॉप्टर मार्क-IV यानी रुद्र और लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर प्रचंड भारतीय सेना की हवाई युद्ध क्षमता के अहम प्लेटफॉर्म हैं। दोनों हेलिकॉप्टर जमीन पर मौजूद दुश्मन के ठिकानों को निशाना बनाने और युद्ध क्षेत्र में अपने सैनिकों को हवाई सहायता देने के लिए तैयार किए गए हैं। रुद्र 20mm बुर्ज गन, 70mm रॉकेट पॉड और मिसाइलों से लैस हो सकता है। वहीं, प्रचंड की हथियार प्रणाली में 20mm तोप, रॉकेट और टैंक रोधी निर्देशित मिसाइलें शामिल हैं। भारतीय सेना प्रचंड की बुर्ज गन से दिन और रात में फायरिंग परीक्षण भी कर चुकी है।

देखा जाये तो इन हेलिकॉप्टरों में स्वदेशी तोप प्रणाली का सफल एकीकरण होने पर हथियारों की उपलब्धता और भविष्य में उनके उन्नयन पर घरेलू नियंत्रण बढ़ सकता है। विशेष रूप से कठिन पहाड़ी इलाकों और सीमावर्ती क्षेत्रों में अभियान चलाने के दौरान यह क्षमता महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

विदेशी निर्भरता पर प्रहार, लेकिन मौजूदा आपूर्ति जारी

हम आपको बता दें कि फिलहाल प्रचंड में यूरोपीय रक्षा कंपनी KNDS की THL20 बुर्ज गन का इस्तेमाल किया जाता है। कंपनी ने सितंबर में भारत के नए प्रचंड बेड़े के लिए 126 नई 20mm THL20 बुर्ज प्रणालियां उपलब्ध कराने की घोषणा की थी। इससे पहले वह भारतीय वायुसेना के एडवांस्ड लाइट हेलिकॉप्टरों के लिए 136 THL20 बुर्ज प्रणालियां भी दे चुकी है। इसलिए स्वदेशी परियोजना का अर्थ मौजूदा विदेशी प्रणालियों को तत्काल हटाना नहीं है। इसका रणनीतिक उद्देश्य भविष्य में एक घरेलू विकल्प तैयार करना है, ताकि भारतीय सशस्त्र बलों के पास खरीद, रखरखाव और आधुनिकीकरण के लिए अधिक विकल्प हों। स्वदेशी विकल्प सफल होने पर विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर दीर्घकालिक निर्भरता कम करने और रक्षा उत्पादन में देश की तकनीकी क्षमता बढ़ाने का रास्ता खुलेगा।

मिसाइलों से रॉकेट तक, आत्मनिर्भरता का व्यापक अभियान

देखा जाये तो तोप के साथ-साथ भारत हेलिकॉप्टरों के दूसरे हथियारों का भी स्वदेशीकरण कर रहा है। नाग मिसाइल कार्यक्रम से विकसित HELINA और ध्रुवास्त्र टैंक रोधी निर्देशित मिसाइलें थलसेना और वायुसेना के हेलिकॉप्टर अभियानों के लिए बनाई गई हैं। हम आपको याद दिला दें कि जून में भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) को HAL से HELINA लॉन्चरों और उनसे जुड़ी लाइन-रिप्लेसेबल यूनिट्स की आपूर्ति के लिए 1,109.37 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिला था। इसके अतिरिक्त काउंटरमेजर डिस्पेंसिंग सिस्टम की लाइन-रिप्लेसेबल यूनिट्स के लिए 238.34 करोड़ रुपये का अलग अनुबंध दिया गया। इन अनुबंधों को 24 से 60 महीने की अवधि में पूरा किया जाना है। काउंटरमेजर प्रणाली का काम दुश्मन की कुछ मिसाइलों के खतरे से बचाव में सहायता करना है।

इसी क्रम में भारत 70mm रॉकेटों का घरेलू उत्पादन शुरू करने की तैयारी कर रहा है। कल्याणी स्ट्रैटेजिक सिस्टम्स और थेल्स बेल्जियम के बीच सितंबर में घोषित सहयोग समझौते के तहत थेल्स की तकनीकी विशेषज्ञता और कल्याणी की विनिर्माण तथा परीक्षण सुविधाओं का इस्तेमाल किया जाएगा। भारत में निर्मित पहला पूरी तरह असेंबल किया गया रॉकेट 2027 की शुरुआत में तैयार होने की उम्मीद है। ये रॉकेट विमान, जमीन आधारित प्लेटफॉर्म और नौसैनिक प्रणालियों से दागे जा सकते हैं।

रणनीतिक संदेश साफ: हथियारों के मामले में भारत अपने पैरों पर खड़ा होना चाहता है

देखा जाये तो इन परियोजनाओं का सबसे बड़ा महत्व यह है कि भारत लड़ाकू प्लेटफॉर्म के साथ उसके हथियारों, सहायक प्रणालियों और कलपुर्जों के घरेलू उत्पादन का आधार मजबूत कर रहा है। इससे रक्षा उद्योग में तकनीकी विशेषज्ञता, विनिर्माण क्षमता और आपूर्ति शृंखला विकसित होने की संभावना है। साथ ही, सेना और वायुसेना की जरूरतों के अनुरूप हथियारों में सुधार करने की घरेलू क्षमता भी बढ़ सकती है।

बहरहाल, भारत अब केवल हथियार खरीदने वाला देश बने रहने के बजाय उन्हें डिजाइन करने, विकसित करने और बड़े पैमाने पर बनाने की क्षमता हासिल करने की ओर बढ़ रहा है। यही बदलाव आने वाले वर्षों में हमारी सामरिक स्वतंत्रता और रक्षा शक्ति को नई ऊंचाई दे सकता है।

-नीरज कुमार दुबे

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