बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने अनिवार्य नवीनीकरण शुल्क का भुगतान नहीं करने वाले 25 शोध विश्लेषकों के पंजीकरण प्रमाणपत्र रद्द कर दिए हैं। इनमें कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग भी शामिल है। यह कार्रवाई सेबी के मध्यस्थ विनियमन, 2008 के तहत की गई।
संबंधित संस्थाओं ने नोटिस जारी किए जाने के बावजूद अपने पंजीकरण का नवीनीकरण नहीं कराया था। सेबी ने बृहस्पतिवार को पारित आदेश में जिन संस्थाओं के पंजीकरण रद्द किए, उनमें फाइनेंशियल लीडर एडवाइजरी सर्विसेज, फिनक्वेस्ट सिक्योरिटीज, शेयरवेल्थ सिक्योरिटीज, झवेरी सिक्योरिटीज, अजय गुप्ता, अनुराग जैन, शियान कैपिटल और दीपेश मेहता शामिल हैं। नियामक के नियमों के अनुसार, पंजीकृत शोध विश्लेषक को अपना प्रमाणपत्र वैध बनाए रखने के लिए पंजीकरण की तारीख से हर पांच साल में नवीनीकरण शुल्क का भुगतान करना होता है।
हालांकि, बाजार नियामक ने पाया कि इन 25 संस्थाओं ने निर्धारित समयसीमा के बाद भी शुल्क का भुगतान नहीं किया। इनके शुल्क भुगतान की समयसीमा मार्च 2020 से अक्टूबर 2025 के बीच थी। सेबी ने फरवरी 2025 और मई 2026 में इन संस्थाओं को नोटिस जारी कर पूछा था कि उनके पंजीकरण को निलंबित या रद्द क्यों नहीं किया जाना चाहिए।
हालांकि, नोटिस प्राप्तकर्ताओं ने नवीनीकरण शुल्क का भुगतान नहीं किए जाने के तथ्य को खारिज करने के लिए कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया। सेबी की मुख्य महाप्रबंधक सोमा मजूमदार ने आदेश में कहा, ‘‘यह स्थापित है कि नोटिस प्राप्तकर्ताओं ने सेबी (शोध विश्लेषक) विनियम, 2014 के तहत आवश्यक नवीनीकरण शुल्क का भुगतान नहीं किया।’’
इसके बाद सेबी ने इन 25 शोध विश्लेषकों के पंजीकरण प्रमाणपत्र रद्द कर दिए। नियामक ने कहा कि यह कदम समाप्त हो चुके पंजीकरण प्रमाणपत्रों के दुरुपयोग को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है।

