शिवहर में उर्दू भाषण प्रतियोगिता:स्कूल-मदरसे के छात्रों ने लिया हिस्सा, अधिकारियों ने उर्दू को भाईचारे की भाषा बताया, प्रतिभागियों को किया प्रोत्साहित

शिवहर में उर्दू भाषण प्रतियोगिता:स्कूल-मदरसे के छात्रों ने लिया हिस्सा, अधिकारियों ने उर्दू को भाईचारे की भाषा बताया, प्रतिभागियों को किया प्रोत्साहित

शिवहर में सोमवार को जिला स्तरीय उर्दू दक्षता छात्र प्रोत्साहन योजना के तहत वाद-विवाद सह भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। यह प्रतियोगिता मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग, उर्दू निदेशालय, बिहार, पटना के निर्देशानुसार जिला प्रशासन (जिला उर्दू भाषा कोषांग), शिवहर द्वारा महात्मा गांधी नगर भवन में आयोजित की गई। इसमें जिले के विभिन्न विद्यालयों और मदरसों के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का उद्घाटन अपर समाहर्ता श्री मेधावी, सहायक आपदा प्रबंधन पदाधिकारी सुश्री श्वेता सुमन, जिला उर्दू भाषा कोषांग की प्रभारी पदाधिकारी डॉ. सुनीता सोनू, प्रो. मुहम्मद फारूक, मुफ्ती मुहम्मद फखरुद्दीन कासमी, मुबश्शिर आलम और मास्टर मुहम्मद रजाउल्लाह सहित अन्य अतिथियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। इसके बाद छात्रों ने राष्ट्रगान प्रस्तुत किया। उर्दू को दिलों को जोड़ने वाली भाषा बताया
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए अपर समाहर्ता श्री मेधावी ने कहा कि उर्दू भाषा सामाजिक समरसता, संस्कृति और भाईचारे का प्रतीक है। उन्होंने इसे दिलों को जोड़ने वाली भाषा बताया, जिसका उपयोग दैनिक जीवन और मनोरंजन के क्षेत्र में व्यापक रूप से होता है। श्री मेधावी ने छात्रों को ऐसी प्रतियोगिताओं में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रेरित किया। मुफ्ती मुहम्मद फखरुद्दीन कासमी ने बताया कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास में सहायक होते हैं और युवाओं को अपनी प्रतिभा निखारने का अवसर प्रदान करते हैं। सहायक आपदा प्रबंधन पदाधिकारी सुश्री श्वेता सुमन ने कहा कि उर्दू भाषा में सरलता, गहराई और विनम्रता समाहित है और यह भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न अंग है। निरंतर प्रयास जारी रखने की अपेक्षा व्यक्त की
प्राथमिक शिक्षक शिक्षा महाविद्यालय, तरियानी के प्राचार्य डॉ. अज़हरुल्लाह ने जानकारी दी कि उर्दू को वर्ष 1981 में दूसरी राजभाषा का दर्जा प्राप्त हुआ था। उन्होंने इसके प्रचार-प्रसार में पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख किया और सरकार से उर्दू भाषा के विकास के लिए निरंतर प्रयास जारी रखने की अपेक्षा व्यक्त की। भाषण प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में मुहम्मद फखरुल हसन, मुहम्मद इश्तियाक अंजुम, मुहम्मद शहाबुद्दीन, मुहम्मद मनासिर अरशद और डॉ. अज़हरुल्लाह शामिल थे। निर्णायकों ने कहा कि उर्दू भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए प्रतिवर्ष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, लेकिन विद्यालयों में उर्दू में प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने की दिशा में अभी और प्रयासों की आवश्यकता है। शिवहर में सोमवार को जिला स्तरीय उर्दू दक्षता छात्र प्रोत्साहन योजना के तहत वाद-विवाद सह भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। यह प्रतियोगिता मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग, उर्दू निदेशालय, बिहार, पटना के निर्देशानुसार जिला प्रशासन (जिला उर्दू भाषा कोषांग), शिवहर द्वारा महात्मा गांधी नगर भवन में आयोजित की गई। इसमें जिले के विभिन्न विद्यालयों और मदरसों के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का उद्घाटन अपर समाहर्ता श्री मेधावी, सहायक आपदा प्रबंधन पदाधिकारी सुश्री श्वेता सुमन, जिला उर्दू भाषा कोषांग की प्रभारी पदाधिकारी डॉ. सुनीता सोनू, प्रो. मुहम्मद फारूक, मुफ्ती मुहम्मद फखरुद्दीन कासमी, मुबश्शिर आलम और मास्टर मुहम्मद रजाउल्लाह सहित अन्य अतिथियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। इसके बाद छात्रों ने राष्ट्रगान प्रस्तुत किया। उर्दू को दिलों को जोड़ने वाली भाषा बताया
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए अपर समाहर्ता श्री मेधावी ने कहा कि उर्दू भाषा सामाजिक समरसता, संस्कृति और भाईचारे का प्रतीक है। उन्होंने इसे दिलों को जोड़ने वाली भाषा बताया, जिसका उपयोग दैनिक जीवन और मनोरंजन के क्षेत्र में व्यापक रूप से होता है। श्री मेधावी ने छात्रों को ऐसी प्रतियोगिताओं में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रेरित किया। मुफ्ती मुहम्मद फखरुद्दीन कासमी ने बताया कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास में सहायक होते हैं और युवाओं को अपनी प्रतिभा निखारने का अवसर प्रदान करते हैं। सहायक आपदा प्रबंधन पदाधिकारी सुश्री श्वेता सुमन ने कहा कि उर्दू भाषा में सरलता, गहराई और विनम्रता समाहित है और यह भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न अंग है। निरंतर प्रयास जारी रखने की अपेक्षा व्यक्त की
प्राथमिक शिक्षक शिक्षा महाविद्यालय, तरियानी के प्राचार्य डॉ. अज़हरुल्लाह ने जानकारी दी कि उर्दू को वर्ष 1981 में दूसरी राजभाषा का दर्जा प्राप्त हुआ था। उन्होंने इसके प्रचार-प्रसार में पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख किया और सरकार से उर्दू भाषा के विकास के लिए निरंतर प्रयास जारी रखने की अपेक्षा व्यक्त की। भाषण प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में मुहम्मद फखरुल हसन, मुहम्मद इश्तियाक अंजुम, मुहम्मद शहाबुद्दीन, मुहम्मद मनासिर अरशद और डॉ. अज़हरुल्लाह शामिल थे। निर्णायकों ने कहा कि उर्दू भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए प्रतिवर्ष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, लेकिन विद्यालयों में उर्दू में प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने की दिशा में अभी और प्रयासों की आवश्यकता है।  

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