Russia-Ukraine War: वोलोदिमिर जेलेंस्की की पहल, रूस के साथ युद्धविराम का रखा प्रस्ताव

Russia-Ukraine War: वोलोदिमिर जेलेंस्की की पहल, रूस के साथ युद्धविराम का रखा प्रस्ताव

Russia-Ukraine Conflict: यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने रूस के साथ युद्धविराम का प्रस्ताव रखा है। यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब अमेरिका के दूत रूस और यूक्रेन के दौरे पर हैं। वोलोदिमिर जेलेंस्की ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अमेरिकी अधिकारियों की आने वाले दिनों में कीव में मेजबानी की जा सकेगी। इस बीच शुक्रवार को रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव में ड्रोन हमला किया। एक रूसी ड्रोन ने यूक्रेन की सुरक्षा सेवा यानी SBU के मुख्यालय को निशाना बनाया। जेलेंस्की ने रूस पर SBU प्रमुख के निजी कार्यालय को सीधे निशाना बनाने का आरोप लगाया।

जेलेंस्की ने बताया कि ड्रोन ने वोलोदिमिर्स्का स्ट्रीट पर स्थित SBU की केंद्रीय इमारत को निशाना बनाया। यह इमारत सेंट सोफिया कैथेड्रल के सामने है। उन्होंने कहा कि इस हमले का उचित और ठोस जवाब दिया जाएगा। जेलेंस्की ने SBU को इसके लिए निर्देश भी दिए हैं। यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा ने इस हमले को तनाव बढ़ाने वाली बड़ी कार्रवाई बताया है। उन्होंने कहा कि यह घटना स्थिति को और गंभीर बना सकती है।

पहली बार कीव जाने वाले थे विटकॉफ और कुशनर

एक वरिष्ठ यूक्रेनी अधिकारी के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और उनके दामाद जेरेड कुशनर पहली बार कीव जाने वाले हैं। उनका दौरे से पहले कीव पर ड्रोन हमला हुआ है। रूस ने हाल के हफ्तों में यूक्रेन पर दिन के समय हमले बढ़ा दिए हैं। रूस ऐसे ड्रोन भी इस्तेमाल कर रहा है जो जेट इंजन से चलते हैं। इन्हें यूक्रेन की वायु रक्षा प्रणाली के लिए रोकना ज्यादा मुश्किल माना जाता है। मध्य कीव में सरकारी इमारतों पर हमले कम ही होते हैं। इन इलाकों में सुरक्षा कड़ी रहती है और जगह-जगह बैरिकेड्स लगाए गए हैं।

बातचीत की कोशिशों को झटका

रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध खत्म कराने के लिए अमेरिका की अगुवाई में बातचीत की कोशिश चल रही है। हालांकि, पिछले कुछ महीनों में इन प्रयासों को खास सफलता नहीं मिली है। अमेरिका का ध्यान अब ईरान के साथ युद्ध पर भी बढ़ गया है। रूस-यूक्रेन युद्ध को यूरोप में द्वितीय विश्व युद्ध के बाद का सबसे घातक संघर्ष माना जाता है। इस युद्ध में हजारों नागरिकों और बड़ी संख्या में सैनिकों की मौत हो चुकी है।

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