तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगान ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडीमिर जेलेंस्की से साफ कहा है कि काला सागर में व्यापारिक जहाजों पर हमले किसी भी तरह से समझ में नहीं आते। दोनों देशों को तुरंत कदम उठाकर इन हमलों को रोकना होगा।
बता दें कि काला सागर आजकल सिर्फ युद्ध का मैदान नहीं, बल्कि दुनिया भर के अनाज की आपूर्ति का बड़ा रास्ता भी है। रूस और यूक्रेन दोनों तरफ से व्यापारिक जहाजों पर हमले हो रहे हैं। इनमें कुछ तुर्की के जहाज भी शामिल रहे हैं, जिनमें नागरिकों की जान भी गई है।
दोनों पक्षों को तुर्की ने भेजा प्रस्ताव
तुर्की सरकार ने दोनों पक्षों को प्रस्ताव भेजे हैं कि ये हमले बंद हों, लेकिन अभी जवाब का इंतजार है। एशिया, मध्य पूर्व और अफ्रीका के कई देश काला सागर से गेहूं मंगाते हैं। इन हमलों की वजह से सप्लाई मुश्किल हो गई है और दुनिया भर में गेहूं के दाम बढ़ गए हैं। आम आदमी की थाली पर सीधा असर पड़ रहा है।
तुर्की की मध्यस्थता
तुर्की ने शुरुआत से ही दोनों देशों के साथ अच्छे संबंध रखे हैं। नाटो का सदस्य होने के बावजूद उसने रूस पर पश्चिमी प्रतिबंधों में शामिल होने से इनकार किया है। साथ ही यूक्रेन की क्षेत्रीय अखंडता का समर्थन भी किया है और सैन्य मदद भी दी है।
एर्दोगान के कार्यालय के अनुसार, दोनों नेताओं की मुलाकात में तुर्की राष्ट्रपति ने कहा कि वे युद्ध को स्थायी शांति के साथ खत्म करने के लिए हर संभव कोशिश करने को तैयार हैं। सीधी बातचीत फिर से शुरू कराने की कोशिश जारी रहेगी।
‘काला सागर में जहाजों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम जरूरी’
तुर्की ने साफ कहा कि काला सागर में जहाजों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम जरूरी हैं और दोनों पक्षों को जिम्मेदारी से काम लेना चाहिए। इससे पहले जेलेंस्की ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर ‘क्राइमियन प्लेटफॉर्म’ बैठक में कहा था कि कीव काला सागर में समुद्री युद्धविराम के लिए तैयार है। मिस्र, भारत और तुर्की जैसे देशों के प्रस्तावों पर आधारित ये समझौता हो सकता है।
2022 में तुर्की और संयुक्त राष्ट्र की मदद से काला सागर अनाज पहल शुरू हुई थी। इससे यूक्रेनी अनाज सुरक्षित तरीके से निर्यात हो सका। लेकिन एक साल बाद रूस ने इस समझौते से अलग हो गया। उसका आरोप था कि उसके अपने खाद्य और उर्वरक निर्यात में रुकावटें आ रही हैं।

