प्रदेश के के 18799 स्कूलों को 113 करोड़ दिए, 3 दिन में खर्च करने होंगे, नहीं तो हो जाएंगे लैप्स..?.

प्रदेश के के 18799 स्कूलों को 113 करोड़ दिए, 3 दिन में खर्च करने होंगे, नहीं तो हो जाएंगे लैप्स..?.

झालावाड़ जिले के 344 स्कूलों के लिए 2.22 करोड़ रुपए की कम्पोजिट ग्रांट जारी।

झालावाड़ सरकार की ओर से जब तक स्कूलों को ग्रांट (सहायता/अनुदान) नहीं दी गई, तब तक शिक्षकों की परेशानी बढ़ी हुई थी, लेकिन अब राशि जारी हुई तो मुसीबत और बढ़ेगी। प्रदेश के 18 हजार 799 राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूलों को 113 करोड़ की कम्पोजिट ग्रांट राशि जारी की गई है। अब शिक्षकों के सामने समस्या यह है कि इस वित्तीय वर्ष के तहत इस राशि को 31 मार्च तक खत्म करना होगा। यूं तो 5 दिन हैं, लेकिन 26 मार्च को रामनवमी, 29 को रविवार और 31 मार्च को महावीर जयंती का अवकाश है। ऐसे में शिक्षा कार्य दिवस मात्र 3 ही शेष हैं, राशि खर्च करनी होगी। नहीं तो यह लैप्स हो जाएगी। झालावाड़ के 344 स्कूलों के लिए 2.22 करोड़ रुपए दिए गए हैं। अगर सरकार ने इसको खर्च करने की तिथि नहीं बढ़ाई तो स्कूल इसका पूरा उपयोग ही नहीं कर पाएंगे। खास बात यह है कि 2025-26 का सत्र एक जुलाई से शुरू हुआ था। इसके एक-दो माह बाद ही यह ग्रांट मिल जानी चाहिए थी। लेकिन अभी तक नहीं मिलने से शिक्षकों के सामने समस्या खड़ी हो गई है।नियमानुसार इस राशि का 70 फीसदी उपयोग दिसंबर तक हो जाना था। स्कूलों की दैनिक, भौतिक और शैक्षणिक जरूरतों को पूरा करने के लिए यह ग्रांट दी जाती है। इसमें 75 फीसदी राशि केंद्र व 25 फीसदी राज्य सरकार देती है। इस बार सरकार ने इसे जारी करने में देरी की।

जिले में स्कूलों की संख्या

0 स्कूल 30 नामांकन वाले झालावाड़ में

8 स्कूल 30 से 100 नामांकन वाले,

128 स्कूल 100 से 250 नामांकन वाले,

207 स्कूल 250 से 1000 नामांकन वाले,

1 स्कूल 1000 से अधिक नामांकन वाला हैं।

इन पर खर्च होती है राशि-

यह राशि स्कूल के रखरखाव, सफाई, रंग-रोगन, दरी-पट्टी, खेल सामग्री, बिजली-पानी के खर्चों, बच्चों को सर्टिफिकेट, विज्ञान लैब/गणित किट के उपकरणों की मरम्मत या नए लाने आदि कामों पर खर्च की जाती है।

छात्रों के अनुपात में मिलती है राशि-

ग्रांट नामांकन के आधार पर मिलती है। इसमें 1 से 30 छात्र पर 10 हजार, 31 से 100 छात्र पर 25 हजार, 101 से 250 छात्र पर 50 हजार, 251 से 1000 छात्र पर 75 हजार और 1000 से अधिक छात्र-छात्राएं होने पर एक लाख रुपए की कम्पोजिट ग्रांट दी जाती है।

ये है शिक्षकों के सामने चुनौतियां

-स्कूल प्रबंधन को 3 दिन में सामग्री खरीदकर बिल शाला दर्पण पोर्टल पर डालना होगा। इतने कम समय में ऐसा करना मुश्किल होगा। एक अप्रैल से नया सत्र है। उसका काम भी तय समय पर करना होगा।

– ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट की समस्या रहती है। पोर्टल पर बिल को चढ़ाने में समय लगता है। ऐसे में स्कूल प्रबंधन को दिक्कत का सामना करना पड़ेगा।

-यह राशि विद्यालय प्रबंधन समिति (एसएमसी) के जरिये खर्च करने का प्रावधान है। अब आनन-फानन में यह मीटिंग करनी होगी। तय करना होगा राशि कहां-कहां उपयोग में लेनी है। इसकी मंजूरी लेनी होगी।

बजट खींच लिया जाएगा-

ग्रांट नहीं मिलने पर शिक्षकों ने अपनी जेब से भी स्कूलों में खर्चा किया है,अब उनको राशि मिलने का संकट खड़ा हो गया है। उनकी ओर से खरीदे गए सामान की बिलों की फाइलें वेंडर प्रक्रिया से विद्यालय को नोडल अधिकारी के खातों से भेजी जाएगी। दुविधा यह है कि सर्वर या कोई टेक्निकल इशूजक्रिएट हुए तो,राशि ट्रासंफर करने में दिक्कत हो सकती है,ऐसे में बजट खींच लिया जाएगा,सरकार को तिथि बढ़ानी चाहिए या फिर अंतिम समय पर राशि नहीं भेजनी चाहिए,यह राशि सत्र के प्रारंभिक कार्य दिवसों में विद्यालयों को मिले तो इस तरह की परेशानी नहीं हो।

नवल सिंह, प्रदेश महामंत्री शिक्षक संघ रेसटा।

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