इंटर प्रैक्टिकल परीक्षा में नंबर के नाम पर वसूली:खगड़िया में टीमापुर लगार विद्यालय के 3 कर्मियों पर FIR, DM ने कराई जांच

इंटर प्रैक्टिकल परीक्षा में नंबर के नाम पर वसूली:खगड़िया में टीमापुर लगार विद्यालय के 3 कर्मियों पर FIR, DM ने कराई जांच

खगड़िया जिले के परबत्ता प्रखंड स्थित उच्चतर माध्यमिक विद्यालय टीमापुर लगार में इंटर प्रैक्टिकल परीक्षा में नंबर देने के नाम पर अवैध वसूली का मामला सामने आया है। जिला प्रशासन ने इस पर सख्त कार्रवाई करते हुए विद्यालय के प्रधानाध्यापक, शिक्षक और लिपिक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है। मिली जानकारी के अनुसार, खगड़िया के जिलाधिकारी नवीन कुमार के निर्देश पर प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी सह श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी ने परबत्ता थाना में कांड संख्या 136/26 दर्ज कराया है। इस मामले में प्रधानाध्यापक सविता कुमारी, लिपिक रीता कुमारी और शिक्षक दिलीप चौधरी को आरोपी बनाया गया है। तीनों के खिलाफ विभागीय एवं अनुशासनात्मक कार्रवाई की भी अनुशंसा की गई है। अधिक अंक देने के नाम पर 1500 रुपए की मांग यह मामला तब सामने आया जब विद्यालय के छात्र गरीब कुमार और विशाल कुमार ने जिलाधिकारी को लिखित आवेदन दिया। उन्होंने आरोप लगाया था कि प्रैक्टिकल परीक्षा में अधिक अंक देने के नाम पर उनसे क्रमशः 1500 और 1000 रुपये की मांग की गई थी। छात्रों ने यह भी बताया कि पैसे नहीं देने पर उनका भविष्य खराब करने की धमकी दी गई थी। शिकायत मिलने के बाद, 28 मार्च 2026 को मामले की जांच कराई गई। जांच में छात्रों द्वारा लगाए गए आरोप सही पाए गए। इसके बाद जिला शिक्षा पदाधिकारी के निर्देश पर संबंधित आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। शिक्षा विभाग में मचा हड़कंप इस घटना के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। स्थानीय लोगों का मानना है कि ऐसे मामलों पर समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं होने से शिक्षा व्यवस्था से लोगों का भरोसा उठ सकता है। वहीं, इस मामले का वीडियो सामने आने के बाद छात्रों और अभिभावकों में जागरूकता भी बढ़ी है। और लोग अब शिकायत करने के लिए आगे आ रहे हैं।गौरतलब है कि इससे पहले भी यह विद्यालय विभिन्न कारणों से चर्चा में रहा है। जानकारी के अनुसार लिपिक रीता कुमारी ने सितंबर 2025 में अनुकंपा के आधार पर नौकरी प्राप्त की थी। यह भी उल्लेखनीय है कि घटना से पूर्व जिला शिक्षा पदाधिकारी द्वारा स्पष्ट निर्देश जारी किया गया था कि स्कूलों में अवैध वसूली की शिकायत मिलने पर सख्त विभागीय कार्रवाई के साथ प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी। इसके बावजूद आरोपियों ने निर्देशों को नजरअंदाज किया, जिसका परिणाम अब उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई के रूप में सामने आया है। खगड़िया जिले के परबत्ता प्रखंड स्थित उच्चतर माध्यमिक विद्यालय टीमापुर लगार में इंटर प्रैक्टिकल परीक्षा में नंबर देने के नाम पर अवैध वसूली का मामला सामने आया है। जिला प्रशासन ने इस पर सख्त कार्रवाई करते हुए विद्यालय के प्रधानाध्यापक, शिक्षक और लिपिक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है। मिली जानकारी के अनुसार, खगड़िया के जिलाधिकारी नवीन कुमार के निर्देश पर प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी सह श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी ने परबत्ता थाना में कांड संख्या 136/26 दर्ज कराया है। इस मामले में प्रधानाध्यापक सविता कुमारी, लिपिक रीता कुमारी और शिक्षक दिलीप चौधरी को आरोपी बनाया गया है। तीनों के खिलाफ विभागीय एवं अनुशासनात्मक कार्रवाई की भी अनुशंसा की गई है। अधिक अंक देने के नाम पर 1500 रुपए की मांग यह मामला तब सामने आया जब विद्यालय के छात्र गरीब कुमार और विशाल कुमार ने जिलाधिकारी को लिखित आवेदन दिया। उन्होंने आरोप लगाया था कि प्रैक्टिकल परीक्षा में अधिक अंक देने के नाम पर उनसे क्रमशः 1500 और 1000 रुपये की मांग की गई थी। छात्रों ने यह भी बताया कि पैसे नहीं देने पर उनका भविष्य खराब करने की धमकी दी गई थी। शिकायत मिलने के बाद, 28 मार्च 2026 को मामले की जांच कराई गई। जांच में छात्रों द्वारा लगाए गए आरोप सही पाए गए। इसके बाद जिला शिक्षा पदाधिकारी के निर्देश पर संबंधित आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। शिक्षा विभाग में मचा हड़कंप इस घटना के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। स्थानीय लोगों का मानना है कि ऐसे मामलों पर समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं होने से शिक्षा व्यवस्था से लोगों का भरोसा उठ सकता है। वहीं, इस मामले का वीडियो सामने आने के बाद छात्रों और अभिभावकों में जागरूकता भी बढ़ी है। और लोग अब शिकायत करने के लिए आगे आ रहे हैं।गौरतलब है कि इससे पहले भी यह विद्यालय विभिन्न कारणों से चर्चा में रहा है। जानकारी के अनुसार लिपिक रीता कुमारी ने सितंबर 2025 में अनुकंपा के आधार पर नौकरी प्राप्त की थी। यह भी उल्लेखनीय है कि घटना से पूर्व जिला शिक्षा पदाधिकारी द्वारा स्पष्ट निर्देश जारी किया गया था कि स्कूलों में अवैध वसूली की शिकायत मिलने पर सख्त विभागीय कार्रवाई के साथ प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी। इसके बावजूद आरोपियों ने निर्देशों को नजरअंदाज किया, जिसका परिणाम अब उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई के रूप में सामने आया है।  

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