रश्मिरथी पर्व का समापन:लखनऊ में सांस्कृतिक संगम, तिलक और अटल के विचारों से गूंजा प्रतिष्ठान

रश्मिरथी पर्व का समापन:लखनऊ में सांस्कृतिक संगम, तिलक और अटल के विचारों से गूंजा प्रतिष्ठान

राजधानी लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित तीन दिवसीय रश्मिरथी पर्व का रविवार को भव्य समापन हुआ। रविवार को अंतिम दिन लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के विचारों और योगदान पर केंद्रित कार्यक्रमों ने पूरे माहौल को राष्ट्रभक्ति से सराबोर कर दिया।

तिलक और अटल के विचारों से गूंजा परिसर
समापन दिवस पर आयोजित कार्यक्रमों में राष्ट्रनायकों के जीवन, विचार और योगदान को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। लोकमान्य तिलक के स्वराज, स्वाभिमान और राष्ट्र चेतना के संदेश को नाट्य मंचन के माध्यम से जीवंत किया गया। वहीं अटल बिहारी वाजपेयी की कविताओं पर आधारित ‘अटल स्वरांजलि’ ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। पूरे कार्यक्रम के दौरान “भारत माता की जय” के नारों से इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान गूंजता रहा।

युवाओं में दिखा खास उत्साह
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवा, साहित्य प्रेमी और बुद्धिजीवी शामिल हुए। युवाओं ने न केवल कार्यक्रमों को देखा बल्कि राष्ट्रनिर्माण और सांस्कृतिक चेतना से जुड़े विचारों को आत्मसात भी किया। आयोजकों का मानना है कि इस तरह के आयोजन नई पीढ़ी को अपने इतिहास और महापुरुषों से जोड़ने का सशक्त माध्यम बन रहे हैं।

नेताओं ने विरासत संरक्षण पर दिया जोर
इस मौके पर उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा कि जिन महापुरुषों पर यह आयोजन केंद्रित है, उनके योगदान को समझना और आगे बढ़ाना बेहद जरूरी है। उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी के साथ काम करने के अपने अनुभव को भी साझा किया।
वहीं कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर महापुरुषों की विरासत को सम्मान देने की दिशा में प्रदेश सरकार लगातार काम कर रही है और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे नई दिशा दी है।

विरासत और विकास का संतुलित समन्वय
प्रदेश सरकार की नीति में विकास के साथ सांस्कृतिक विरासत को भी समान महत्व दिया जा रहा है। जहां एक ओर एक्सप्रेस-वे, मेडिकल कॉलेज और निवेश जैसे क्षेत्रों में तेजी से काम हो रहा है, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रनायकों, संतों और साहित्यकारों की स्मृतियों को सहेजने के लिए ऐसे आयोजनों का विस्तार किया जा रहा है।

तीन दिन तक चला सांस्कृतिक और वैचारिक उत्सव
24 से 26 अप्रैल तक चले इस रश्मिरथी पर्व में साहित्य, राष्ट्रचिंतन, संस्कृति और प्रेरक विचारों का अनूठा संगम देखने को मिला। अलग-अलग सत्रों में देश के महान व्यक्तित्वों के जीवन और योगदान पर चर्चा हुई, वहीं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने आयोजन को जीवंत बनाए रखा।

समापन के साथ छोड़ा प्रेरणा का संदेश
रश्मिरथी पर्व का समापन केवल एक आयोजन का अंत नहीं बल्कि एक संदेश के साथ हुआ कि विकास के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों और राष्ट्रनायकों के विचारों को संजोना भी उतना ही आवश्यक है। यह आयोजन युवाओं को प्रेरणा देने के साथ-साथ समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने में सफल रहा।

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