‘रहमान गली’ अचानक बनी ‘राम गली’, आखिर क्यों पाकिस्तान में तेजी से बदला जा रहा नाम

‘रहमान गली’ अचानक बनी ‘राम गली’, आखिर क्यों पाकिस्तान में तेजी से बदला जा रहा नाम

Islamic Names Removed From Streets: पाकिस्तान के लाहौर में ‘रहमान गली’ का नाम बदलकर ‘राम गली’ और ‘बाबरी मस्जिद चौक’ को ‘जैन मंदिर चौक’ कर दिया गया है। इतिहास में पहली बार मरियम नवाज सरकार सड़कों से इस्लामी तमगा हटाकर विभाजन से पुराने हिंदू, सिख और औपनिवेशिक नाम वापस ला रही है। दरअसल, नवाज शरीफ के इस 50 अरब रुपये के ड्रीम प्रोजेक्ट के पीछे गहरी अंतरराष्ट्रीय कूटनीति है। कंगाली की कगार पर खड़ा पाकिस्तान अपनी कट्टरपंथी छवि को सुधारकर IMF से बेलआउट पैकेज पाने, FATF की कार्रवाई से बचने और विदेशी निवेशकों को लुभाने के लिए यह बड़ा दिखावा कर रहा है।

क्यों सड़कों से हटाए जा रहे इस्लामी नाम

दरअसल, यह सब कुछ पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में एक बहुत बड़े प्रोजेक्ट के तहत हो रहा है। पिछले दो महीनों में ही करीब 9 प्रमुख जगहों के नाम बदले जा चुके हैं। जो कल तक ‘इस्लामपुरा’ था, उसके आधिकारिक साइनबोर्ड पर अब ‘कृष्णा नगर’ चमक रहा है। इस हैरान करने वाले फैसले के पीछे पाकिस्तान की पंजाब सरकार का ‘लाहौर हेरिटेज एरिया रिवाइवल’ (LHAR) प्रोजेक्ट है। यह कोई छोटा बदलाव नहीं है, बल्कि पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ का एक महत्वाकांक्षी ड्रीम प्रोजेक्ट है। अब उनके कदमों पर चलते हुए उनकी बेटी और पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज इस अभियान को तेजी से आगे बढ़ा रही हैं।

लाहौर की पुरानी पहचान लौटाने की तैयारी

पंजाब सरकार ने लाहौर और आसपास के इलाकों की ऐतिहासिक सड़कों व गलियों के पुराने नाम बहाल करने की योजना को मंजूरी दे दी है। एक अधिकारी के मुताबिक, मुख्यमंत्री मरियम नवाज की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को हरी झंडी दी गई। सरकार का कहना है कि इससे शहर की सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक पहचान को फिर से जीवित किया जाएगा। अधिकारी ने बताया कि इस परियोजना का नेतृत्व पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ कर रहे हैं, जो लाहौर विरासत क्षेत्र पुनरुद्धार परियोजना के प्रमुख भी हैं। उनके प्रस्ताव को पिछले सप्ताह कैबिनेट से मंजूरी मिली। पिछली सरकारों में बदले गए कई पुराने नाम अब वापस लाए जाएंगे, जिनमें क्वींस रोड, जेल रोड, डेविस रोड, लक्ष्मी चौक, जैन मंदिर रोड, भगवान पुरा और शांति नगर जैसे इलाके शामिल हैं।

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पुराने नामों के पीछे राजनीति

पंजाब सरकार का तर्क है कि यूरोपीय देशों की तरह पाकिस्तान को भी अपने शहरों की ऐतिहासिक विरासत को मिटाने के बजाय उसे सहेजकर रखना चाहिए। इस पहल का एक मुख्य मकसद विरासत पर्यटन को बढ़ावा देना है, जिससे सरकार की तगड़ी कमाई हो सके। लेकिन कहानी सिर्फ इतनी नहीं है, इसके पीछे की असली कूटनीति बेहद गहरी है।

कर्ज के लिए विरासत का सहारा?

पाकिस्तान से हिंदू और सिखों के साथ उत्पीड़न, जबरन धर्मांतरण, उनकी संपत्तियों पर कब्जा और ऐतिहासिक मंदिरों को ढहाने जैसी कई घटनाएं सामने आती रही हैं। लेकिन अब मरियम नवाज के फैसले के बाद सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि दशकों से कट्टर इस्लामीकरण की राह पर चलने वाले इस देश में, नाम बदलने का यह अभियान बिना किसी विरोध के शांति से आगे बढ़ रहा है। पुराने नामों को बहाल करके पाकिस्तान वैश्विक समुदाय, विशेष रूप से पश्चिमी देशों को यह दिखाना चाहता है कि वह अपनी ‘कट्टरपंथी छवि’ को छोड़कर एक सहिष्णु, समावेशी और बहुसांस्कृतिक राष्ट्र बन रहा है। ऐसा करने से उसे कूटनीतिक और आर्थिक सहायता प्राप्त करने में आसानी होगी।

डूबती अर्थव्यवस्था को बचाने की कोशिश

आतंकवाद को फंडिंग देने के आरोपों को लेकर पाकिस्तान लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय जांच के घेरे में रहा है, जिससे उसकी अर्थव्यवस्था को अरबों डॉलर का नुकसान हुआ है। लाहौर जैसे प्रमुख सांस्कृतिक केंद्र में औपनिवेशिक काल के नामों को बहाल करके और पुराने हिंदू-सिख नाम वापस देकर पाकिस्तान यह दिखाना चाहता है कि वह उग्रवाद को पीछे छोड़ रहा है। पंजाब सरकार का यह कदम फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) या अन्य वैश्विक संस्थानों को उस पर फिर से कड़े प्रतिबंध लगाने से रोकना भी माना जा सकता है।

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