देहरादून, दो सितंबर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को प्रदेश के 26 अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को मान्यता प्रमाण-पत्र सौपे जबकि उधमसिंह नगर जिले के बाजपुर में बिना मान्यता के संचालित हो रहे पांच मदरसों को सील कर दिया गया। यहां आयोजित कार्यक्रम ‘‘नई पहचान, नया सम्मान-आधुनिक शिक्षा से उज्ज्वल भविष्य’’ में राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण द्वारा 26 संस्थानों को मान्यता प्रमाण पत्र प्रदान किए जाने को मुख्यमंत्री ने अल्पसंख्यक शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक शुरुआत बताया। उन्होंने कहा कि राज्य में शिक्षा के क्षेत्र में लगातार नवाचार किए जा रहे हैं और यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार की नीतियों और निर्णयों का उद्देश्य किसी व्यक्ति अथवा वर्ग को निशाना बनाना नहीं है बल्कि सभी को बिना भेदभाव के समान अवसर उपलब्ध कराना है। आज मान्यता प्रमाण पत्र पाने वाले संस्थानों में देहरादून, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर जिलों के मदरसों सहित अन्य अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान शामिल हैं। उधर, उधमसिंह नगर जिले के बाजपुर क्षेत्र में बिना आवश्यक मान्यता एवं दस्तावेजों के संचालित हो रहे पांच मदरसों को सील कर दिया गया।
अधिकारियों ने बताया कि निरीक्षण के दौरान संबंधित मदरसा संचालक आवश्यक दस्तावेज पेश नहीं कर सके जिसके बाद बाजपुर की एसडीएम ऋचा सिंह और कोतवाली निरीक्षक नरेश चौहान के नेतृत्व में पुलिस बल की मौजूदगी में उन्हें सील कर दिया गया। प्रशासन द्वारा सील किए गए मदरसों में बाजपुर का मदरसा जामिया हनफिया रजाउत उलूम, मदरसा जामिया फातिमा, कनोरा का मदरसा गुलशने इस्लाम, केलाखेड़ा-बाजपुर में गांधीनगर मोहल्ला में स्थित मदरसा मोइनुल उलूम तथा बाजपुर का मदरसा हुज्जतुल इस्लाम शामिल हैं। एसडीएम ने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देश पर क्षेत्र में मदरसों का निरीक्षण और जांच-पड़ताल की जा रही है।
उन्होंने कहा कि जिन संस्थानों के पास निर्धारित मान्यता अथवा आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं होंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसी बीच, राज्य में लागू नई मदरसा शिक्षा व्यवस्था और मान्यता संबंधी प्रावधानों के खिलाफ कुछ मदरसा संचालकों ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय का रूख किया है। याचिकाकर्ताओं ने न्यायालय में दलील दी है कि अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण तथा शिक्षा बोर्ड से मान्यता की अनिवार्यता के चलते कई मदरसों के सामने संचालन संबंधी कठिनाइयां उत्पन्न हो सकती हैं।
प्रारंभिक सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से इस मामले में जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी। ऊधमसिंह नगर के जिलाधिकारी नितिन भदौरिया ने कहा कि जिले में मदरसों का निरीक्षण अभियान जारी है और जिन संस्थानों ने निर्धारित प्राधिकरण से मान्यता नहीं ली है या आवश्यक मानकों और नियमों का पालन नहीं किया है, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने कहा कि बच्चों को उनकी धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान से जोड़े रखते हुए उन्हें आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ना ही नयी व्यवस्था की मूल भावना है। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था के तहत मदरसों को भी निर्धारित शैक्षणिक मानकों और नियमों का पालन करना होगा। धकाते ने कहा कि उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अपना पक्ष मजबूती से रखा जाएगा।

