Punjab DA केस: High Court को गुमराह करने पर Chief Secretary KAP Sinha को अवमानना नोटिस, 9 अक्टूबर को पेशी का आदेश

Punjab DA केस: High Court को गुमराह करने पर Chief Secretary KAP Sinha को अवमानना नोटिस, 9 अक्टूबर को पेशी का आदेश

पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने मंगलवार को पंजाब के मुख्य सचिव केएपी सिन्हा को नोटिस जारी कर उनसे पूछा कि राज्य कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लंबित महंगाई भत्ते से जुड़े एक मामले में अदालत को कथित तौर पर “जानबूझकर गुमराह” करने के आरोप में उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना ​​की कार्यवाही क्यों शुरू न की जाए। अदालत ने उन्हें अगली सुनवाई की तारीख 9 अक्टूबर को उपस्थित रहने का भी निर्देश दिया। मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की पीठ ने सर्वोच्च न्यायालय रजिस्ट्री की एक रिपोर्ट के बाद कार्रवाई की, जिसमें राज्य सरकार के अपील की स्थिति पर दिए गए रुख का खंडन किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब की अपील में कई खामियां अभी तक दूर नहीं की गई थीं, जबकि मुख्य सचिव के हलफनामे में कहा गया था कि खामियों को दूर कर दिया गया है और अपील दोबारा दायर कर दी गई है।

उच्च न्यायालय 3 अगस्त के अपने आदेश के कथित गैर-अनुपालन से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें पंजाब सरकार को राज्य में कार्यरत अखिल भारतीय सेवा अधिकारियों को भुगतान की जाने वाली दरों पर कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को लंबित महंगाई भत्ता और महंगाई राहत जारी करने का निर्देश दिया गया था। पंजाब सरकार ने इस आदेश के खिलाफ 1 सितंबर को सर्वोच्च न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री द्वारा भेजी गई रिपोर्ट का हवाला देते हुए, उच्च न्यायालय ने पाया कि अपील में अभी भी कई खामियां मौजूद हैं, जिनमें अपर्याप्त अदालती शुल्क, बिना हस्ताक्षर वाला वकालतनामा और पुनः दायर की गई अपील में भी खामियां शामिल हैं। इसने यह भी पाया कि पहले बताई गई खामियों को दूर नहीं किया गया है। बेंच ने कहा जब मुख्य सचिव ने हलफनामे में कहा है कि अपील पुनः दायर की गई है, तो हम उम्मीद करते हैं कि ऐसे वरिष्ठ व्यक्ति यह सुनिश्चित करेंगे कि अदालत के समक्ष हर तरह से सही अपील प्रस्तुत की जाए, खासकर तब जब दोषपूर्ण अपील दायर किए जाने के बाद एक महीना बीत चुका है। बेंच ने आगे कहा कि राज्य को सुविधा देने के लिए इस अदालत द्वारा मामले को बार-बार स्थगित किया गया है। इसलिए, राज्य द्वारा मामले में आगे बढ़ने का चुना गया तरीका स्वीकार्य नहीं है।

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अदालत ने आगे टिप्पणी की, दोषपूर्ण अपील दायर किए जाने के लगभग एक महीने बाद उसे दोबारा दायर करना, प्रथम दृष्टया यह दर्शाता है कि इस अदालत के समक्ष तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत करने का ही प्रयास किया गया था। अदालत ने कहा, रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री से, हम प्रथम दृष्टया पाते हैं कि मुख्य सचिव द्वारा इस अदालत के समक्ष जानबूझकर तथ्यों का गलत बयान दिया गया है। इसलिए हम पंजाब के मुख्य सचिव को नोटिस जारी करते हैं कि वे स्पष्ट करें कि झूठे बयान देकर जानबूझकर इस अदालत को गुमराह करने के लिए उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना ​​की कार्यवाही क्यों शुरू न की जाए।” पीठ ने यह भी कहा कि सर्वोच्च न्यायालय रजिस्ट्री की रिपोर्ट से यह स्पष्ट है कि सोमवार को उसके समक्ष झूठा बयान दिया गया था।

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उच्च न्यायालय ने अपनी रजिस्ट्री को राज्य सरकार की अपील की स्थिति पर सर्वोच्च न्यायालय से तुरंत रिपोर्ट प्राप्त करने का निर्देश दिया था। पीठ ने पंजाब सरकार को अदालत के साथ “लुका-छिपी” खेलने के लिए फटकार लगाई और उसके इस दावे पर सवाल उठाया कि खामियों को दूर कर दिया गया है। जबकि राज्य के वकील ने जोर देकर कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष अपील सही थी, याचिकाकर्ताओं ने इस दावे का पुरजोर खंडन किया।

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