पंजाब मंत्रिमंडल ने मादक पदार्थों से जुड़े मामलों का तेजी से निपटारा सुनिश्चित करने, अदालतों में लंबित मामलों की संख्या कम करने और मादक पदार्थों के खिलाफ जारी अभियान को मजबूत करने के लिए शनिवार को राज्यभर में 35 विशेष स्वापक औषधि एवं मन:प्रभावी पदार्थ (एनडीपीएस) अदालतें स्थापित करने को मंजूरी दी। मुख्यमंत्री भगवंत मान की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, पंजाब मादक पदार्थों की तस्करी और दुरुपयोग की गंभीर चुनौती का सामना कर रहा है।
राज्य में हर साल एनडीपीएस के लगभग 20,000 मामले दर्ज होते हैं और करीब 27,000 लोगों को गिरफ्तार किया जाता है। बयान में कहा गया कि इनमें से लगभग 12,000 मामलों की सुनवाई सत्र अदालतों में होती है, जबकि हर साल करीब 5,700 मामलों का ही निपटारा हो पाता है। इसके परिणामस्वरूप 31 अगस्त 2026 तक 52,577 मामले लंबित थे।
इन मामलों के निपटारे में औसतन लगभग आठ साल का समय लग रहा है। पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के ‘रजिस्ट्रार जनरल’ ने अगले पांच से सात वर्षों में लंबित मामलों के बोझ को कम करने के लिए, विशेष एनडीपीएस अदालतों की आवश्यकता का आकलन किया था। इसके आधार पर मंत्रिमंडल ने पहले चरण में ऐसी 35 अदालतें स्थापित करने की मंजूरी दे दी है।
इसके साथ ही 385 पदों को भी मंजूरी दी गई है। इनमें 35 अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, 315 सहायक कर्मचारी और 35 सहायक जिला अभियोजक के पद शामिल हैं। बुनियादी ढांचे की लागत सहित लगभग 75 करोड़ रुपये के अनुमानित खर्च को भी मंजूरी दे दी गई है।
वहीं, एक अन्य फैसले में मंत्रिमंडल ने राजस्व पटवारियों और कानूनगो के सेवा नियमों में संशोधन को मंजूरी दी, जिससे उनका जिला स्तर का कैडर बहाल करने का रास्ता साफ हो गया है। मंत्रिमंडल ने अन्य फैसले में संगरूर जिले की तहसील लेहरागागा के गांव खांडेबाद में स्थित 217 कनाल और 14 मरला सरकारी जमीन को राजस्व, पुनर्वास और आपदा प्रबंधन विभाग से पंजाब मंडी बोर्ड को हस्तांतरित करने की मंजूरी दी है, ताकि वहां एक नयी अनाज मंडी स्थापित की जा सके। मंत्रिमंडल ने पंजाब में श्रमिकों के कल्याण और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों को बेहतर तरीके से लागू करने के लिए तीन महत्वपूर्ण नियमावलियों को भी मंजूरी दी।

