Prateek Yadav Dies : यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के बेटे (Mulayam Singh Yadav Son Pratik Yadav) प्रतीक यादव (38) की आज अचानक मौत की खबर सामने आई। समाजवादी पार्टी ने इसे दुखद बताया है। अखिलेश यादव के सौतेले भाई प्रतीक जिंदादिली से जीने वाले इंसान थे। ना केवल लग्जरी कार और बॉडीबिल्डिंग बल्कि, उन्हें स्ट्रीट डॉग्स, जंगली जानवर (हाथी, बंदर, सांप आदि) से बेहद लगाव था।
आइए, तस्वीरों-वीडियो में इनकी जिंदादिली जिंदगी की झलक देखते हैं:
बेसहारा जानवरों को दिया आश्रय
प्रतीक को डॉग्स बेहद पसंद थे। सड़क हो या घर, जहां डॉग्स दिखे वो वहीं पर प्यार जाहिर कर देते थे। सड़कों पर बेसहारा जानवरों को देखकर पिघल जाते थे। इसलिए, वैसे जानवरों के लिए जीव आश्रय फाउंडेशन की स्थापना की। वो खुद जाकर जानवरों को रेस्कयू भी करते थे।
प्रतीक यादव का स्नेक रेस्क्यू वीडियो देखिए
स्नैक टूट भी कराया था
प्रतीक यादव को टैटू का भी शौक था। यह बात उनकी इंस्टाग्राम पोस्ट से साफ दिखती है। वो अपने स्नेक टैटू को बनवाने के बाद कितने खुश दिख रहे हैं। टैटू आर्टिस्ट ने भी प्रतीक के साथ काम का अनुभव शेयर किया है।
डॉग्स से था बेहद प्यार
प्रतीक यादव ने अपने इंस्टाग्राम पर डॉग्स के साथ एक नहीं कई तस्वीरें और वीडियो शेयर कर रखी हैं। उनके साथ वो खेलते-कूदते दिख रहे हैं तो कुछ को सीने से चिपकाए हुए हैं। इसी तरह हाथी, बंदर हो या गाय… हर जानवर से इनका प्रेम अथाह दिखता है।
अपनी शर्तों पर जी जिंदगी
अक्सर राजनेता घराने के बच्चे राजनीति की तरफ रूख करते हैं। जैसे इनके भैया अखिलेश यादव भी पिता की तरह पॉलिटिक्स जॉइन किए। लेकिन, प्रतीक ने अपने शौक को जिंदा रखा। बॉडीबिल्डिंग करते थे, समाजसेवा करने में जुटे रहे लेकिन राजनीति में नहीं गए।
प्रतीक यादव ने प्रेम विवाह किया
प्रतीक यादव ने अपर्णा यादव को करीब 11 साल तक डेट किया। इसके बाद दोनों ने वैवाहिक जीवन का फैसला लिया और फिर 2012 में शादी की। बताया जाता है कि उस साल की ये चर्चित शादी रही थी। हालांकि, दोनों के बीच तकरार भी हुई थी लेकिन, दोनों ने समझदारी से फैसला लेकर शादी को बचा लिया था।
साल 2001 में अपर्णा और प्रतीक की मुलाकात किसी फ्रेंड की जन्मदिन की पार्टी में हुई थी। दोनों वहीं पर मिले और फिर हमसफर बन गए।
प्रतीक यादव की मौत संदेहास्पद!
बता दें, प्रतीक यादव की मौत का स्पष्ट कारण खबर लिखे जाने तक सामने नहीं आई थी। लखनऊ पुलिस के मुताबिक, सुबह लगभग 6 बजे उन्हें लखनऊ के सिविल अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। वहीं, मीडिया को अखिलेश यादव ने कहा है कि जरूरत पड़ी तो कानूनी सहारा भी लेंगे।


