आंध्र प्रदेश में पाकिस्तान से जुड़े एक संदिग्ध जासूसी नेटवर्क का बड़ा खुलासा हुआ है। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने देशभर में विदेशी जासूसी गतिविधियों को पकड़ने और रोकने के लिए बड़ा अभियान शुरू किया है। आंध्र प्रदेश के काउंटर इंटेलिजेंस विभाग ने ‘ऑपरेशन फायरवॉल-2026’ के तहत 10 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में एक साथ छापेमारी की है। इस मामले में 18 लोग जांच के घेरे में हैं, जिनमें 13 नौसेना से जुड़े बताए जा रहे हैं। अब तक दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि बाकी लोगों की भूमिका की जांच जारी है। मामला इसलिए बेहद गंभीर माना जा रहा है क्योंकि जांच की कड़ियां विशाखापत्तनम स्थित महत्वपूर्ण पूर्वी नौसैनिक कमान और वहां मौजूद रक्षा प्रतिष्ठानों से जुड़ी हैं।
जांच एजेंसियों को संदेह है कि संवेदनशील और गोपनीय रक्षा सूचनाएं पाकिस्तान से जुड़े खुफिया अधिकारियों तक पहुंचाई गईं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि संदिग्धों के बीच संपर्क के लिए गोपनीय संचार माध्यमों, सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल साधनों का इस्तेमाल किया गया। तलाशी के दौरान कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी जब्त किए गए हैं। आंध्र प्रदेश पुलिस ने इस मामले में 2 सितंबर को विजयवाड़ा के काउंटर इंटेलिजेंस थाने में मामला दर्ज किया था। इसमें भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के साथ गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम और आधिकारिक गोपनीयता कानून की धाराएं लगाई गई हैं। जांचकर्ताओं का कहना है कि मामला केवल सूचनाओं के आदान-प्रदान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी संभावित कड़ियां राष्ट्रीय सुरक्षा, संप्रभुता और देश की अखंडता से जुड़ी हुई हैं।
बताया जा रहा है कि पहली गिरफ्तारी विशाखापत्तनम से हुई। नौसेना अधिकारियों के लिए अनुबंध पर वाहन चालक के रूप में काम करने वाले अन्नम साई वरप्रसाद को गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि उसने नौसेना और रक्षा प्रतिष्ठानों से संबंधित संवेदनशील जानकारी पाकिस्तान से जुड़े एक खुफिया अधिकारी तक पहुंचाई और इसके बदले धन प्राप्त किया। उसे अदालत में पेश किए जाने के बाद 14 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया और वह विशाखापत्तनम जिला जेल में है।
दूसरी गिरफ्तारी तमिलनाडु के कोयंबटूर में हुई। 31 वर्षीय नौसेना कर्मी प्रदीप मुखर्जी को तीन अक्टूबर को नौसेना के प्रशिक्षण प्रतिष्ठान आईएनएस अग्रणी से पकड़ा गया। प्रदीप मुखर्जी वर्ष 2014 में नौसेना में शामिल हुआ था और विशाखापत्तनम स्थित पूर्वी नौसैनिक कमान से जुड़ा था। अधिकारियों के अनुसार वह सोशल मीडिया के जरिए एक महिला पाकिस्तानी खुफिया संचालक के संपर्क में आया था। जांच एजेंसियों का आरोप है कि इसी संपर्क का इस्तेमाल संवेदनशील नौसैनिक सूचनाएं हासिल करने के लिए किया गया।
इसके अलावा, जांच में इस मामले का एक और गंभीर पहलू सामने आया है। अधिकारियों के अनुसार, संदिग्धों को फंसाने के लिए झूठी सोशल मीडिया पहचान, दोस्ती और रिश्तों का जाल तथा पैसों का लालच जैसे तरीके अपनाए गए। इसके अलावा भारतीय मोबाइल नंबरों और मैसेजिंग एप चालू करने के लिए मिलने वाले ओटीपी पासवर्ड का भी इस्तेमाल किया गया। कुछ लेन-देन में वर्चुअल करेंसी और बिचौलियों की भूमिका की भी जांच हो रही है। प्रदीप मुखर्जी पर आरोप है कि उसने पाकिस्तान से जुड़े एक संचालक के लिए मैसेजिंग सर्विस वाला अकाउंट चालू कराने के लिए ओटीपी पासवर्ड शेयर किया और उसके साथ संवेदनशील सूचनाओं का आदान-प्रदान किया।
बताया जा रहा है कि ‘ऑपरेशन फायरवॉल-2026’ के तहत 12 विशेष दलों ने आंध्र प्रदेश के अलावा केरल, महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, गोवा, दिल्ली, तमिलनाडु, छत्तीसगढ़ और बिहार में कार्रवाई की। इन दलों ने संबंधित राज्यों के आतंकवाद निरोधक दस्तों, स्थानीय पुलिस और नौसेना अधिकारियों के साथ समन्वय किया। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि 18 संदिग्धों में से कितने लोग वास्तव में इस कथित जासूसी तंत्र का हिस्सा थे और कितनी संवेदनशील सूचनाएं विदेशी खुफिया तंत्र तक पहुंचीं। पुलिस ने साफ किया है कि दो आरोपियों की भूमिका प्रथम दृष्टया स्थापित होने के बाद गिरफ्तारी की गई है, जबकि बाकी 16 लोगों के डिजिटल संपर्क, आर्थिक लेनदेन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और विदेशी खुफिया संचालकों से संभावित संबंधों की जांच जारी है। बहरहाल, राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े इस मामले में आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां तथा चौंकाने वाले खुलासे सामने आने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।

