Power Cut Ban: पानी चोरी रोकने के लिए बिजली काटना पड़ा भारी! आयोग ने भिलाई-दुर्ग-रिसाली निकायों को लगाई फटकार

Power Cut Ban: पानी चोरी रोकने के लिए बिजली काटना पड़ा भारी! आयोग ने भिलाई-दुर्ग-रिसाली निकायों को लगाई फटकार

Power Cut Ban: गर्मी के दिनों में पानी के अनधिकृत दोहन को रोकने के लिए पूरे इलाके की बिजली काटने के तरीके पर छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग ने आपत्ति जताई है। नल में टुल्लू पंप लगाकर पानी खींचने वालों पर कार्रवाई करने के बजाय दुर्ग, भिलाई और रिसाली निगम क्षेत्रों में करीब एक घंटे की बिजली कटौती की जाती थी। आयोग ने इस व्यवस्था पर नाराजगी जताते हुए निकाय प्रशासन को निर्देश दिए हैं। आयोग का कहना है कि कुछ लोगों की गलती की सजा पूरे क्षेत्र के लोगों को देना उचित नहीं है। बिजली कटौती से आम लोगों की परेशानी बढ़ सकती है।

Bhilai Water Crisis: कुछ लोगों की गलती की सजा पूरे क्षेत्र को क्यों?

आयोग ने कहा कि यदि कुछ लोग नल में टुल्लू पंप लगाकर पानी का अनधिकृत दोहन कर रहे हैं, तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। इसके लिए पूरे क्षेत्र की बिजली बंद करना उचित तरीका नहीं है। सामूहिक रूप से बिजली कटौती किए जाने से उन लोगों को भी परेशानी होती है, जिनका पानी के अनधिकृत दोहन से कोई संबंध नहीं है।

बिजली कटौती से समस्या का समाधान जरूरी नहीं

आयोग के अनुसार, करीब एक घंटे की बिजली कटौती करने से पानी के अनधिकृत दोहन की समस्या का समाधान हो ही जाएगा, इसकी कोई गारंटी नहीं है। इसके बावजूद बिजली बंद होने से आम उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। बिजली पर निर्भर घरेलू कामकाज और अन्य जरूरी गतिविधियां भी प्रभावित हो सकती हैं।

टुल्लू पंप लगाने वालों पर हो सीधी कार्रवाई

आयोग के रुख के बाद अब पानी की चोरी या अनधिकृत दोहन रोकने के लिए संबंधित लोगों पर सीधे कार्रवाई करने पर जोर रहेगा। जिन उपभोक्ताओं द्वारा टुल्लू पंप के जरिए पानी खींचा जा रहा है, उनके खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है। पूरे क्षेत्र की बिजली काटना इसका विकल्प नहीं होना चाहिए।

भिलाई-दुर्ग-रिसाली के लोगों को राहत की उम्मीद

दुर्ग, भिलाई और रिसाली निगम क्षेत्रों में पानी की व्यवस्था को लेकर गर्मी के दौरान अनधिकृत पानी खींचने की शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे मामलों में सामूहिक बिजली कटौती से आम लोगों की परेशानी बढ़ने की आशंका रहती है। आयोग की आपत्ति के बाद अब निकायों को पानी के अनधिकृत दोहन पर कार्रवाई के लिए दूसरे प्रभावी तरीकों पर ध्यान देना होगा।

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